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उपनिषदों में छिपा है जीवन का रहस्य

राजस्थान ग्रामोत्थान एवं संस्कृत अनुसंधान संस्थान के निदेशक व संगोष्ठी संयोजक डां.शंकरलाल शास्त्री ने कहा कि...

Bhaskar News Network | Last Modified - Feb 26, 2018, 07:10 AM IST

राजस्थान ग्रामोत्थान एवं संस्कृत अनुसंधान संस्थान के निदेशक व संगोष्ठी संयोजक डां.शंकरलाल शास्त्री ने कहा कि उपनिषदों में छिपा है जीवन का रहस्य। डां. शास्त्री रविवार को संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार द्वारा प्रायोजित एवं राजस्थान ग्रामोत्थान एवं संस्कृत अनुसंधान की ओर से आयोजित त्रि-दिवसीय राष्ट्रीय शोध संगोष्ठी के दूसरे दिन रविवार को तृतीय व चतुर्थ सत्र की अध्यक्षता करते हुए उन्होंने ये बात कही। उन्होंने प्रहदावन्यकोपनिषद के पांचवे अध्याय का जिक्र करते हुए कहा कि प्रजापति द्वारा अपनी संतानों देवों, मनुष्यों, असुरों को शिक्षा देने के पश्चात उन्हें कर्तव्य ज्ञान का उपदेश देते हुए कहा कि देवों ने द से दमन समझकर अपनी इच्छाओं का दमन किया। मनुष्यों ने दान समझकर उदारता तथा राशसों ने दयालुता समझ कर दयालुता धारण की। उन्होंने कहा कि माया सांसारिक प्रलोभनों की जननी है। उन्होंने शरीर के रथ और आत्मा को रथी तथा बुद्धि को सारथी एवं मन को बांधने की रस्सी बताकर जनहित के पयार्य सिद्ध किये। उन्होंने कहा कि भोगमयी प्रवृति वाले को उपनिषद के तपो मार्ग में असफ लता के कारण हमेशा निराशा ही रहती है और रहेगी। उन्होंने मानवीय हितों के लिए उपनिषदों को मिल का पयार्य सिद्ध किया।

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