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अमरसरवाटी क्षेत्र में किसानों ने सब्जी-दूध को मंडी में नहीं भेजकर आमजन को बांटा, कुछ सड़क पर फेंका

भास्कर न्यूज | अमरसर/शाहपुरा अमरसरवाटी क्षेत्र में शनिवार को किसानों गांव बंद आंदोलन के दूसरे दिन शनिवार को दूध...

Dainik Bhaskar

Jun 03, 2018, 06:15 AM IST
अमरसरवाटी क्षेत्र में किसानों ने सब्जी-दूध को मंडी में नहीं भेजकर आमजन को बांटा, कुछ सड़क पर फेंका
भास्कर न्यूज | अमरसर/शाहपुरा

अमरसरवाटी क्षेत्र में शनिवार को किसानों गांव बंद आंदोलन के दूसरे दिन शनिवार को दूध व सब्जी मंडियों तक पहुंचाने के बजाय ग्रामीणों को बांटना शुरू कर दिया है। किसान महापंचायत के पदाधिकारियों ने कई गांवों का दौरा कर जगह जगह नुक्कड़ सभाएं आयोजित कर आंदोलन को सफल बनाने का आह्वान किया।

अमरसरवाटी क्षेत्र में दूध संकलन केंद्र हनुतिया, तेजपुरा, राडावास डेयरियों में किसानों ने दूध नहीं देकर बंद का समर्थन किया। सुबह से ही ग्राम पंचायत हनुतिया, राडावास आदि गांव में किसानों ने अपनी सब्जी आमजन में बांटकर गांव बंद का समर्थन किया। युवा जाट मंच राजस्थान के प्रदेश उपाध्यक्ष धर्मसिंह खोखर ने कहा कि गांव बंद आंदोलन के तहत 1 जून को विरोध प्रदर्शन कर शुरूआत की थी। अब किसान भाई अपनी सब्जियों को गरीबों में बांट कर समर्थन करेंगे। इस अवसर पर धर्मसिंह खोखर, लोकेश चौधरी, सुरेश कारेल, बाबूलाल, विक्रम बराला, बाबूलाल चोपड़ा, शिव मित्र मंडल अध्यक्ष सुरेश बराला,हरफूल पलसानिया आदि मौजूद रहे।

शांतिपूर्वक रहेगा आंदोलन

गांव बंद आंदोलन के तहत रविवार को प्रत्येक ग्राम मुख्यालय पर दूध वितरित कर समर्थन किया जाएगा। साथ ही 10 जून तक शांतिपूर्वक विरोध जारी रहेगा। किसानों ने कहा कि जब तक स्वामीनाथन आयोग रिपोर्ट लागू हो, किसानों का संपूर्ण कर्जमाफी हो, किसानों को सब्जियों की लागत का तीन गुना मूल्य मिले, किसानों की सुनिश्चित आय हो तब तक किसान अपनी मांग उठाते रहेंगे।

अमरसर. हनुतिया सहित आसपास में मंडी में नहीं ले जाकर ग्रामीणों को सब्जी बांटते किसान।

हाइवे पर रोकी गाड़ियां, बिखेरी सब्जियां

गठवाड़ी| किसानों के भारत बंद का असर शनिवार शाम को कस्बे में भी देखने को मिला। शाम को एकजुट हुए किसानों ने कस्बे के बस स्टैण्ड पर पहुंच कर दौसा मनोहरपुर हाई वे से गुजरने वाली सब्जी की गाड़ियों को रोक कर वापस रवाना करना शुरू कर दिया। जब चालकों ने आनाकानी की तो उनकी सब्जियों को सड़क पर बिखेर दिया। बाद में समझाइश से गाड़ी वाले आगे नही जा कर यहीं से वापस लौटने लगे। इस मौके पर बाबूलाल कुमावत, कानसिंह चौधरी आदि मौजूद थे।

गांव बंद के आह्वान पर किसानों ने डेयरियों में दूध देना किया बंद

फसलों की उचित कीमत नहीं मिलने से व्यथित है किसान

अमरसरवाटी क्षेत्र में किसानोंं व पशुपालकों द्वारा अपनी विभिन्न मांगों को लेकर किए जा रहे गांव बंद अभियान को लेकर किसानों ने अपना दर्द बयां किया। दुग्ध उत्पादक धर्मसिंह खोखर ने गांव बंद को लेकर जब किसानो से घर घर जाकर संपर्क किया। किसान नेता भगवान सहाय बांगड़, जगदीश सैनी, साधु राम जाट ने बताया कि किसानों को अपनी उपज का वास्तविक मूल्य नहीं मिल पा रहा है। किसान वर्ग से सेवानिवृत कार्मिक रुडाराम कलवानिया ने बताया कि कृषि पर पूर्णत: निर्भर किसानों की आर्थिक स्थिति आज भी दयनीय है तथा मौसम खराबा, बीज खराबी व विपरीत परिस्थितियों तथा बीमारी होने पर फसलें खराब हो जाती है तथा ऊंची कीमत पर खरीदे बीज व दवाइयां खरीदकर खेती मे किसान मेहनत करता है। खेती मे उपज का वास्तविक मूल्य नहीं होने के कारण खेती पर निर्भर किसानों की हालात आज भी दयनीय है।

देशव्यापी आंदोलन के लिए बनाई रणनीति

बस्सी| राष्ट्रीय किसान महासंघ के बैनर तले आहूत एक जून से दस जून तक चलने वाले आंदोलन का असर ग्रामीण इलाकों में दिखाई देने लगा है। गांवों से सप्लाई होने वाले उत्पादों की सप्लाई बाधित होने से मंडियों में सब्जियों की आवक कम होने लगी है। वहीं आंदोलन के दूसरे दिन कई जगहों पर किसान संघों का गठन कर आगे की कार्ययोजना बनाई गई। इधर महासंघ के आंदोलन को देखते हुए जिला कलेक्टर ने भी सभी एसडीएम एवं पुलिस विभाग को पत्र जारी कर इस दौरान कानून व्यवस्था बनाए रखने के निर्देश दिए। जानकारी के अनुसार गठित किसान महासंघ में 110 किसान संघ शामिल है। तथा इसे कई राजनैतिक पार्टियों का समर्थन भी हासिल है। ऐसे में आंदोलन की व्यापकता एवं प्रभाव को देखते हुए प्रशासन चाक चौबंद है।

प्रस्तावित कार्यक्रम

किसान संघ द्वारा दस जून तक प्रस्तावित कार्यक्रम में उपखण्ड मुख्यालयों पर धरना प्रदर्शन सहित असहयोग आंदोलन, सामूहिक उपवास, बलिदान दिवस, पुतला दहन, तालाबंदी एवं भारत बंद जैसे कार्यक्रम किए जायेंगे।

महापंचायत की नुक्कड़ सभाएं

किसान महापंचायत के जिला प्रभारी फूलचंद बड़बड़वाल एवं युवाध्यक्ष रामलाल जाट ने गांव गांव जाकर किसानों से गांव बंद आंदोलन को सफल बनाने की अपील कर दूध व सब्जियां गांव में ही आमजन को वितरित करने की अपील की।

डेयरियों पर दूध की आवक आधी

किसानों ने गांव बंद अभियान को लेकर डेयरियों में धीरे धीरे दूध देना भी बंद कर दिया है। शनिवार शाम को किसानों ने दूध संकलन केंद्रों में नहीं देकर ग्रामीणों को वितरण कर दिया गया। नयाबास डेयरी सचिव रामेश्वर घोसल्या ने बताया कि सप्लाई टैंकर नहीं आने पर ग्रामीणों में दूध का वितरण किया गया। नयाबास डेयरी में 31 मई तक 2000 लीटर दूध संकलन होता था वहां पर शनिवार सुबह तक केवल 1100 लीटर दूध संकलित हो पाया, शाम के समय किसानों ने दूध नहीं दिया। दुग्ध संकलन केंद्र हनुतिया, तेजपुरा, सेपटपुरा, धवली सहित कई डेयरियों पर दूध की आवक बंद सी हो गई।

किसान वर्ग दुखी

तूंगा। किसानों आंदोलन को प्रभावी रूप से सफल बनानें के लिए कस्बे में देवगांव चौराहा स्थित संघ कार्यालय पर शनिवार को भारतीय किसान संघ की तहसील स्तरीय बैठक तहसील अध्यक्ष रामनिवास पंचौली की अध्यक्षता में आयोजित हुई। किसानों संबोधित करते हुए कहा की हमारा देश कृषि प्रधान होते हुए भी देश में किसान वर्ग सबसे ज्यादा दुखी है। उन्होंने एक जून से दस जून तक दूध, फल, सब्जी आदि वस्तुओं को मंडी में नहीं लेकर जाने की बात कही।

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