Hindi News »Rajasthan »Shriganganagar» अमेरिका में शिप की नौकरी छोड़ी; देश लौटे, अब वन्यजीवों को शिकारियों और तस्करों के कब्जे से छुड़ाने में जुटे मकवान दंपती

अमेरिका में शिप की नौकरी छोड़ी; देश लौटे, अब वन्यजीवों को शिकारियों और तस्करों के कब्जे से छुड़ाने में जुटे मकवान दंपती

भास्कर न्यूज | तमेंगलांग (मणिपुर) मणिपुर का तमेंगलांग भले ही छोटा शहर है, पर यह वादियों के बीच खूबसूरती को समेटे...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 02, 2018, 03:05 AM IST

भास्कर न्यूज | तमेंगलांग (मणिपुर)

मणिपुर का तमेंगलांग भले ही छोटा शहर है, पर यह वादियों के बीच खूबसूरती को समेटे हुए है। इस सुंदरता के साथ यहां के डेनियल मकवान और उनकी प|ी गलीना का घर एक अलग पहचान रखता है। मकवान का घर ऐसे वन्यजीवों और दुर्लभ प्रकार के पक्षियों का ठिकाना है, जो शिकारियों और तस्करों के चंगुल से आजाद कराए गए हैं। दरअसल, डेनियल दंपती को पक्षियों और जीवों से बचपन से गहरा लगाव रहा है। शादी के बाद दोनों अमेरिका के मियामी में शिप पर जॉब कर रहे थे। दोनों भारत आते तो मणिपुर में तमेंगलांग जाते थे। इस दौरान जब वे किसी वन्यजीव के शिकारी देखते या तस्करों के हाथ किसी परिंदे को पिंजरे में कैद पाते तो उनका दिल दुखता था। इसी ने उन्हें तमेंगलांग लौटकर इन जीवों को बचाने के लिए प्रेरित किया। आज दंपती पेंगोलिन से लेकर एशियाई जंगली कछुए जैसे 30 से अधिक जीवों को बचा चुके हैं। उनके बचाए कई जीव इंफाल जिओलॉजिकल पार्क और अन्य जगहों पर संरक्षित हैं।

डेनियल की निजी जिंदगी भी काफी रोचक रही है। मुंबई में पढ़ाई के दौरान उनकी मणिपुर की गलीना से मुलाकात हुई। उसके बाद दांपत्य सूत्र में बंधे। फिर दोनों को अमेरिका में जॉब मिल गई। 2006 में गलीना तमेंगलांग में अपने मायके आ गईं। वे टीचर बन गईं।

डेनियल 2016 में अमेरिका से नॉर्थ ईस्ट लौटे। इसके बाद वे वन्यजीवों को बचाने में जुट गए। उन्हें जब भी शिकारी का पता लगता, वे उस तक पहुंच जाते। फरवरी में ही उन्होंने एक पेंगोलिन को शिकारी से छुड़ाया था।

वे बीते दो साल में एशियाई जंगली कछुए, चीनी पेंगोलिन (अत्यधिक संकटग्रस्त), लीफ टर्टल,पॉन्ड टर्टल, लेपर्ड कैट, साही जैसे 15 जीवों और 16 से ज्यादा संकटापन्न और दुर्लभ परिंदों को संरक्षण दे चुके हैं।

मणिपुर में रह रहे डेनियल परिंदों-जीवों को लेकर जुनूनी हैं, शिकार छोड़ने के बदले में वे शिकारियों को पैसे तक देते हैं

इन जीवाें को जंगल में खतरा है इसीलिए उन्हें इंफाल भेजता हूं

जीवों का बचाना मेरा पैशन है। अब तक बचाए गए ज्यादातर जीवों को इंफाल नेशनल पार्क भेज दिया है, क्योंकि जंगल में उनके शिकार का खतरा रहता है। इस काम में मुझे कहीं से मदद नहीं मिलती। मैं वन विभाग से मदद की उम्मीद करता हूं। -डेनियल मकवान, वन्यजीव संरक्षक

डेनियल ने इस पेंगोलिन को 5 हजार रु. देकर बचाया।

दैनिक भास्कर पर Hindi News पढ़िए और रखिये अपने आप को अप-टू-डेट | अब पाइए News in Hindi, Breaking News सबसे पहले दैनिक भास्कर पर |

More From Shriganganagar

    Trending

    Live Hindi News

    0

    कुछ ख़बरें रच देती हैं इतिहास। ऐसी खबरों को सबसे पहले जानने के लिए
    Allow पर क्लिक करें।

    ×