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आवारा पशुओं से हादसे रोकने को नप 15 दिन में बनाएगी सेल, नहीं तो जुर्माना

श्रीगंगानगर। शहर में आवारा पशुओं की समस्या को लेकर जिला स्थाई अदालत ने गुरुवार को शहरहित में एक निर्णय सुनाया।...

Dainik Bhaskar

Feb 02, 2018, 07:35 AM IST
श्रीगंगानगर। शहर में आवारा पशुओं की समस्या को लेकर जिला स्थाई अदालत ने गुरुवार को शहरहित में एक निर्णय सुनाया। अदालत ने नगर परिषद को इस समस्या के निजात के लिए 15 दिन में एक सेल गठित करने, साथ ही हेल्पलाइन प्रारंभ करने के आदेश दिए हैं। अदालत ने कहा कि नगर परिषद आयुक्त खुद इसकी मॉनिटरिंग करेंगी। आवश्यकता के अनुसार कर्मचारी व वाहनों की व्यवस्था करेंगी।

यह निर्णय स्थाई लोक अदालत के अध्यक्ष नरेश चुघ, सदस्य अजय मेहता, जेपी गौतम ने एडवोकेट राधेश्याम गोयल के परिवाद पर सुनवाई करते हुए दिया। गोयल द्वारा 20 मार्च 2017 को न्यालालय में एक परिवाद दिया गया था। इसमें आवारा पशुओं के कारण दुर्घटनाएं होने की बात कही थी। इसके लिए गोयल ने स्वच्छ भारत मिशन के ब्रांड एंबेसडर रहे डूंगरपुर के सभापति केके गुप्ता, कलेक्टर, सभापति, आयुक्त, यूआईटी अध्यक्ष, डीटीओ व यातायात प्रभारी को इस अव्यवस्था के लिए जिम्मेदार ठहराया था। कलेक्टर हर तीन माह में इस समस्या के निराकरण के लिए अधिकारियों के साथ बैठक लेंगे।

अदालत ने आयुक्त से शहर को कैटल फ्री करने के लिए कर्मचारियों व अधकारियों की जिम्मेदारी तय करने के लिए कहा है। कैटल फ्री अभियान में कार्य कर रहे कर्मचारियों पर सुपरवाइजरी के लिए अलग से अधिकारी नियुक्त करने के आदेश दिए हैं। स्थाई लोक अदालत ने आयुक्त को एक शपथ पत्र पेश करने के लिए भी कहा है। आयुक्त द्वारा यह शपथ पत्र एक माह के अंदर पूर्ण कालिक सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के समक्ष प्रस्तुत करना होगा। आदेश की पालना न करने पर, उपरोक्त अप्रार्थीगण पर एक हजार रुपए जुर्माना प्रतिदिन लगेगा। तीन माह में भी पालना न करने पर सभी अप्रार्थी व्यक्तिगत रूप से जुर्माना जिला विधिक सेवा प्राधिकरण में जमा करवाएंगे।

पशुओं पर लगाम के लिए तय की लोक अदालत ने जिम्मेदारी, हेल्पलाइन भी शुरू करनी होगी

यूआईटी और यातायात पुलिस भी करेगी सहयोग

स्थाई लोक अदालत ने यातायात पुलिस प्रभारी को निर्देशित किया है कि वे अपने यातायात पुलिस कर्मियों को आदेशित करें कि आवारा पशु दिखते ही इसकी सूचना परिषद द्वारा जारी किए गए हेल्पलाइन पर दें। यूआईटी को कैटल फ्री अभियान में नगर परिषद का सहयोग करने के आदेश दिए गए हैं। गोयल ने बताया कि पूर्व में इस संबंध में अनेक बार नगर परिषद अधिकारियों को अवगत कराया गया, लेकिन इस पर किसी ने ध्यान नहीं दिया। इस पर अदालत की शरण लेनी पड़ी।

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