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‘इंडस्ट्री में 12 साल लग गए लोगों को पहचानने में’

 इस समय भोपाल में स्त्री’ की शूटिंग चल रही है। अगली फिल्म अनुभव सिन्हा की होगी, जिसके लिए 9 अप्रैल को लखनऊ जाएंगे।...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 01, 2018, 04:55 AM IST

‘इंडस्ट्री में 12 साल लग गए लोगों को पहचानने में’
 इस समय भोपाल में स्त्री’ की शूटिंग चल रही है। अगली फिल्म अनुभव सिन्हा की होगी, जिसके लिए 9 अप्रैल को लखनऊ जाएंगे। ‘एक-दो प्रोजेक्ट और हैं जिसके बारे में बताने की अनुमति नहीं है।’

नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा, दिल्ली से पास आउट एक्टर पंकज त्रिपाठी का सिनेमा से दूर-दूर तक कोई नाता नहीं था। बिहार के गोपालगंज जिले के रहने वाले पंकज के पिता किसान हैं। वे पंकज को डॉक्टर बनाने का सपना देखते थे, लेकिन पंकज की किस्मत उन्हें बॉलीवुड ले आई। मुंबई आए तो यहां लंबा संघर्ष चला। पंकज से बातचीत:

 जब पिता जी का सपना चकनाचूर हुआ, तब उनका क्या कहना था?

वे सरल और साधारण इंसान हैं। उनका कोई दबाव नहीं रहा। उन्होंने कहा कि अगर नाटक करने से रोजी-रोटी चल जाए, तो करो। मेरे पेरेंट्स लिबरल हैं, उन्होंने मुझे काफी छूट दे रखी है। गांव में रूढ़िवादी लोग हैं, लेकिन मैंने लव मैरिज की। उस पर भी उन्होंने कोई आपत्ति नहीं जताई।

 लेकिन इंडस्ट्री के बाहर से आने वाले लोगों के बारे में भेदभाव की बातें सुनने को मिलती हैं, आपका अनुभव क्या कहता है?

देखिए, भेदभाव तो पूरे संसार में है। आदमी ही क्या, जानवरों में भी है। एक बंदर अपने झंुड का सरगना होता है, वह नहीं चाहता कि दूसरे झुंड का बंदर आकर उसके झुंड का सरगना बन जाए। जाहिर-सी बात है, यहां भीड़ बहुत है। अगर कोई बाहर से फिल्म इंडस्ट्री में आएगा तो बहुत वेलकम नहीं किया जाएगा। अगर आपका काम बहुत अच्छा है, तब भी लोग कोशिश करेंगे कि आपको आपकी जगह ना मिले। क्योंकि यहां जो पहले से बैठा है, वह हटना नहीं चाहता है। यह मानवीय प्रक्रिया है, यह किसी भी इंडस्ट्री में हो सकता है। यहां लोगों को पहचानने में मुझे 12 साल लग गए। मुझे यहां काफी वक्त लगा, इससे ज्यादा कुछ नुकसान नहीं हुआ। आज सभी बैनर की फिल्में कर रहा हूं। पिछले साल मेरी ‘बरेली की बर्फी’, ‘फुकरे रिटर्न्स’, ‘न्यूटन’, ‘मुन्ना माइकल’ सहित 7 फिल्में आईं, सब में अलग-अलग तरह का रोल किया। लोगों को बहुत पसंद भी आया।

 फिल्म ‘काला’ के जरिए साउथ में डेब्यू करने जा रहे हैं और वो भी सुपरस्टार रजनीकांत के साथ। यह ब्रेक कैसे मिला?

फिल्म के डायरेक्टर ने मेरी दो फिल्में, ‘गैंग्स ऑफ वासेपुर’ और ‘निल बट्‌टे सन्नाटा’ देखी थी। दोनों में बड़ा डायवर्स रोल था। एक में विलेन था तो दूसरे में स्कूल के मास्टर का रोल किया था। उन्होंने ही बोला कि मुझे यह एक्ट चाहिए, तब उनकी टीम मुझसे मुंबई आकर मिली। मुझे जब पता चला कि रजनीकांत की फिल्म है, तब बिना सोचे काम करने को तैयार हो गया। क्योंकि मुझे रजनी सर से मिलना था। मैं उनके व्यक्तित्व से बहुत प्रभावित हूं। उनमें सुपरस्टार जैसा कोई घमंड नहीं है। मैं जब साउथ में शूटिंग कर रहा था, तब मुझसे पूछते थे कि तुम्हें खाने में दिक्कत तो नहीं हो रही है। अब इतने बड़े एक्टर को पूछने की क्या जरूरत है, लेकिन वे अपने को-स्टार्स की हर छोटी से छोटी बात का खयाल रखते हैं। उनसे विनम्रता सीखने को मिली।

 श्रद्धा कपूर के साथ ‘स्त्री’ की शूटिंग कर रहे हैं, उनके बारे में क्या कहेंगे?

बड़ी मेहनती एक्ट्रेस हैं। बड़ों का बहुत सम्मान करती हैं। मैंने उनसे बोला भी कि तुम एक्ट्रेस जैसी नहीं लगती। ऐसा लगता है जैसे अपने ही घर की कोई लड़की आई हो। उन्होंने जवाब में कहा कि आप भी परिवार के सदस्य जैसे ही लगते हो। राजकुमार राव बहुत अच्छे स्वभाव के हैं। हम सब साथ में ही वक्त गुजारते हैं।

पंकज त्रिपाठी बोले...

Pankaj Tripathi

 जब पिता जी का सपना चकनाचूर हुआ, तब उनका क्या कहना था?

वे सरल और साधारण इंसान हैं। उनका कोई दबाव नहीं रहा। उन्होंने कहा कि अगर नाटक करने से रोजी-रोटी चल जाए, तो करो। मेरे पेरेंट्स लिबरल हैं, उन्होंने मुझे काफी छूट दे रखी है। गांव में रूढ़िवादी लोग हैं, लेकिन मैंने लव मैरिज की। उस पर भी उन्होंने कोई आपत्ति नहीं जताई।

 लेकिन इंडस्ट्री के बाहर से आने वाले लोगों के बारे में भेदभाव की बातें सुनने को मिलती हैं, आपका अनुभव क्या कहता है?

देखिए, भेदभाव तो पूरे संसार में है। आदमी ही क्या, जानवरों में भी है। एक बंदर अपने झंुड का सरगना होता है, वह नहीं चाहता कि दूसरे झुंड का बंदर आकर उसके झुंड का सरगना बन जाए। जाहिर-सी बात है, यहां भीड़ बहुत है। अगर कोई बाहर से फिल्म इंडस्ट्री में आएगा तो बहुत वेलकम नहीं किया जाएगा। अगर आपका काम बहुत अच्छा है, तब भी लोग कोशिश करेंगे कि आपको आपकी जगह ना मिले। क्योंकि यहां जो पहले से बैठा है, वह हटना नहीं चाहता है। यह मानवीय प्रक्रिया है, यह किसी भी इंडस्ट्री में हो सकता है। यहां लोगों को पहचानने में मुझे 12 साल लग गए। मुझे यहां काफी वक्त लगा, इससे ज्यादा कुछ नुकसान नहीं हुआ। आज सभी बैनर की फिल्में कर रहा हूं। पिछले साल मेरी ‘बरेली की बर्फी’, ‘फुकरे रिटर्न्स’, ‘न्यूटन’, ‘मुन्ना माइकल’ सहित 7 फिल्में आईं, सब में अलग-अलग तरह का रोल किया। लोगों को बहुत पसंद भी आया।

 फिल्म ‘काला’ के जरिए साउथ में डेब्यू करने जा रहे हैं और वो भी सुपरस्टार रजनीकांत के साथ। यह ब्रेक कैसे मिला?

फिल्म के डायरेक्टर ने मेरी दो फिल्में, ‘गैंग्स ऑफ वासेपुर’ और ‘निल बट्‌टे सन्नाटा’ देखी थी। दोनों में बड़ा डायवर्स रोल था। एक में विलेन था तो दूसरे में स्कूल के मास्टर का रोल किया था। उन्होंने ही बोला कि मुझे यह एक्ट चाहिए, तब उनकी टीम मुझसे मुंबई आकर मिली। मुझे जब पता चला कि रजनीकांत की फिल्म है, तब बिना सोचे काम करने को तैयार हो गया। क्योंकि मुझे रजनी सर से मिलना था। मैं उनके व्यक्तित्व से बहुत प्रभावित हूं। उनमें सुपरस्टार जैसा कोई घमंड नहीं है। मैं जब साउथ में शूटिंग कर रहा था, तब मुझसे पूछते थे कि तुम्हें खाने में दिक्कत तो नहीं हो रही है। अब इतने बड़े एक्टर को पूछने की क्या जरूरत है, लेकिन वे अपने को-स्टार्स की हर छोटी से छोटी बात का खयाल रखते हैं। उनसे विनम्रता सीखने को मिली।

 श्रद्धा कपूर के साथ ‘स्त्री’ की शूटिंग कर रहे हैं, उनके बारे में क्या कहेंगे?

बड़ी मेहनती एक्ट्रेस हैं। बड़ों का बहुत सम्मान करती हैं। मैंने उनसे बोला भी कि तुम एक्ट्रेस जैसी नहीं लगती। ऐसा लगता है जैसे अपने ही घर की कोई लड़की आई हो। उन्होंने जवाब में कहा कि आप भी परिवार के सदस्य जैसे ही लगते हो। राजकुमार राव बहुत अच्छे स्वभाव के हैं। हम सब साथ में ही वक्त गुजारते हैं।

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Web Title: ‘इंडस्ट्री में 12 साल लग गए लोगों को पहचानने में’
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