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सिंचाई पानी में उतार-चढ़ाव जारी,अंतिम दिनों में गेहूं बुआई में हो रही परेशानी, सरसों का पकाव मुश्किल

Shriganganagar News - भास्कर संवाददाता, श्रीगंगानगर। जिले में इन दिनों गेहूं बुआई अंतिम चरण में है, लेकिन गंगनहर में न केवल औसत पानी...

Dainik Bhaskar

Dec 09, 2018, 05:10 AM IST
Sriganganagar News - irrigation continues to fluctuate in water in the last days trouble in wheat sowing mustard paste difficult
भास्कर संवाददाता, श्रीगंगानगर।

जिले में इन दिनों गेहूं बुआई अंतिम चरण में है, लेकिन गंगनहर में न केवल औसत पानी घट गया बल्कि उतार-चढ़ाव शुरू हो गया है। हालांकि पंजाब से जानकारी मिली है कि हरिके हैड वर्क्स पर पानी को संतुलित किया जा रहा है, इसलिए गंगनहर में पानी की मात्रा घट-बढ़ रही है। गंगनहर के किसानों के लिए अब गेहूं की पछेती बुअाई और फसल पकाव चुनौती बनने लगा है। अक्टूबर एवं नवंबर में भरपूर पानी मिलने के बाद अब किसानों को निर्धारित मात्रा से पानी घटने के आसार हैं। शनिवार दिनभर में पानी की मात्रा में 100 क्यूसेक का उतार-चढ़ाव आया। सुबह खखां हैड पर 1753 क्यूसेक पानी के मुकाबले शाम को 1851 क्यूसेक हो गया। इससे एक बार तो किसानों को राहत मिली है, लेकिन वे अभी आशंकित हैं। किसानों का मानना है कि एक बाद दिसंबर एवं जनवरी में निर्धारित मात्रा में पानी मिलता रहे तो प्रमुख नकदी फसल सरसों का पकाव हो जाए। वहीं, पानी बराबर मिलता रहे तो अंतिम चरण में चल रही गेहूं की बुआई हो जाए। इसके बाद जौ, चना एवं गेहूं को पानी की जरूरत रहेगी। इनमें भी जौ एवं चने की फसल को एक-एक बार पानी की जरूरत रहेगी। इसलिए फरवरी और मार्च में भी अगर उन्हें तयशुदा पानी नहीं मिला तो फसल पकाव में दिक्कत आएगी।

किसानों का कहना है कि जनवरी तक पर्याप्त सिंचाई पानी मिलता रहे तो फसल का पकाव हो जाए

गेहूं बुआई अंतिम सप्ताह में

इस बार मौसम की अनुकूलता को देखते हुए किसानों ने सरसों, चना एवं जौ की समय पर बुआई कर दी थी। इसलिए अब केवल गेहूं की बुआई चल रही है। संभव है यह ढाई लाख हैक्टेयर के जादुई आंकड़े को पार कर जाए। क्योंकि अभी तक गेहूं बुआई 15 या 20 दिसंबर तक होने की संभावना है। अनेक स्थानों पर अगेती सरसों की फसल में फूल आ गए और खेत पीतांबरी हो गए।

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