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मैड़ मंडी में मटर की आवक बढ़ने से दाम आधे, किसानों को नहीं मिल रही कीमत

बाणगंगा नदी के मीठे पानी से पनपने वाला स्वादिष्ट मटर के भावों ने एकाएक दम तोड़ दिया। इसके चलते मैड़ अस्थायी मंडी में...

Bhaskar News Network | Last Modified - Mar 01, 2018, 06:35 AM IST

मैड़ मंडी में मटर की आवक बढ़ने से दाम आधे, किसानों को नहीं मिल रही कीमत
बाणगंगा नदी के मीठे पानी से पनपने वाला स्वादिष्ट मटर के भावों ने एकाएक दम तोड़ दिया। इसके चलते मैड़ अस्थायी मंडी में किसानों का मटर बुधवार को महज 8 से 10 रुपए किलो तक बिका। अस्थायी मंडी में किसानों का मटर बिना मोल भाव किए ही भुगतान कर रहे है। व्यापारी एक बारगी किसानों से बगैर भाव तय किए ही मटर खरीद कर बाहरी मंडियों में बेच कर भरपूर मुनाफा कमा रहे है।

मैड़ की अस्थायी मटर मंडी पालड़ी तिराए सहित पंचायत क्षेत्र के बड़े महादेव मंदिर के समीप संचालित है। फसल के शुरुआती दौर में अमूमन 2500 से 3000 रुपए की तादाद में रोजाना मटर की बोरियां पहुंच रही थी जहां व्यापारी 18 से 20 रुपए प्रति किलो के भाव से खरीद रहे थे। मंडी में मटर की आवक बढ़ने से भाव कम होकर 13 से 15 रुपए प्रति किलो ग्राम हो गए। इसके चलते महज एक पखवाड़े बाद ही मटर के भाव एकदम टूटकर केवल 9 से 10 रुपए किलो ही रह गए।

किसान गुलाब चंद खींची, रेवड़राम गुर्जर, रूड़ाराम गुर्जर, औमकार सैनी, कल्याण मीणा, धर्मवीर यादव, डालचंद गुर्जर, भोलाराम मीणा, गंगाराम मेहरा ने बताया कि मटर के इतने न्यून भाव से किसानों की मेहनत भी मुनासिब नहीं हो रही है। किसानों का बिजली बिल, मजदूरी, मंडी तक ले जाने का खर्चा, बारदाना, तुड़ाई सहित अन्य खर्चों को जोड़कर देखा जाए तो किसानों को उल्टा खुद का आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।

पूर्व सरपंच रामेश्वर सैनी, गिर्राज प्रसाद शर्मा, गोपाल खींची, गैंदालाल भार्गव, महेश यादव, सीताराम सैनी आदि ने बताया कि कुंडला क्षेत्र के गांव-ढाणियों के खेत खलियानों से हर रोज मैड़ शाहपुरा सड़क पथ नजदीक सहित पालड़ी तिराहे पर चल रही अस्थायी मंडियों में नियमित रूप से प्रतिदिन 10 हजार से अधिक मटर की बोरियां पहुंच रही है। यहां रोजाना 50 से 60 ट्रक लोडिंग होकर हिन्दुस्तान की ख्याति प्राप्त मंडियों में माल विक्रय के लिए पहुंच रहे है।

मैड. मंडी में मटर तौलते किसान।

कुंडला मेंे 750 हेक्टेयर भू क्षेत्र में है मटर फसल

इस बार कुंडला इलाके के गांव- ढाणियों की लगभग 750 हेक्टेयर कृषि भूमि पर मटर की फसल लहलहा कर खड़ी है। फसल में अभी तक कोई रोग तक नहीं है जिससे फसल की पैदावार बम्पर बनी हुई है। बाणगंगा नदी के मीठे पानी से पैदा होने वाली मटर स्वादिष्ट, सरस, जायकेदार, मीठी होने से अन्य राज्यों की तुलना में बेहतर फसल मानी जाती है। मोहन लाल, सहायक कृषि अधिकारी

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