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सबसे बड़ी जीत और सबसे छोटी जीत का अंतर... सेमुमा

सबसे बड़ी जीत और सबसे छोटी जीत का अंतर... सेमुमा गर्ल्स कॉलेज में सबसे बड़ी जीत और एमएलवी में सबसे छोटी जीत देखने को...

Danik Bhaskar | Sep 12, 2018, 06:21 AM IST
सबसे बड़ी जीत और सबसे छोटी जीत का अंतर... सेमुमा गर्ल्स कॉलेज में सबसे बड़ी जीत और एमएलवी में सबसे छोटी जीत देखने को मिली। अध्यक्ष पद पर एबीवीपी की प्रियंका शक्तावत ने एनएसयूआई की मनीषा सोलंकी को 498 वोट से मात दी। एमएलवी कॉलेज में संयुक्त सचिव पद पर एनएसयूआई के मनोज खटीक ने एबीवीपी के शांतिलाल बलाई को एक वोट से हराया। वैसे कृषि महाविद्यालय में महासचिव पद पर आसूराम और लोकेश धाकड़ के बीच टाई हो गया। फिर लॉटरी निकालने पर आसूराम जीत गया। सचिव महेश वैष्णव भी एक वोट से जीतते है। लेकिन एमएलवी कॉलेज के मनोज खटीक की जीत इसलिए ज्यादा महत्वपूर्ण है क्योंकि वहां 3287 वोट डाले गए हैं। इसमें एक वोट का अंतर अधिक रोचक है। जबकि कृषि कॉलेज में 135 मतों पर फैसला हुआ था।

बागियों ने बिगाड़ा खेल वरना एबीवीपी 6-2 से जीत दर्ज करती... छात्रसंघ चुनाव को एबीवीपी ने 4-1 से जीत लिया। लेकिन एबीवीपी अपने बागियों को समझाने में कामयाब रहती तो जिले में यह जीत 6-2 से जीत जाती। लॉ कॉलेज में बागी सौरभ पारीक और आसींद कॉलेज में बागी कन्हैयालाल गुर्जर ने जीत दर्ज की। शाहपुरा में एनएसयूआई का बागी जीता।

एमएलवी में जाति चक्र फिर टूटा, धरा रह गया भावना ट्रंप कार्ड... एमएलवी कॉलेज में पिछले आठ सालों में पांच बार जाट, दो ब्राह्मण और एक बार अन्य जाति के प्रत्याशी ने अध्यक्ष पद जीता है। इस बार फिर एमएलवी कॉलेज में जाति का फिर चक्र टूटा। पहले गजेंद्र सिंह राठौड़ तो इस बार अध्यक्ष पद पर शंकर गुर्जर विजेता रहे। शंकर गुर्जर पहले एबीवीपी के जिला संयोजक हैं। सेमुमा गर्ल्स कॉलेज में पिछले कुछ सालों से चल रहा भावना ट्रंप कार्ड फेल हो गया। पूर्व छात्रासंघ अध्यक्ष भावना ने अपने नेतृत्व में राधा जाट, प्रियंका टेलर को जिताया। लेकिन इस बार मनीषा सोलंकी को जिताने में असफल रही। सेमुमा में अध्यक्ष पद पर सबसे बड़ी हार हुई है। एबीवीपी की प्रियंका शक्तावत ने 498 वोटों से मनीषा को शिकस्त दी है।

पहली बार विधि कॉलेज में बागी जीता...विधि कॉलेज में एबीवीपी का कब्जा रहा है। अध्यक्ष समेत चारों पदों पर पिछले दो बार से एबीवीपी जीतती आ रही है। पहले शिवम शर्मा, फिर कुलदीप व्यास एबीवीपी के टिकट पर अध्यक्ष बनने में कामयाब रहे हैं। छात्रनेता पारस जाट और चांदनी पांडे ने बताया कि यह पहला मौका है जब कोई बागी विधि कॉलेज में जीता है। सौरभ पारीक का आखिरी क्षणों में टिकट काटकर आकांक्षा विश्नोई को देना भारी पड़ा। इसलिए ही सौरभ को स्टूडेंट्स ने जिताया है। वहीं उपाध्यक्ष पद पर निर्दलीय आदित्य दुग्गड़ ने जीत दर्ज की है।

एक होकर लड़ी एनएसयूआई फिर भी हारी... एनएसयूआई की हार के दो कारण प्रमुख रहे। एनएसयूआई सिर्फ ऊपरी ओर से एक होकर लड़ी न कि जमीनी स्तर पर। इस बार सिर्फ विधायक धीरज गुर्जर खेमे ने ही ताल ठोकी थी। इसका नतीजा था कि विधि कॉलेज में तो प्रत्याशी ही नहीं मिल पाए थे। जबकि एनएसयूआई के खेमों में चुनाव लड़ने पर किसी जगह प्रत्याशी कमी नहीं रहती है। सभी के प्रचार करने की वजह से एनएसयूआई हर जगह तक पहुंच जाती है। लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ। विरोधी खेमों के छात्रनेता बिल्कुल निष्क्रिय रहे या नदारद रहे। दूसरा कारण हार का देर से प्रत्याशियों का नाम घोषित करना रहा। 22 अगस्त को एबीवीपी ने प्रत्याशी घोषित कर दिए। 23 अगस्त को मतदाता सूचियों का प्रकाशन होना था। इसके भी एक दिन बाद जाकर यानि 24 अगस्त को एनएसयूआई ने प्रत्याशियों के नाम घोषणा की। जबकि 25 अगस्त को तो उम्मीदवारों की ओर से नामांकन दाखिल करना था।

जीत के बाद जुलूस निकालने पर अड़े... एमएलवी कॉलेज में एबीवीपी अध्यक्ष शंकर गुर्जर विजेता रहे। एबीवीपी कार्यकर्ता जुलूस निकालने के लिए अड़ गए। पुलिस इसको लेकर समझाती रही लेकिन नहीं माने। भाजपा के पूर्व जिला महामंत्री प्रशांत मेवाड़ा और भाजयुमो जिलाध्यक्ष नंदलाल गुर्जर ने समझाइश की तो छात्र मान गए। आखिरकार जुलूस टल गया।