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अनुशासन, होमवर्क जैसे 5 पैमानों पर खरी उतरी अंजली बनीं एक दिन की प्रिंिसपल, 352 विद्यार्थियों ने एक महीने चलेे सर्वे मेंे चुना

बेटियों को बोझ मानने वालों के लिए गांव कांदा के राजकीय उच्च माध्यमिक स्कूल की पहल बड़ी सीख है। स्कूल ने 12वीं की...

Bhaskar News Network | Last Modified - Feb 03, 2018, 07:10 AM IST

बेटियों को बोझ मानने वालों के लिए गांव कांदा के राजकीय उच्च माध्यमिक स्कूल की पहल बड़ी सीख है। स्कूल ने 12वीं की छात्रा को एक दिन का प्रिंसिपल बनाया है। पहले से कई विशेषताओं वाले स्कूल के प्रबंधन ने छात्रा का चयन करने के लिए भी अनूठा तरीका अपनाया। चयन की प्रक्रिया एक महीने चली।

इसके लिए प्रिंसिपल अशोक कुमार श्रोत्रिय ने शिक्षक राजेंद्र पारीक व प्रकाश गोस्वामी को जिम्मेदारी दी। इन्होंने एक महीने में 352 छात्र-छात्राओं से बातचीत के बाद अंजली जाट का नाम तय किया। इसका आधार व्यक्तित्व, उपस्थिति, अनुशासन, होमवर्क और शैक्षणिक स्थिति रहा। प्रिंसिपल अशोककुमार श्रोत्रिय का कहना है कि बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान से प्रेरित होकर पहल की। इसका मकसद छात्राओं का आत्मविश्वास बढ़ाना है।

एक दिन की प्रिंसिपल अंजली सुबह ठीक 9:30 बजे स्कूल पहुंची। प्रार्थना सभा में अंजली ने छात्राओं को आत्मविश्वास रखने, श्रेष्ठ परिणाम देने की सीख दी। इसके बाद प्रिंसिपल श्रोत्रिय ने दिन भर किए जाने वाले कार्यों एवं विभिन्न गतिविधियों के रजिस्टर संधारण, अध्यापक डायरी के बारे में बताया। इसके बाद सभी शिक्षकों की अध्यापक डायरी देखी। 8वीं कक्षा का निरीक्षण किया। वहां संस्कृत की क्लास चल रही तो बच्चों से संस्कृत श्लोक पूछे।

खासियत | 9वीं से 12वीं में 75 लड़कियां व 45 लड़के, स्वच्छता में भी अागे

यह स्कूल कई मायनों में खास है। स्कूल में 352 स्टूडेंट हैं, जिनमें 186 बेटी व 166 बेटे हैं। अच्छी बात ये है कि 9वीं से 12वीं तक छात्राओं की संख्या 75 और छात्रों की संख्या 45 है। इसके अलावा स्वच्छता में पहले नंबर पर रह चुका है। यहां स्वच्छता के प्रयास ऐसे हैं कि हाथ और बर्तन धोने के लिए तीन स्तर तय किए हुए हैं। प्रिंसिपल बनी अंजली ने कक्षा 10वीं के निरीक्षण में विज्ञान की गृहकार्य की कॉपी देखी। बच्चों से बोर्ड परिणाम पर चर्चा करते हुए बताया कि सभी छात्र-छात्राएं प्रथम श्रेणी लाने के लिए नियमित पढ़ाई करें। 9वीं कक्षा में बच्चों से मौलिक अधिकारों, व्यस्क मताधिकार के प्रश्न पूछे। बच्चों ने सही जवाब दिया। शिक्षक से कहा कि समय पर होमवर्क की जांच होनी चाहिए। इधर, प्रिंसिपल अशोक कुमार श्रोत्रिय का कहना है कि अंजली को एक दिन की प्रिंसिपल इसलिए बनाया कि बेटियों को महसूस हो कि उनका सम्मान करने के लिए सब हैं। समाज में एक संदेश भी जाए कि एक बच्ची को हम प्रिंसिपल बनाएं तो वो कैसा महसूस करें। लोग समझें बच्चियां सब कुछ कर सकती हैं।

अंजली

एक दिन की प्रिंसिपल बनकर मन में गर्व महसूस हुआ। समाज को बेटियों के प्रति हीन भावना में सुधार करना चाहिए। आज बेटियां क्या काम नहीं कर सकती जो एक बेटा कर सकता है। प्रधानाचार्य सर के इस प्रयास से समाज में एक अच्छा संदेश जाएगा। - अंजली, एक दिन की प्रिंसिपल

बेटियाें के बढ़ते कदम

352विद्यार्थी हैं स्कूल में

166छात्र

186छात्राएं

फिरदौस ने फिर बढ़ाया मान

131 गोल्ड जीतने वाली बेटी को खेलो इंडिया में भी स्वर्ण

शाहपुरा | नई दिल्ली में आयोजित खेलो इंडिया राष्ट्रीय तैराकी प्रतियोगिता में शाहपुरा की बेटी फिरदौस कायमखानी ने स्वर्ण पदक जीता। फिरदौस के पिता हबीब खान ने बताया कि 1 से 4 फरवरी तक होने वाले राष्ट्रीय खेल प्रतियोगिता में फिरदौस ने 100 मीटर बटर फ्लाई तैराकी में स्वर्ण पदक जीता। िफरदौर की बहन फिजा भी खेलो इंडिया स्पर्धा में गई हुई हैं। उनका पहला इंवेन्ट शनिवार को होगा।

िफरदौस ने22 राष्ट्रीय स्पर्धा में भाग लिया

इनमें6 गोल्ड7 सिल्वर व3 कांस्य पदक जीते

राज्य स्तर की प्रतियोगिताओं मेंे125 गोल्ड मैडल जीते

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