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तीन दिवसीय राष्ट्रीय शोध संगोष्ठी संपन्न, जनहित की पर्याय है संस्कृत

कार्यालय संवाददाता | शाहपुरा शहर के बाबा गंगादास राजकीय महिला महाविद्यालय परिसर में संस्कृति मंत्रालय भारत...

Dainik Bhaskar

Feb 27, 2018, 08:05 AM IST
तीन दिवसीय राष्ट्रीय शोध संगोष्ठी संपन्न, जनहित की पर्याय है संस्कृत
कार्यालय संवाददाता | शाहपुरा

शहर के बाबा गंगादास राजकीय महिला महाविद्यालय परिसर में संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार द्वारा प्रायोजित एवं राजस्थान ग्रामोत्थान एवं संस्कृत अनुसंधान संस्थान की ओर से संस्कृत वाड्मय में जनहित भाव विषयक तीन-दिवसीय राष्ट्रीय शोध संगोष्ठी का संस्कृत शिक्षा के पूर्व निदेशक प्रो.सोहनलाल शर्मा के मुख्य आतिथ्य में समापन हुआ।

शर्मा ने कहा कि संस्कृत जनहित का पर्याय है। मंगल सुनें, मंगल देखें तथा अपने और पराए का भाव त्याग कर संस्कृत में छिपे जनहित को आत्मसात् करना चाहिए।

उन्होंने यजुर्वेद का जिक्र करते हुए कहा कि सभी को मित्र की दृष्टि तथा मेरा मन कल्याण संकल्पों वाला हो इसी सकारात्मक सोच और जनहित कारी भावना होनी चाहिए। संगोष्ठी संयोजक डाॅ. शंकरलाल शास्त्री ने कहा कि संस्कृत के मंत्र उच्चारण से हमें मानसिक और शारारिक स्वास्थ्य बनाए रखने के लिए प्रबलता मिलती है। इस शोध से जुड़े कई आधार भी सिद्ध किए गए। उन्होंने गीता के भक्ति एवं सांख्य योग आदि के जनहित पक्षों को प्रकट करते हुए संस्कृत में सूक्ति साहित्य का सार मंथन करते हुए कहा कि जो पाप से हटाता है अच्छे कार्यो में लगाता है। दोषों को छिपाता है तथा गुणों को प्रकट करता है सही मायने में वही मित्र है। डाॅ. शास्त्री ने संस्कृत जनहित पर आधारित सुन्दर गीत सुनाकर उपस्थित श्रोताओं को मंत्र मुग्ध कर दिया। उन्होंने कहा कि वेद, उपनिषद पुराण, साहित्य, नाटक आदि में वर्णित जनहित से जुड़े 96 शोधपत्र प्रस्तुत किए गए। विशिष्ट अतिथि नगर पालिका अध्यक्ष रजनी पारीक ने संस्कृत को प्रोत्साहित करने की बात पर बल देते हुए इससे जुड़े युवा वर्ग को अपने जीवन में आत्म सात करने की बात कही। शिक्षाविद् काशीप्रसाद शर्मा ने लौकिक और पार लौकिक जीवन में संस्कृत को आधार बताया। अध्यक्षता कर रहे प्रो. सीताराम कुमावत ने वैदिक कृषि और उसका मानव जीवन पर पड़ने वाले सकारात्क पक्षों जैसे जन कल्याण भावों को अपने व्याख्या का विषय बनाया। संगोष्ठी में पढ़े गए 96 शोधपत्रों को ग्रन्थाकार में प्रकाशित करवाया जाएगा। इससे पहले छात्राओं ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। शोध संगोष्ठी संयोजक एवं संस्थान निदेशक डां शंकरलाल शास्त्री द्वारा प्रकाशित संदर्भ ग्रन्थों व शोध पत्रिका साहित्य मंदाकनी में शोध संदभों को तलाश व प्रदर्शनी लगाई गई। शोध संगोष्ठी के सह संयोजक दीपक यादव व अशोक स्वामी ने आभार जताया।

शाहपुरा. राजकीय महिला कॉलेज में राष्ट्रीय संगोष्ठी में मंचासीन अतिथि।

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