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‘मैं खुद से कहती थी कि भारत की राष्ट्रपति भी बन सकती हूं’ / ‘मैं खुद से कहती थी कि भारत की राष्ट्रपति भी बन सकती हूं’

Bhaskar News Network

Dec 09, 2018, 03:51 AM IST

Shriganganagar News - इंदिरा नूई, पेप्सीको की पूर्व सीईओ ‘भारत के एक सामाजिक रूढ़िवादी शहर मद्रास में मैं बड़ी हुई हूं। जाहिर तौर पर...

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इंदिरा नूई, पेप्सीको की पूर्व सीईओ

‘भारत के एक सामाजिक रूढ़िवादी शहर मद्रास में मैं बड़ी हुई हूं। जाहिर तौर पर मेरी मां पर भी शहर का असर था और वे भी कुछ पारंपरिक मान्यताएं मानती थीं। लेकिन वे फिर भी अपनी दो बेटियों को यह यकीन दिलाने में कामयाब रही थीं कि वे जो चाहें बन सकती हैं। यह उस वक्त की बात है, जब हमारी उम्र 8 से 11 साल थी। हर रात डिनर टेबल पर मेरी मां मुझे और मेरी बहन को एक स्पीच लिखने को बोला करती थीं। विषय होता था कि ‘जब मैं प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या राष्ट्रपति बन जाऊंगी तो मैं क्या करूंगी’। हर दिन एक अलग विश्वनेता होता था और मैं और मेरी बहन इस पर लिखा करते थे। जब डिनर खत्म हो जाता था, तो वो हमसे स्पीच पढ़ने को कहती थीं। फिर उसे यह तय करना होता था कि वो किसे वोट करेगी। मेरी मां काम नहीं करती थीं, कॉलेज नहीं गई थीं, लेकिन वे अपनी बेटियों के जरिए अप्रत्यक्ष रूप से तमाम जिंदगियां जी रहीं थीं। उनकी इन बातों ने हमें जबरदस्त आत्मविश्वास दिया कि हम जो चाहें वो बनकर दिखा सकती हैं। मेरे युवा दिनों का यह अद्भुत रचनात्मक अनुभव रहा। इस कॉन्फिडेंस को मेरे नानाजी का जबरदस्त सहारा मिला। जब वे मुझे कोई काम बताते और मैं उनके चाहे तरीके से नहीं कर पाती, तो वे कागज के टुकड़े पर कम से कम 200 बार मुझसे लिखवाते ‘मैं कोई बहाना नहीं बनाऊंगी’। जब मैं बड़ी हुई तो इस सजा की शुक्रगुजार हुई।

इसी कॉन्फिडेंस से ही मैं 1980 में एमबीए कर पाई और करियर में आगे बढ़ती गई। एमबीए के दौरान जब मैं मीटिंग में होती थी, तो मेरे क्लासमेट्स मुझसे नजरें नहीं मिलाते थे और मैं अपने जवाबों को लगातार साथियों के साथ चैक करती रहती थी। उन्हें मेरी क्षमताओं पर जरा भी यकीन नहीं था। दबाव में मुरझाने की जगह मैंने बोलना शुरू किया। अपने दिल में मैं हमेशा कहा करती थी ‘मैं इस काम को किसी और के मुकाबले बेहतर ढंग से कर सकती हूं और कहीं कोई गड़बड़ होगी, तो ये मेरे पास ही आएंगे और कहेंगे कि इसे ठीक कर दो क्योंकि मैं जानती हूं कि मैं इतनी कुशल हूं। याद रखो, मैं भारत की राष्ट्रपति भी बन सकती हूं।’

(8 सितंबर 2015 को न्यू यॉर्क के ‘वूमन इन लीडरशिप पैनल’ में इंदिरा नूई)

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