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पति-पत्नी का बैंक, आयकर को 1400 करोड़ का धोखा

अनूप कुमार मिश्र /उपमिता वाजपेयी नई दिल्ली, हैदराबाद लगातार सामने आते बैंक घोटालों के बीच एक बेहद चौंकाने वाला...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 01, 2018, 05:00 AM IST

अनूप कुमार मिश्र /उपमिता वाजपेयी नई दिल्ली, हैदराबाद

लगातार सामने आते बैंक घोटालों के बीच एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यह हैदराबाद के एक ऐेसे पति-प|ी का मामला है, जिन्होंने करीब 1400 करोड़ रुपए का बैंक घोटाला किया और पिछले 6 साल से बैंक और आयकर विभाग को धोखा देते रहे। खास बात यह है कि ये न तो माल्या और नीरव मोदी की तरह रसूखदार हैं और न ही इन्होंने बैंकों में फंड इधर-उधर करते समय अपना नाम-पता बदला है। सीबीआई भी इनके घोटाले से चौंक गई है। इन्हें वर्ष 2008 में यंग एंड डायनमिक आंत्रप्रेन्योरशिप का अवॉर्ड भी मिला है।

दरअसल नीरव मोदी की बैंक धोखाधड़ी के मामले के बाद रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने सभी बैंकों से अपने नॉन परफॉर्मिंग असेट्स (एनपीए) बताने के लिए कहा। जिसके बाद ही यूनियन बैंक, हैदराबाद के मैनेजर शेख मोहम्मद अली ने बिजनेसमैन सलालिथ तोतेमपोडी द्वारा 1394 करोड़ कर्ज लेने और नहीं लौटाने की शिकायत सीबीआई से की। सीबीआई ने जांच बैठाई। पिछले हफ्ते 23 मार्च को सलालिथ तोतेमपोडी को तब गिरफ्तार किया गया जब वो देश से भागने की फिराक में था।

एक बड़ा सवाल यह अभी भी बना हुआ है कि सलालिथ और उसकी प|ी कविता आखिर इतने सालों तक कैसे बचते रहे? ऐसे में भास्कर ने उन दस्तावेजों को खंगाला जिसके आधार पर अब सीबीआई ने जांच शुरू की है। कारोबारी सलालिथ ने प|ी कविता के साथ मिलकर 7 नवंबर, 1997 को हैदराबाद के बंजाराहिल से तोतेम इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड नामक कंपनी की शुरुआत की थी। यूनियन बैंक द्वारा सीबीआई को दी गई शिकायत मे बताया गया है कि पहले उन्हें पता चला कि तोतेम ने एक्सिस बैंक में नया खाता खोला है। उन्होंने कंसोर्टियम बैंक को बताए बगैर अपने फंड काे दूसरे बैंक में स्थानांतरित करना शुरू कर दिया है। ऐसे में बैंक ने विजलेंस जांच शुरू की। विजलेंस जांच में पता चला कि वेतन और स्टॉक के नाम पर फंड दूसरे बैंक में स्थानांतरित किया गया है। जांच में यह भी पता चला कि कंपनी ने कंसोर्टियम बैंक के खातों से भारी तादाद में फंड को कर्नाटक बैंक और फिर कर्नाटक बैंक से अपने निजी खातों में स्थानांतरित किया है। कंपनी ने 31 मार्च, 2012 को कंपनी का स्टॉक 380.94 करोड़ रु. दिखाया था। वहीं 31 अगस्त, 2012 में इस स्टॉक को घटा कर 96 करोड़ कर दिया गया। यानी स्टाॅक की जानकारी भी गलत दी। इसके अलावा, पता चला कि बिक्री की गई राशि को लोन अकांउट में स्थानांतरित करने की बजाय दूसरे-दूसरे खातों में जमा किया है। शेष पेज 4 पर

प|ी कविता के साथ सलालिथ।

भास्कर ने खंगाले सीबीआई के दस्तावेज; इनकम टैक्स की तरफ से 15 लाख का इनाम था इन पर

पहचान बदले बगैर, बिना डर, वेतन और स्टॉक के नाम पर फंड एक से दूसरे बैंक में भेजते रहे

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