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सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों को नहीं मिली पूरी किताबें, कैसे करेंगे पढ़ाई

राज्य सरकार द्वारा सरकारी स्कूलों में नामांकन वृद्धि एवं नामांकन ठहराव के उद्देश्य के चलते बालकों को निशुल्क...

Danik Bhaskar | Jun 23, 2018, 06:35 AM IST
राज्य सरकार द्वारा सरकारी स्कूलों में नामांकन वृद्धि एवं नामांकन ठहराव के उद्देश्य के चलते बालकों को निशुल्क पाठयपुस्तक वितरण किया जा रहा है। लेकिन इस सत्र में निशुल्क वितरण की जा रही पाठ्यपुस्तकें कई स्कूलों में पर्याप्त मात्रा में नहीं आई है। ऐसे में विद्यार्थी पूरा कोर्स की किताबें नहीं मिलने से पशोपेश की स्थिति में है। दूसरी कक्षा की तो एक भी किताब नहीं आई है।

जानकारी के अनुसार राज्य सरकार द्वारा सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बालक बालिकाओं को निशुल्क पाठयपुस्तक उपलब्ध करवाती है। ऐसे में इस सत्र 2018-19 के लिए स्कूल में किताबें तो पहुंच गई, लेकिन कई कक्षाओं की आधी अधूरी किताबें ही आई है। कहीं पर अंग्रेजी विषय तो कही गणित विषय की पुस्तकें नहीं मिली। किताबें भी प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक नोडल स्कूलों के अध्यापकों ने जयपुर पाठयपुस्तक मंडल से लेकर आए है, जहां मांग के अनुसार किताबें नहीं दी गई। स्कूलों नोडल केंद्रों द्वारा स्कूलों में किताबों का वितरण कर दिया गया। खोरी नोडल केंद्र सहित कई स्कूलों में कम किताबें आई है। जहां पर किताबें लेने आए अन्य स्कूलों के शिक्षक आधी अधूरी किताबें मिलने पर पशोपेश की स्थिति में नजर आए।

खुडालिया की ढाणी स्कूल के शिक्षक मदनलाल गुर्जर ने बताया कि राउप्रावि खोरी नोडल केंद्र पर जयपुर से आई किताबों में दूसरी कक्षा की एक भी पुस्तक नहीं आई है। इसके अलावा पांचवीं कक्षा की हिन्दी, कक्षा 3 की गणित की पुस्तक भी कम आई है। इसी प्रकार सेपटपुरा के राउप्रावि में भी आठवीं कक्षा की अंग्रेजी विषय की पुस्तक नहीं आई है। शिक्षकों ने किताबें बच्चों को वितरण भी कर दी। ऐसे विद्यार्थी आधी अधूरी किताबें मिलने से मायूस नजर आए। किताबों के अभाव में पढ़ाई बाधित होने की बात को लेकर विद्यार्थी असमंजस की स्थिति में है।

शाहपुरा. खोरी के राउप्रावि नोडल केंद्र पर पुस्तक छांटता शिक्षक।

दूसरी कक्षा की एक पुस्तक भी नहीं मिली

खोरी नोडल केंद्र पर पहली कक्षा से लेकर आठवीं कक्षा तक की किताबें शिक्षकों ने जयपुर जाकर पाठयपुस्तक मंडल से लेकर आए है। जहां मांग के अनुसार किताबें नहीं मिली। जिसमें दूसरी कक्षा की एक भी किताब नहीं आई है। प्रधानाध्यापक सूंडाराम जाट ने बताया कि इसके बारे में ग्राम पंचायत पदेन प्रारंभिक शिक्षा अधिकारी को जानकारी दे दी गई है।

50 प्रतिशत पुरानी किताबें देने का प्रावधान

शिक्षक हंसराज दादरवाल व बाबूलाल पलसानिया ने बताया कि पाठयपुस्तक मंडल से मांग के अनुसार किताबें नहीं दी गई है। वैसे परीक्षा परिणाम सुनाने के दौरान ही बच्चों से किताबें वापस ले ली जाती है। जिसमें 50 प्रतिशत नई एवं 50 प्रतिशत पुरानी किताबों का सैट बनाकर बच्चों को देने का प्रावधान है।

पहली से तीसरी कक्षा के बच्चों को मिलती है नई किताबें

उन्होंने बताया कि पहली से लेकर तीसरी कक्षा में बच्चें छोटे होने के कारण काफी किताबें फटने से नष्ट हो जाती है। जिससे वापस भी कम ही किताबें आती है, जो आती है आधी अधूरी व फटी हुई मिलती है। ऐसे में पहली कक्षा से लेकर तीसरी कक्षा के बच्चों को नई किताबें ही दी जाती है।

दूसरे चरण में मिलेंगी अधूरी रही किताबें