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महिलाओं में मिसाल है ग्वाले से कृषि वैज्ञानिक बनी डॉ.सरोज

शाहपुरा | शाहपुरा तहसील के परमानपुरा निवासी डॉ.सरोज बालिकाओं के लिए यूथ आइकन से कम नहीं है। उसने कठिन परिस्थितियों...

Danik Bhaskar | Mar 08, 2018, 06:50 AM IST
शाहपुरा | शाहपुरा तहसील के परमानपुरा निवासी डॉ.सरोज बालिकाओं के लिए यूथ आइकन से कम नहीं है। उसने कठिन परिस्थितियों में संघर्ष कर एक ग्वाले से कृषि वैज्ञानिक बनकर एक महिला का सम्मान ऊंचा कर दिखाया है। डॉ.सरोज ने बताया किा उनका नाता गरीब परिवार से रहा है। फुलेरा तहसील के गुमानपुरा में पिता बन्नाराम जाट की चार बेटियों में सबसे छोटी बेटी थी। परिवार में शिक्षा का माहौल नहीं होने पर भेड़- बकरियों को चराने का काम करती थी। उसके बाद जन्मे दो भाइयों को बकरी चराने के साथ -साथ सरकारी स्कूल तक लाने ले जाने की जिम्मेदारी दी गई। वह अपने भाइयों को को छोड़कर स्कूल के बाहर ही उनका इंतजार करती रहती। एक दिन शिक्षकों ने उसे भी कक्षा में बैठा दिया। इसके बाद उसकी विलक्षण प्रतिभा को देखकर गुरूजनों ने माता- पिता को समझाकर जोबनेर के बालिका स्कूल में पढ़ाई के लिए दाखिला दिला दिया। शादी के बाद भी पति बनवारीलाल जाट का पूरा सहयोग मिलने से पढ़ाई का सिलसिला चलता गया जो अब कृषि वैज्ञानिक बनकर थमा है। अब तक डॉ.सरोज चौधरी के 10 रिसर्च पेपर इन्टरनेशनल शोध जर्नल्स में प्रकाशित हो चुके हैं। रेडियो में किसान वार्ता और राष्ट्रीय अखबारों और पत्रिकाओं में कई लेख छप चुके है। डॉ. सरोज सीधे महिला किसानों के लिए उपयोगी तकनीकों को उनकी भाषाओं में पहुंचा रही है और भावनगर गुजरात की महिलाएं हाथोहाथ ले रही है। जब भी उच्च शिक्षा के लिए कोई लड़की गरीबी और अभावों का बहाना बनाती है तो डॉ. सरोज का उदाहरण दिया जाता है।