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अच्छी पहल : सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों की रचनात्मकता बढ़ाने और उन्हें बदलते परिप्रेक्ष्य के अनुरूप बनाने की कोशिश

सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों की रचनात्मकता बढ़ाने और उन्हें बदलते परिप्रेक्ष्य के अनुरूप ढालने के उद्देश्य...

Danik Bhaskar | Sep 12, 2018, 06:21 AM IST
सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों की रचनात्मकता बढ़ाने और उन्हें बदलते परिप्रेक्ष्य के अनुरूप ढालने के उद्देश्य से शिक्षा विभाग एक पुरानी योजना शनिवारीय बालसभा को नए स्वरूप में शुरू कर रहा है। इसके अंतर्गत सरकारी स्कूलों में कक्षा 1 से 12वीं के विद्यार्थियों के लिए महीने के दूसरे व आखिरी शनिवार को जॉय फुल सैटरडे यानी आनंददायी शनिवार का आयोजन किया जाएगा। इस संबंध में राजस्थान स्कूल शिक्षा परिषद की राज्य परियोजना निदेशक ने निर्देश जारी किए है।

अरसे पहले स्कूलों में शनिवार को बालसभा का आयोजन किया जाता था। समय के साथ शैक्षणिक कैलेंडर से इसका अस्तित्व खत्म हो गया था। अब फिर से इसे आनंददायी दिवस के रूप में शुरू किया जा रहा है। योजना के तहत इस दिन मध्यांतर के बाद विद्यार्थियों के व्यक्तित्व के सर्वांगीण विकास के लिए विभिन्न रचनात्मक गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा। इसमें वाद-विवाद, श्लोक वाचन, भाषण, गीत, कविता, लोकगीत, नृत्य, विज्ञान के प्रयोग, जादू प्रदर्शन, फिल्म प्रदर्शन, खेल, प्रेरक लोगों के जीवन प्रसंगों का वाचन, पजल हल करना जैसी कई गतिविधियां शामिल की जाएगी।

कलाओं के माध्यम से बनेंगे होनहार

इस पहल के पीछे सोच यह है कि बच्चे रचनात्मक और सृजनात्मकता होते हैं। कोई भी नई चीज आसानी से सीखने का बच्चों में कौशल होता है। विभागीय परिपत्र में बताया कि सृजनात्मक शक्ति का विकास, संप्रेषण क्षमता एवं सहभागिता का विकास, एकाग्रचित, चिंतन एवं तार्किक क्षमता का विकास, समूह में पारस्परिक सीखने का विकास, शारीरिक विकास, दबावमुक्त, आनंददायी सीखने का वातावरण, मूल्यों का विकास आदि उद्देश्य को लेकर स्कूल स्तर पर अवसर देकर बच्चों को होनहार बनाया जा सकेगा।

लेखन-अभिनय से लेकर खेलकूद तक की गतिविधियां होंगी शामिल। चिंतन, तार्किक कौशल- पहेलियां हल करना, विज्ञान एवं गणित के जादू प्रदर्शन, पुस्तकालय से पुस्तक का स्वाध्याय एवं विचार अभिव्यक्ति, क्विज एवं सामान्य ज्ञान प्रश्नोत्तरी, सद्साहित्य, महाकाव्यों पर प्रश्नोत्तरी।

शारीरिक कौशल : लंबी कूद, ऊंचीकूद, विभिन्न प्रकार की दौड़ यथा- कुर्सी दौड़, चम्मच दौड़, तीन टांग दौड़, बोरी दौड़, रूमाल झपट्टा, सतोलिया, कबड्डी, खो-खो, वॉलीबॉल, फुटबॉल, बैडमिंटन, क्रिकेट आदि के साथ ही विभिन्न इंडोर गेम।

सामाजिक संवेदनशीलता कौशल

आईसीटी लैब, प्रोजेक्टर पर फिल्म प्रदर्शन, मोटिवेशनल और जेंडर बेस्ड वीडियो प्रदर्शन-जिसमें गुड टच-बेड टच के बारे में जानकारी, बाल संरक्षण से संबंधित पीपीटी प्रजेंटेशन, चाइल्ड राइट क्लब गतिविधियां, वन एवं पर्यावरण क्लब, रोड सेफ्टी क्लब, मीना-राजू मंच की गतिविधियां और स्कूल परिसर में पेड़ पौधे लगाना आदि कार्य।

अभिव्यक्ति कौशल

इसके तहत वाद-विवाद, संस्कृत श्लोक वाचन, गीत, कविता, लोकगीत, कहानी आदि के साथ ही नृत्य, लेखन के तहत कहानी, घटना, कविता, श्रुतिलेख, सुलेख, संप्रेषण के तहत अविस्मरणीय घटना सुनाना, नाटक, एकाभिनय, मूकाभिनय, अंत्याक्षरी के साथ ही महापुरुषों, वैज्ञानिकों, दार्शनिकों, गणितज्ञों, साहित्यकारों के जीवन के प्रेरक प्रसंगों का वाचन शामिल किए गए हैं।

सामुदायिक कौशल

पुलिस, डॉक्टर, नर्स, वकील, इंजीनियर, बैंक, कर्मी आदि की बारी-बारी से वार्ता कराना। दैनिक कामगार बढ़ई, कुम्हार, कारीगर, किसान, लुहार, पेंटर, दुकानदार आदि से उनके काम के बारे में जानना। संस्कार सभा के अंतर्गत दादी-नानी द्वारा परंपरागत प्रेरक कहानियों का वाचन व राष्ट्रीय महत्व के समय सामयिक समाचारों एवं घटनाओं की समीक्षा तथा प्रबुद्धजनों का उद्बोधन।

सृजनात्मक कौशल : कबाड़ से जुगाड़, चित्रण-धागों से, सब्जी-फल ठप्पा, अंकों, ज्यामितीय आकृतियों से, थंब पेंटिंग, चित्रों में रंग भरना आदि। मुखौटे निर्माण, मिट्टी, कपड़े, लकड़ी कागज आदि से खिलौने बनाना, मॉडल चार्ट निर्माण आदि कार्य सीखाए जाएंगे।