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पद्मश्री नारायणदासजी से मिले संस्कृत शिक्षक, हस्तक्षेप की लगाई गुहार

शाहपुरा | त्रिवेणी धाम स्थित रामचरित्र मानस भवन मे संस्कृत शिक्षा विभाग के सम्पूर्ण राजस्थान के संस्कृत शिक्षकों...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 12, 2018, 04:55 AM IST

शाहपुरा | त्रिवेणी धाम स्थित रामचरित्र मानस भवन मे संस्कृत शिक्षा विभाग के सम्पूर्ण राजस्थान के संस्कृत शिक्षकों व संतों की त्रिवेणी धाम के पुजारी रामरिछपाल दास जी महाराज के सान्निध्य में बैठक हुई। हाल ही मंत्रिमंडल की बैठक में संस्कृत शिक्षा विभाग के सेवा नियमों में बदलाव करने का विरोध करने पर चर्चा की गई। पुजारी रामरिछपाल दास महाराज ने कहा कि देववाणी संस्कृत के सेवा नियमों में अगर बदलाव किया गया तो संस्कृत शिक्षा के संकट की स्थिति पैदा हो जाएगी। वैसे भी भारत वर्ष में सबसे पुरानी संस्कृत भाषा है जिसकी सेवा नियमों में बदलाव किया गया तो संस्कृत भाषा के साथ भारत की प्राचीन संस्कृति भी पूर्णतया विलुप्त होती चली जाएगी। संस्कृत अनुरागियों ने सेवा नियमों के बदलाव को संस्कृत भाषा का राजस्थान में अन्त होने की स्थिति पैदा होने से पूर्व एकजुट होकर विरोध करने का निर्णय किया। साथ ही सरकार से सेवा नियमों मे बदलाव नहीं करने की मांग की। सम्पूर्ण राजस्थान से संस्कृत शिक्षा विभाग से आए शिक्षक त्रिवेणी धाम के संत पद्मश्री नारायण दास जी महाराज से मिलकर संस्कृत शिक्षा को बचाने का आग्रह किया। संत नारायण दास जी महाराज ने केन्द्रीय मंत्री कर्नल राठौड़ को ज्ञापन भिजवाया। राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त एवं राजस्थान संस्कृत अकादमी के पूर्व अध्यक्ष डॉ.कलानाथ शास्त्री, राजस्थान संस्कृत साहित्य सम्मेलन के महामंत्री डॉ. राजकुमार जोशी, संस्कृत शिक्षा पूर्व निदेशक राधेश्याम कलावटिया,पूर्व निदेशक सोहनलाल पंच, आशु कवि रामस्वरूप दोतोलिया, प्राचार्य कल्याण चंद बुनकर, पूर्व संस्कृत शिक्षा मंत्री के ओएसडी रघुवीर शर्मा सहित कई संस्कृत शिक्षा के अधिकारी कर्मचारी एवं शिक्षक एवं साधु संत मौजूद रहे।

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