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आचार्य का 253वां चातुर्मास शाहपुरा में ही, घोषणा के साथ गोटकाजी की शोभायात्रा

ड्रोन से बरसाए फूल, आचार्य रामदयाल ने सूरजपोल से दिए दर्शन भास्कर संवाददाता | शाहपुरा अंतरराष्ट्रीय...

Danik Bhaskar | Mar 07, 2018, 06:40 AM IST
ड्रोन से बरसाए फूल, आचार्य रामदयाल ने सूरजपोल से दिए दर्शन

भास्कर संवाददाता | शाहपुरा

अंतरराष्ट्रीय रामस्नेही संप्रदाय के पांच दिवसीय फूलडोल महोत्सव का समापन मंगलवार को आचार्य रामदयाल महाराज के चातुर्मास की घोषणा के साथ हुआ। दोपहर 12.15 बजे अभिजीत मुहूर्त में आचार्य रामदयाल का वर्षा चातुर्मास शाहपुरा में ही होने की घोषणा के साथ ही भक्तों में उत्साह दौड़ गया।

बारादरी में बिराजे आचार्य के समक्ष शाहपुरा सहित मानवत, महाजनपुरा (मालपुरा), दिल्ली, सूरत, मानपुरा आदि स्थानों से आए अनुयायियों ने चातुर्मास के लिए अर्जियां लगाईं। बारी-बारी से इनका वाचन हुआ। अर्जी वाचन के समय अनुयायी आचार्यश्री के सम्मुख विनती की मुद्रा में करबद्ध रहे। अपने अराध्य महाप्रभु रामचरण महाराज के चरणों में रामनाम सुमिरन करते हुए आचार्य के चातुर्मास की घोषणा की। इसके साथ परंपरा के अनुरूप हस्तलिखित ग्रंथ ‘गोटकाजी’ शाहपुरा के भक्तों को सुपुर्द कर दिया गया। संप्रदाय की परंपरा में आचार्य का यह 253वां चातुर्मास होगा। स्थानीय भक्तों ने धूमधाम से गोटकाजी की शोभायात्रा निकाली। इस दौरान रामद्वारा प्रांगण में आतिशबाजी की व गुलाल उड़ाते हुए खुशी मनाई गई। इससे पूर्व सुबह राममेंडिया से पवित्र पुस्तक वाणीजी का धूमधाम से पंचमी का थाल निकाला गया। नगर पालिका की ओर से मार्ग में पगडंडे बिछाकर ड्रोन से पुष्प वर्षा की गई। बैंडबाजों के साथ शोभायात्रा रामनिवास धाम पहुंची जहां श्रद्धालुओं में वाणीजी को स्पर्श करने की होड़ मच गई।

आस्था के चरणों में श्रद्धा का समर्पण

एमएसडब्ल्यू स्टूडेंट रामनारायण ने ली संत दीक्षा

खाचरोद (मध्यप्रदेश) के रामनारायण पोरवाल को महोत्सव के दौरान उनके गुरु तोताराम ने चादर ओढ़ाकर संत दीक्षा दी। 24 वर्षीय रामनारायण कोटा से एमएसडब्लू कर रहे हैं। वे 4 वर्ष की उम्र से खाचरौद के रामद्वारा में बतौर शिष्य रह रहे हैं। दीक्षा पश्चात आचार्य रामदयाल महाराज स्वयं बारादरी से आए। रामधाम प्रांगण में सूरजपोल से देशभर से आए हजारों श्रद्धालुओं को दर्शन देते हुए आशीर्वाद दिया। करीब 20 मिनट के इस दर्शन के दौरान कई भक्तों के अश्रुधार निकल पड़ी। वर्ष में केवल एक बार ही आचार्यश्री यहां से अनुयायियों का अभिवादन स्वीकार करते हुए आशीर्वाद देते हैं। रात में पंचमी का जागरण हुआ। आचार्य ने धर्मसभा को भी संबोधित किया। निर्मलराम महाराज, संत रामप्रसाद बड़ौदा, संत दिग्विजयराम चित्तौड़गढ़, संत रामविश्वास, संत जगवल्लभ राम आदि उपस्थित थे। इधर, अलग-अलग स्थानों से आए श्रद्धालुओं का लौटना शुरू हो गया।