शाहपुरा

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11 साल की राजलक्ष्मी अब कहलाएंगी राजप्रज्ञाश्री

आस्था से ही रास्ता निकलता है। जिस व्यक्ति ने आस्था का चिराग दिल में नहीं जलाया उसका विनाश होना निश्चित है। दुनिया...

Dainik Bhaskar

May 10, 2018, 06:45 AM IST
11 साल की राजलक्ष्मी अब कहलाएंगी राजप्रज्ञाश्री
आस्था से ही रास्ता निकलता है। जिस व्यक्ति ने आस्था का चिराग दिल में नहीं जलाया उसका विनाश होना निश्चित है। दुनिया आस्था के दम पर ही जिंदा है। आत्मा की सोच नहीं रख आसक्ति के लिए इधर-उधर भटकने में समय व्यर्थ न गंवाते हुए वीतराग की शरण में आने तथा संयम को अपनाने से ही परमात्मा से नाता जुड़ सकेगा।

ये विचार कस्बे में 11 वर्षीय मुमुक्षु राजलक्ष्मी जैन की दीक्षा के दौरान उपाध्याय मूलमुनि ने व्यक्त किए। युवा सम्राट राकेश मुनि ने कहा कि व्यक्ति को कुछ बदलना है तो दृष्टि को बदलना चाहिए। आचरण को बदलें तो धर्म से जुड़ पाएंगे। महासती चारूप्रज्ञा ने धर्म के मार्ग पर चलने से जीवन को उत्तम बनाने के के बारे में बताया। इससे पूर्व धर्म माता-पिता अनिल कुमार चौधरी-स्नेहलता चोधरी एवं प्रदीप तरावत-अरुणा तरावत के साथ नवरतनमल पोखरना के घर से बैंड-बाजे के साथ वरघोड़ा निकाला गया। मुमुक्षु 11 वर्षीय राजलक्षमी जैन तथा सांसारिक पिता बाबूलाल जैन निवासी किशनगांव (महाराष्ट्र) के साथ रथ में सवार कराया। पार्श्ववाटिका में उपाध्याय मूलमुनि ने राजलक्ष्मी को संयम का पाठ पढ़ाया। उन्हें राजप्रज्ञाश्री नाम दिया गया है। इस दौरान श्रावक-श्राविकाओं की आंखें नम हो गईं।

कार्यक्रम के दौरान संघ के अध्यक्ष भगवतीलाल पोखरना, पूर्व मंत्री नवरतनमल पोखरना, कोटड़ी सरपंच जमनालाल डीडवानिया, अखिल भारतीय चेरिटेबल ट्रस्ट के राष्ट्रीय अध्यक्ष वीरेंद्र धाकड़, संतोषसिंह चौधरी शाहपुरा, अंजु देवी, इशिका डांगी ने भी विचार रखे। संचालन संघ के मंत्री शांतिलाल पोखरना ने किया। जैन दिवाकर ज्योति पुंज ग्रंथ भाग 7 का विमोचन तथा प्रतियोगिता के उत्कृष्ट परिणाम लाने वाली बहनों का सम्मान किया गया।

कोटड़ी में मूलमुनि के सान्निध्य में हुआ दीक्षा महोत्सव, श्रावक-श्राविकों की आंखें हुईं नम

कोटड़ी. 11 वर्षीय बच्ची ने ली दीक्षा।

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