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2015 में नियुक्त शिक्षकों के भी तबादले

शाहपुरा | तृतीय श्रेणी शिक्षकों के तबादलों के लिए खुद की बनाई नीति को दरकिनार कर दिया और वर्ष 2015 में नियुक्त होने...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jun 29, 2018, 06:15 AM IST

शाहपुरा | तृतीय श्रेणी शिक्षकों के तबादलों के लिए खुद की बनाई नीति को दरकिनार कर दिया और वर्ष 2015 में नियुक्त होने वाले तृतीय श्रेणी शिक्षकों के तबादले एक जिले से दूसरे जिले में कर दिए। राज्य सरकार ने प्रदेश में इस साल मार्च में तबादलों से रोक हटाई थी। इसके बाद शिक्षा विभाग ने 2 अप्रैल को तृतीय श्रेणी शिक्षकों के तबादलों के लिए दिशा निर्देश जारी किए थे। इसमें 31 दिसंबर 2012 तक नियुक्त होने वाले तृतीय श्रेणी शिक्षकों का एक जिले से दूसरे जिले में तबादले के लिए आवेदन करने की शर्त रखी थी। इसमें 31 दिसंबर 2012 तक नियुक्त शिक्षकों का तबादला करने का प्रावधान रखा गया था। बावजूद विभाग ने अपने ही दिशा निर्देशों की अवहेलना कर 2015 में नियुक्त तृतीय श्रेणी शिक्षकों के तबादले एक जिले से दूसरे जिले में कर दिए। इसके चलते शिक्षकों में विभाग के प्रति नाराजगी बढ़ गई। शिक्षकों का कहना है कि विभाग ने तबादलों के लिए जब नीति तय की तो उसी के अनुसार तबादले किए जाने चाहिए। चुनावी साल में विभाग ने माध्यमिक एवं प्रारंभिक शिक्षा विभाग में करीब 30 हजार से अधिक शिक्षकों के तबादले किए है।

इन शिक्षकों के हुए तबादले

केस एक : प्रारंभिक शिक्षा एवं पंचायती राज विभाग के उपशासन सचिव की ओर से 31 मई 2018 को जारी तृतीय श्रेणी शिक्षकों की तबादला सूची में क्रम संख्या 431 पर अंकित मनोज कुमार शर्मा का राउप्रावि खजुरिया बारां से राउप्रावि सोनियासर बीकानेर किया गया। इसकी नियुक्ति 23 मार्च 2015 दर्शाई गई है।

केस दो : 25 जून 2018 को जारी आदेश में राजेंद्र खीचड़ का राउप्रावि नेतसी जैसलमेर से खाजूवाला बीकानेर किया गया। नियुक्ति 20 मार्च 2015 दर्शाए गई है।

केस तीन : 25 जून 2018 को जारी सूची में निर्मला का राउप्रावि लूनाखेड़ा झालावाड़ से डूंगरगढ़ बीकानेर किया गया। इसकी नियुक्ति 20 मार्च 2015 दर्शाई गई।

सरकार भेदभाव करने से बचें

पिछले दिनों हुए तबादला आदेशों में विशिष्ट श्रेणी के शिक्षकों के तबादलों में भी भेदभाव किया है। अनेक शिक्षकों का विशिष्ट श्रेणी में तबादला किया गया लेकिन कई शिक्षकों के विशिष्ट श्रेणी में होने के बावजूद उनके तबादले नहीं किए गए है। 2015 में नियुक्त होने वाले शिक्षकों के तबादले किए जाने से अब परीविक्षा काल पूरा कर चुके शिक्षकों ने भी तबादला करने की मांग की। उनका कहना है कि सरकार को तबादलों में भेदभाव नहीं करना चाहिए। ऐसा करने की बजाय सरकार को परीविक्षा काल पूरा कर चुके शिक्षकों के तबादले करने चाहिए।

नियम विरुद्ध तबादलों को लेकर कर्मचारी कोर्ट में दे रहे चुनौती

अलग- अलग विभागों में नियम विरुद्ध हुए तबादलों को लेकर कर्मचारी नेताओं के चक्कर लगा रहे है। वहां से राहत नहीं मिलने पर आदेश को कोर्ट में चुनौती दे रहे है। राजस्थान सिविल सेवा अपील अधिकरण में सैकड़ों अपील दायर हुई। हाई कोर्ट के एडवोकेट संदीप कलवानिया ने बताया कि पिछले दिनों हुए तबादला आदेशों में हुई अनेक विसंगतियां लेकर कर्मचारी कोर्ट में चुनौती दे रहे है।

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