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सावन की पहली बारिश से फसल को मिला जीवनदान, फड़का कीट पर लगेगा अंकुश

कार्यालय संवाददाता | शाहपुरा क्षेत्र के कई इलाकों में मंगलवार दोपहर सावन की पहली बारिश हुई। करीब 15 दिन बाद बारिश...

Bhaskar News Network | Last Modified - Aug 08, 2018, 07:16 AM IST

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    कार्यालय संवाददाता | शाहपुरा

    क्षेत्र के कई इलाकों में मंगलवार दोपहर सावन की पहली बारिश हुई। करीब 15 दिन बाद बारिश होने से किसानों के मुरझाए चेहरों पर खुशी छा गई। यह बारिश खरीफ फसल के लिए अमृत के सामान है। हालांकि छितराई बारिश होने के कारण कई इलाके सूखे ही रह गए।

    जानकारी के अनुसार सावन महीने की यह पहली बरसात है। हालांकि बारिश ज्यादा तेज नहीं हुई, लेकिन फिर भी खरीफ फसल के लिए अमृत के सामन है। निराई गुड़ाई के बाद बारिश नहीं हुई थी। गोज होने के बाद तेज हवाएं चलने एवं बारिश नहीं होने से फसल भी पीली पड़ने लग गई थी। किसान बारिश नहीं होने से चिंतित नजर आ रहे थे। बारिश नहीं होने से लोग गर्मी व उमस से परेशान थे। जिन इलाकों में मंगलवार को बारिश हुई वहां के किसानों के मुरझाए चेहरों पर रौनक लौट आई। किसान मदनलाल यादव, रामगोपाल गुर्जर ने बताया कि पहले तो लगातार तेज बारिश होने से कई किसानों के खेतों में बाजरे की फसल मिट्‌टी में दब गई थी। जिस पर किसानों ने दुबारा बाेआई करवाई थी लेकिन इसके बाद बारिश नहीं होने से फसल में वृद्धि नहीं हो पा रही थी। अब बारिश हो जाने से मुरझाने लगी फसल को जीवनदान मिला है। यह बारिश खरीफ की सभी प्रकार की फसल के लिए काफी महत्वपूर्ण साबित होगी। दौसा मनोहरपुर फ्लाईओवर के पास ड्रेनेज सिस्टम बंद होने से निकास नहीं हो पाने से बरसात का पानी भर गया। इससे लोगों को आवाजाही में परेशानी उठानी पड़ी। यहां तक बीच पानी में जाने से छोटी गाडियां भी रूक गई। अनिल कुमार अटल, सुनीता चौधरी, संगीता आदि ने बताया कि पानी अधिक भरने पर उनकी गाड़ी रूक गई, जिसको काफी मशक्कत के बाद धक्का देकर निकाला गया।

    मनोहरपुर-दौसा फ्लाई ओवर के पास सर्विस लेन पर भरा बरसाती पानी

    मनोहरपुर. कस्बे के दौसा मनोहरपुर फ्लाई ओवर के पास ड्रेनेज सिस्टम बंद होने से सर्विस लेने पर भरा बरसाती पानी।

    सिंचाई करने लग गए थे किसान : कृषि पर्यवेक्षक फूलचंद जाट ने बताया कि करीब 15 दिन से बारिश नहीं हो रही थी। फसल को बचाने के लिए जहां पानी की उपलब्धता थी उन किसानों ने खरीफ फसल की सिंचाई करना भी शुरू कर दिया था ताकि फसल गर्मी व तेज धूप से झुलस कर नष्ट नहीं हो सके। शाहपुरा क्षेत्र में कुल 26 हजार 482 हेक्टेअर में खरीफ फसल की बोआई की गई। इसमें से 23 हजार 450 हेक्टेअर में तो बाजरे की बोआई की गई।

    शाहपुरा सहायक कृषि निदेशक गिरधर सिंह देवल ने बताया कि बताया कि बारिश नहीं होने पर शाहपुरा, विराटनगर एवं पावटा क्षेत्र में करीब 500 हेक्टेअर फसल पर फड़का कीट लग गया था। हालांकि अब फड़का कीट नियंत्रण में है। दुर्गापुरा कृषि अनुसंधान केंद्र से कृषि विशेषज्ञों की टीम ने फड़का प्रभावित क्षेत्र में जाकर फसलों का जायजा लेकर सर्वे रिपोर्ट तैयार कर ली है।

    खरीफ को वर्षा की दरकार

    खरीफ फसल की निराई गुड़ाई के बाद से बारिश नहीं हो रही थी। वर्तमान में फसल को बारिश की बहुत ज्यादा आवश्यकता थी। बारिश होने से खरीफ की सभी फसलों को शत प्रतिशत लाभ मिलेगा। जहां पर तेज बारिश हुई वहां पर फड़का कीट के प्रकोप में कमी आएगी। - गिरधर सिंह देवल, सहायक निदेशक कृषि विस्तार शाहपुरा

    शाहपुरा. फव्वारों से सिंचाई की जा रही है।

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