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महिला दिवस : कुशल गृहिणी राजनीति में आकर कर रही है जन सेवा

शाहपुरा | करीब ढाई साल पहले किसी को भी पता नहीं था कि एक साधारण परिवार की गृहिणी चेयरमैन बनकर महिलाओं के गौरव को...

Danik Bhaskar

Mar 08, 2018, 06:50 AM IST
शाहपुरा | करीब ढाई साल पहले किसी को भी पता नहीं था कि एक साधारण परिवार की गृहिणी चेयरमैन बनकर महिलाओं के गौरव को बढ़ाएगी। नगरपालिका चेयरमैन रजनी पारीक सामाजिक संगठनों को साथ लेकर शहर को पॉलिथीन मुक्त बनाने में जुटी हुई है। रोजाना पालिका कर्मचारियों को बाजार में भेजकर पॉलिथीन उपयोग नहीं लेने की व्यापारियों व दुकानदारों को हिदायत दिलवाती है। कुछ दिन पूर्व शहर को स्वच्छ बनाने के लिए पालिका स्तर पर चलाए अभियान के दौरान प्रत्येक दुकान के सामने कचरा पात्र लगवाया। दुकानदारों को इसके लिए बाध्य किया। इसका दुकानदारों ने भी भरपूर सहयोग दिया। इसके बाद उन्होंने रणवीर सेवा समिति के कार्यकर्ताओं को साथ लेकर पॉलिथीन के खिलाफ अभियान भी चलाया। अभियान में भामाशाह एयू फाइनेंस बैंक के सीनियर वाइस प्रेसीडेंट सुल्तानराम पलसानियां का सहयोग लेकर दुकानदारों को कैरी बैग वितरण करवाए। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री द्वारा महिला दिवस पर बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ योजना का विस्तार करने से बालिकाओं का शैक्षणिक स्तर सुधरेगा। उन्होंने महिला दिवस पर महिलाओं से कहा कि अपने सम्मान के लिए जीए और निडरता से कठिनाइयों का सामना करें। उन्होंने बेटियों को बेटों के बराबार शिक्षा दिलाने का आह्वान किया।

रजनी पारीक

महिलाओं के लिए प्रेरणास्रोत है डॉ.कमला बेनीवाल

शाहपुरा | पूर्व राज्यपाल डॉ.कमला बेनीवाल महज 27 साल की उम्र में राजस्थान की पहली महिला मंत्री बनी। इससे महिलाओं में आगे बढ़कर समाज व देश की सेवा करने का मनोबल बढ़ाञ घुड़सवार में माहिर डॉ.कमला ने 1954 से कांग्रेस शासनकाल में सभी मुख्यमंत्रियों के मंत्रिमंडल में विभिन्न विभागों में मंत्री, उपमुख्यमंत्री से राज्यपाल तक का सफर तय किया। राजस्थान राज्य सहकारी संघ के अध्यक्ष के तौर पर उन्होंने सहकारिता मंच के क्वालाम्लापुर, पेरिस एवं मास्को सम्मेलन में भारत का प्रतिनिधित्व कर नारी सम्मान को नई ऊंचाई दी। अपने कार्य की पूर्ण समझ होने के कारण अधिकारियों से उच्च कोटि का कार्य करवाने में सिद्धहस्त रही डॉ.कमला ने न तो अपनी बेटियों की शादी में दहेज दिया और न ही अपने पुत्र के विवाह में दहेज लिया। उन्होंने इसके जरिए समाज में दहेज प्रथा के खिलाफ सकारात्मक संदेश दिया। उन्होंने महिलाओं से कहा कि वे अपने आत्म सम्मान की रक्षा करें। महिलाओं को घुंघट से बाहर निकलकर प्रत्येक क्षेत्र में अपनी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करनी चाहिए। जीवन में महिलाओं को आगे बढ़ने के लिए निरंतर संघर्ष करना चाहिए।

सपने में भी नहीं सोचा था कि कभी मेट्रो चलाऊंगी

पावटा | प्रदेश की पहली मेट्रो चालक कस्बा निवासी मोनिका मित्तल ने बताया कि महिलाओं को कभी भी संघर्ष से दूर भागना नहीं चाहिए बल्कि उससे मुकाबला कर जीत हासिल करना चाहिए। उसने सपने में भी कभी नहीं सोचा था कि वह कभी मेट्रो रेल को चलाएगी। बताया कि सरकारी जॉब के लिए बैंक पीओ की तैयारी शुरू की। इस दौरान जयपुर में मेट्रो लगने के बाद उन्होंने आवेदन किया था। उनका मेट्रो चालक के पद पर चयन हो गया। हालांकि पहले तो मन में घबराहट रही कि इतनी बड़ी जिम्मेदारी कैसे निभाऊंगी, लेकिन हिम्मत जुटाकर डयूटी ज्वाइन कर ली। वह जयपुर मेट्रो की पहली महिला चालक है। शादी के बाद पति गिरिराज ने भी उनकी हौसला अफजाई की।

मोनिका मित्तल

डा. कमला बेनीवाल

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