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शीतला माता की पूजा, कलश यात्रा निकाली

कार्यालय संवाददाता | शाहपुरा शहर एवं आसपास क्षेत्र में शीतलाष्टमी पर्व धूमधाम से मनाया गया। महिलाओं ने शहर के...

Bhaskar News Network | Last Modified - Mar 09, 2018, 07:00 AM IST

कार्यालय संवाददाता | शाहपुरा

शहर एवं आसपास क्षेत्र में शीतलाष्टमी पर्व धूमधाम से मनाया गया। महिलाओं ने शहर के सेडकाकाबास स्थित कुम्हारों के मोहल्ले स्थित सेड़माता मंदिर में महिलाओं ने ठंडे पकवानों से भरा कंडवारा का भोग लगा कर विधिवत माता की पूजा अर्चना की। वही सेडमाता मंदिर में श्रद्धालुओं का सवेरे 4 बजे से ही पहुंचना शुरू हो गया था,जो दोपहर बाद तक जारी रहा। जय श्री शीतला माता समिति के कार्यकर्ता लकी मीणा, कपिल मीणा, महावीर प्रजापत, दीपक, आशुतोष,जगदीश, सुभाष, मनीष, रवि, अजय ,किशन, सोनू ,बहादुर आदि कार्यकर्ताओं ने महिलाओं को लाइन से मंदिर तक पहुंचाने का कार्य कर रहे थे। मंदिर में डीजे की धुनों पर माता के भजनों पर पार्षद किरण शर्मा सहित अनेक महिलाओं को नृत्य करते देखा गया ।

अमरसर| हनूतपुरा गांव में सुबह 9 बजे से शीतला माता की कलश यात्रा निकाली। इस दौरान शीतला माता रानी की झांकी व शीतला माता की कलश यात्रा निकाली गई। शीतला माता रानी की पद यात्रा नाचते गाते हुए देवनगरी से रवाना होकर कुम्हारो के मोहल्ले में होते हुए मुख्य बजार, ब्राह्मणों, रैगरों के मोहल्ले होते हुए वापस देवनगरी हनूतपुरा के शीतला माता मंदिर में पहुंची। शुक्रवार को मेले की व्यवस्थाओं पर भी विचार विमर्श कर तैयारियों पर चर्चा की गई। मेला शीतला माता मंदिर कमेटी व समस्त ग्रामीण कर रहे है। ग्यारसी लाल प्रजापत, नेमी चन्द, महेश कुमार, श्रवण कुमार, रामचन्द्र, गोपी राम, बजरंग कुमार, बजरंग, राजू आदि मौजूद थे।

भाबरु| क्षेत्र में शीकवा पर्व मनाया। महिलाओं ने सेड माता के ठंडे पकवानों का भोग लगाकर पूजा अर्चना की। कस्बे के सेड माता मंदिर परिसर में सुबह ही महिलाएं बड़ी तादाद में पहुंची।

चाकसू में शीतला माता का मेला शुरू

जटवाड़ा| शीतलाष्टमी का पर्व क्षेत्र में शुक्रवार को मनाया जाएगा। इससे पहले गुरुवार को घरों में शीतला माता को भोग के लिए पुए, पापड़ी, राबड़ी, लापसी और गुलगुले सहित विभिन्न पकवान तैयार किए गए। शुक्रवार को महिलाएं शीतला माता की पूजा.अर्चना कर उन्हें ठंडे पकवानों का भोग लगाकर परिजनों की सुख-समृद्धि की कामना करेगी। चाकसू में शीतला माता का प्रसिद्ध मेला गुरुवार से शुरू हो गया।

इसलिए लगाते हैं ठंडे पकवानों का भोग : होली के बाद मौसम का मिजाज बदलने लगता है और गर्मी भी धीरे-धीरे कदम बढ़ाकर आ जाती है। बास्योड़ा मूलतः इसी अवधारणा से जुड़ा पर्व है। इस दिन ठंडे पकवान खाए जाते हैं। बाजरे की रोटी, छाछ, दही का सेवन शुरू हो जाता है ताकि गर्मी के मौसम और लू से बचाव हो सके। शीतला माता के पूजन के बाद उनके जल से आंखें धोई जाती हैं।

माता की कथा : एक बार शीतला माता अपने भक्तों के बारे में जानने के लिए निकली। राजस्थान के डूंगरी गांव में माता गलियों में घूम रही थी तभी किसी ने उनके ऊपर चावल का गर्म मांड फेंक दिया जिससे उनके शरीर पर फफोले पड़ गए। दर्द से आहत माता ने बहुत पुकार लगाई मगर किसी ने उनकी मदद नहीं की। उसी समय एक कुम्हार महिला ने माता की परेशानी देखकर उनके ऊपर ठण्डा पानी डाला ओर खाने के लिए बासी राबडी और दही दिया। ठण्डक मिलने से माता को आराम मिला तो उस कुम्हार महिला ने माता के बिखरे बाल देखकर उनकी चोटी गूंथने की बात कहते हुए उनकी चोटी बनाने लगी। इसी दौरान माता के बालों में छिपी आंख देकर वो डर गई। कुम्हार महिला को डरा देखकर माता अपने असली रूप में आई और उसे सारी बात बताई। बाद में महिला की मनुहार पर माता ने उसी गांव में रहना स्वीकार किया। उसे अपनी पूजा का अधिकार भी दिया, तब से उस गांव का नाम शील की डूंगरी पड़ा, जहां हर साल माता का मेला भरता है।

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