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ये है गेहूं का बड़ा उत्पादक क्षेत्र, आग यहां दो किसानों की ले चुकी जान, हजारों बीघा फसल जलकर राख, लेकिन दमकल एक भी नहीं

खेतों में आग लगती है और सब कुछ राख होने के बाद अपने आप बुझ जाती है। किसान अपनी फसल को जलते हुए देखने के सिवाए कुछ नहीं...

Danik Bhaskar | Apr 01, 2018, 06:45 AM IST
खेतों में आग लगती है और सब कुछ राख होने के बाद अपने आप बुझ जाती है। किसान अपनी फसल को जलते हुए देखने के सिवाए कुछ नहीं कर पाते। हां, सब कुछ बर्बाद होने के बाद सहानुभूति जरूर मिल जाती है। टिब्बी उपखंड के लोगों के साथ पिछले दस सालों से ऐसा ही कुछ हो रहा है। एक अदद दमकल के अभाव में अब तक दो किसान अपनी जान गंवा चुके हैं तो हजारों बीघा में फसलें और 50 से ज्यादा मवेशी खाक हो चुके हैं। तीन साल पहले सांसद निहालचंद के राशि स्वीकृति की घोषणा के बावजूद जिले के सबसे बड़े गेहूं उत्पादक क्षेत्र को दमकल नसीब नहीं हुई। पंचायत ने भी दमकल सुविधा के लिए कर्मचारी व ठहराव करवाने के लिए स्वीकृति देने के बाद भी समस्या आज भी जस की तस है। जनप्रतिनिधि, अधिकारी सब हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं और आग लगने पर तमाशा देख लेते हैं। टिब्बी के निकट संगरिया, हनुमानगढ़, ऐलनाबाद से दमकल को बुलाना पड़ता है तब तक सब बर्बाद हो जाता है। लोगों ने धरना, प्रदर्शन आदि भी किए पर हैरानी की बात ये है कि अभी अप्रेल में गेहूं कटाई का सीजन शुरू होने वाला है। ऐसे में खेतों में आगजनी की घटनाएं कभी भी हो सकती है लेकिन नुकसान से बचाने वाला भगवान ही है। एक दशक से दमकल का दंश झेल रहे किसानों पर फोकस करती ग्राउंड रिपोर्ट।

संगरिया, हनुमानगढ़ और ऐलनाबाद से जब तक पहुंचती है दमकल, तब तक सब हो जाता है राख, प्रतिवर्ष बढ़ रही आगजनी की घटनाएं, गेहूं कटाई के सीजन में अधिक होते हैं हादसे, लेकिन जिम्मेदार नहीं कर रहे कोई कार्रवाई

और यह दिए जख्म...आगजनी से पशुओं की भी हुई मौत, लोग नहीं भूल पा रहे हादसे

टिब्बी क्षेत्र में आगजनी की सैकड़ों घटनाएं हो चुकी हैं लेकिन पिछले वर्ष 27 अप्रेल को हुई भयंकर आगजनी में क्षेत्र के गांव सूरेवाला, नाईवाला, चंदूरवाली, पीरकामडिय़ा, पन्नीवाली आदि पूरी तरह घिर गए थे। आगजनी की घटना में सूरेवाला रोही व पन्नीवाली रोही में दो किसानों की झुलसने से असामयिक मौत हो गई। वहीं यहां की ढाणियों में करीब एक दर्जन पशुओं की झुलसने से मौत हुई थी। कई दर्जनों पशु झुलस गए।

मैं नहीं दोहराना चाहता वह घटना, पीड़ा होती है

मृतक किसान सुधीर डूडी के भाई रामकुमार ने बताया कि उस हादसे को मैं अब दोहराना नहीं चाहता। क्योंकि वह हादसा पीड़ा दे गया। उसे भूलाकर ही जीना पड़ता है। उस आगजनी में मैं भी उसके साथ था लेकिन भगवान को यही मंजूर था। जहां तक दमकल की बात है तो सरकार को इसके लिए प्रयास करने चाहिए।

दर्द-1

जिसका दर्द हो वही जानता है, दमकल तो चाहिए

जिसका दर्द हो वही जानता है, दमकल तो चाहिए

मृतक गुरप्रीतसिंह के परिजन गुरमेलसिंह का कहना है कि अगर किसी परिवार का सदस्य दमकल नहीं पहुंचने के कारण मर जाए तो पीड़ा वह परिवार ही जानता है। हर कोई दमकल की मांग तो उठाता है लेकिन दर्द नहीं समझता। सभी को एकजुट होकर दमकल यहां लानी ही चाहिए ताकि ऐसी घटना फिर नहीं हो।

दर्द-2

क्षेत्र में हो रही गेहूं कटाई के दौरान होने वाली आगजनी घटनाओं से होने वाले नुकसान, मुख्यालय पर दमकल नहीं होने व दमकल के पहुंचने से पूर्व किसानों को भारी नुकसान होने के चलते एसडीएम उम्मेद सिंह रतनू ने कानूनी कार्रवाई कर जुर्माना वसूलने भी निर्देश दिए थे।

एसडीएम बोले-रखरखाव के कारण आ रही है समस्या

इस संबंध में एसडीएम उम्मेदसिंह र|ू ने कहा कि मुख्यालय पर दमकल नहीं मिलने की सबसे बड़ी समस्या दमकल के रखरखाव व कार्मिक की व्यवस्था को लेकर है जो नगरपालिका करती है। ऐसे में टिब्बी उपखंड मुख्यालय तो है लेकिन एक ग्राम पंचायत भी है। इसके लिए परेशानी आ रही है। इस संबंध में प्रयास किए जा रहे हैं।

टिब्बी अस्थाई मंडी सालाना टैक्स भी चुकाती है फिर भी दमकल का अभाव

टिब्बी में अस्थाई मंडी समिति है। यहां जिंसों की खासी आवक होती है। इसलिए संगरिया कृषि उपज मंडी समिति यहां से सालाना टैक्स भी वसूलती है लेकिन फिर भी टिब्बी के किसानों को दमकल की सुविधा आज तक मुहैया नहीं हो पाई। जबकि किसान ये मुद्दा भी कई बार उठा चुके हैं। इस संबंध में संगरिया मंडी समिति के सचिव रामप्रताप कलावासिया ने बताया कि टिब्बी की अस्थाई मंडी प्रतिवर्ष मंडी टैक्स तो लेती है लेकिन दमकल की व्यवस्था के लिए सरकार से कोई आदेश नहीं है।

आमजन व व्यापारी भी त्रस्त

मुख्यालय पर दमकल नहीं होने से किसान तो बदहाल हो ही रहे हैं लेकिन वही घरों आदि में होने वाली अचानक या शॉर्ट सर्किट से आगजनी पर भी काबू पाना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में फसलें बर्बाद होने से सीजन में व्यापारियों के समक्ष भी बड़ी समस्या खड़ी हो जाती है।