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आईएएस में चयन | जिले के ग्रामीण युवाओं ने अपनी मेहनत से सपने को किया साकार

मैड़| परिवार की विपरीत परिस्थितियों के बावजूद आईएएस में चयनित होकर सब को आश्चर्य चकित कर दिया। साधारण परिवार में...

Danik Bhaskar | Apr 29, 2018, 07:15 AM IST
मैड़| परिवार की विपरीत परिस्थितियों के बावजूद आईएएस में चयनित होकर सब को आश्चर्य चकित कर दिया। साधारण परिवार में जन्मे पूरावाला पंचायत के छोटे से गांव श्यामपुरा निवासी एक प्राइमरी शिक्षक के 29 वर्षिय पुत्र मनोज रावत ने यूपीएससी सिविल सर्विसेज परीक्षा 2017 के आईएएस परीक्षा परिणाम में 824वीं रैंक हासिल की।

मनोज ने बताया कि वर्ष 2008 में राजस्थान पुलिस में बतौर कांस्टेबल चयन हुआ था। इसके बाद करीब पांच साल पुलिस विभाग में सेवाएं दी। वर्ष 2013 में मनोज का कोर्ट लिपिक भर्ती परीक्षा में चयन हो गया। तब पुलिस की नौकरी छोड़कर सेशन कोर्ट में बाबू बन गया। नौकरी करने लगा लेकिन यहां मन नहीं लगा, क्योंकि सपना और बड़ा था। कोर्ट की जॉब भी छोड़ दी और वर्ष 2014 से आईएएस की तैयारी में जुट गया। वर्ष 2015 में सीआईएसएफ में मनोज का बतौर असिस्टेंट कमांडेंट में चयन हो गया। यह नौकरी ज्वाइन नहीं की और दिल्ली पहुंचकर आईएएस की पढ़ाई शुरू कर दी। इस बीच नेट, जेआरएफ की भी डिग्री हासिल कर ली। आखिरकार कुंडला क्षेत्र के मनोज की मेहनत रंग लाई और सिविल सर्विसेज 2017 में उनका आईएएस में चयन हो गया।

मनोज ने बताया कि आईएएस की तैयारी के लिए दिल्ली में कोचिंग ज्वाइन की। कोई निश्चित वक्त नहीं था लेकिन जितना वक्त मिला उतनी देर पढ़ाई की। इसमें रोजाना करीब आठ घंटे से लेकर दस घंटे तक पढ़ाई की। कोर्स की किताबों के साथ कई मैग्जीन और अखबार पढ़े जिससे देश की घटनाओं और समसामयिक इश्यू पर पकड़ बना ली। मनोज ने सफलता का पहला श्रेय अपनी मां माना देवी व पिता सोहन लाल रावत को दिया।

जगदीश ने भी कई नौकरी के बाद पाई कामयाबी

जमवारामगढ ग्रामीण| सिविल सेवा में उपखण्ड क्षेत्र के खरकड़ा गांव से जगदीश मीना का आईएएस में चयन हुआ। जगदीश को 685वीं रैंक मिली है। आईएएस में चयन होने पर गांव में खुशियों का माहौल छा गया। उन्होंने बताया कि यह उनका सपना था जो आज सच हो गया। इसके लिए उन्होंने दिन-रात मेहनत की। आईएएस में चयन होने से पहले वे आईआरएस आईटी, आईआरएएस ओर एनटीपीसी में भी सेवाएं दे चुके है। वे अपनी सफलता का श्रेय अपने माता पिता रामनाथ मीना ओर तीजा देवी को देते है।

विपरीत परिस्थितियों में जीती जंग

शाहपुरा| किसान के बेटे देवन निवासी मुकेश कुमार लुणायत ने आईएएस में 587 वीं रैंक हासिल कर विपरीत परिस्थितियों में आईएएस बनकर परिवार, गांव, समाज व तहसील क्षेत्र का नाम रोशन किया। मुकेश के आईएएस में चयन होने से गांव में खुशी की लहर है। सुबह से शाम तक उसके घर पर माता-पिता को बधाई व मिठाईयां खिलाने के लिए भीड़ रही। मुकेश के पिता रामावतार लुणायत किसान है और माता संज्या देवी गृहिणी है। वह चार भाइयों में सबसे बड़ा है। गांव के सरकारी स्कूल में 10वीं कक्षा तक पढ़ाई करने के बाद मुकेश ने वर्ष 2009 में 12वीं कक्षा पावटा के जवाहर नवोदय विद्यालय में 88 फीसदी से अंक से उत्तीर्ण की। इसके बाद वर्ष 2012 में दिल्ली विश्वविद्यालय के सेंट स्टीफेंस कॉलेज से स्नातक में 70 फीसदी अंक प्राप्त किए। स्नातक के बाद मुकेश ने भारतीय प्रशासनिक सेवा में जाने की ललक से कठोर परिश्रम शुरू किया। मुकेश ने सफलता का श्रेय माता-पिता, मामा समेत अन्य परिजन, ननिहाल पक्ष, जवाहर नवोदय विद्यालय के पूर्व प्राचार्य महेन्द्र चौधरी और उत्तराखंड में आईएएस पद पर नियुक्त मित्र रोहित मीणा को दिया। आईएएस में चयनित मुकेश ने बताया कि उसके दादा-दादी अनपढ़ थे। माता-पिता ने निरक्षर होने के बावजूद शिक्षा का महत्व समझते हुए चारों भाइयों को उत्कृष्ट शैक्षणिक संस्थानों से शिक्षा दिलाई। उसका छोटा भाई विनोद लुणायत भारत-तिब्बत सीमा पुलिस में उपनिरीक्षक पद पर नियुक्त है। इससे छोटा भाई मनीष दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक कर रहा है। चौथे नम्बर के भाई ने हाल ही 12वीं कक्षा की परीक्षा दी है।