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दिल्ली में ही इलाज चाहते हैं जेटली

दिल्ली में ही इलाज चाहते हैं जेटली अरुण जेटली की किडनी की समस्या अभी सुलझी नहीं है। हालांकि वे एम्स से घर लौट...

Danik Bhaskar | Apr 17, 2018, 04:55 AM IST
दिल्ली में ही इलाज चाहते हैं जेटली

अरुण जेटली की किडनी की समस्या अभी सुलझी नहीं है। हालांकि वे एम्स से घर लौट आए हैं। वेंकैया नायडू के कक्ष में जाकर उन्होंने राज्यसभा की सदस्यता की शपथ भी ली, दफ्तर में भी काम रोजाना की तरह ही है, लेकिन डायलिसिस की जरूरत बनी हुई है। उन्हें गुर्दे का प्रत्यारोपण भी अंततः कराना ही होगा। कई मित्रों ने उन्हें सलाह दी है कि वह अमर सिंह की तरह सिंगापुर में जाकर गुर्दे का प्रत्यारोपण करा लें। लेकिन अरुण जेटली सारा इलाज दिल्ली में ही कराना चाहते हैं। वह अपने स्वदेशी माहौल में ज्यादा सहज रहते हैं।

नायडू- टोनी ब्लेयर की यारी

कुछ दिन पहले सिंगापुर में मेक इन इंडिया को लेकर एक कार्यक्रम आयोजित किया गया था। इसमें सचिन तेंडुलकर भी थे और ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर भी थे। बीजेपी नेता नितिन गडकरी और राम माधव भी थे। मेक इन इंडिया के इस कार्यक्रम में चंद्रबाबू नायडू ने भारत की क्षेत्रीय राजनीतिक शक्तियों की और 2019 के चुनावों की बात शुरू कर दी। चंद्रबाबू ने आंध्र प्रदेश के मामलों को लेकर खुलेआम मोदी सरकार की आलोचना की और अपनी ओर से भविष्यवाणी की कि बीजेपी के लिए 2019 का चुनाव जीतना मुश्किल होगा। बीजेपी के दोनों नेताओं सहित कई लोगों ने देश के बाहर इस तरह की बातों पर शर्मिंदगी महसूस की। आगे क्या हुआ? टोनी ब्लेयर राजनीति से बेरोजगार हो चुके हैं और अब विकासशील देशों में एनजीओ चलवाने की दुकान चलाते हैं। और उनकी संस्था ने चंद्रबाबू नायडू को मदद देने की पेशकश कर दी है। नायडू ने भी उन्हें न्योता दे दिया है- कभी आओ हवेली पर।

अाम्बेडकर ऑनलाइन

भीमसेना वाले चंद्रशेखर आजाद उर्फ रावण का नाम आपने सुना होगा। आजकल ये श्रीमान एक और कारण से चर्चा में हैं। एमेजॉन और फ्लिपकार्ट की तर्ज पर उन्होंने एक ऑनलाइन दुकान खोली है, जिसमें अाम्बेडकर टी शर्ट, अाम्बेडकर अंगूठी, अाम्बेडकर कान की बाली, अाम्बेडकर लॉकेट वगैरह मिलता है। वैसे यह आइडिया कभी कम्युनिस्ट इस्तेमाल करते थे, लेकिन आजकल ट्रेंड अाम्बेडकर का चल पड़ा है।

गेंद चीन के पाले में

नीरव मोदी हॉन्ग-कॉन्ग में खोजे जा चुके हैं। भारत की 2004 से हॉन्ग-कॉन्ग के साथ प्रत्यर्पण संधि है और सरकार उसका इस्तेमाल करने जा रही है। लेकिन एक दिक्कत है। हॉन्ग-कॉन्ग पूरी तरह चीन के कब्जे में है। और चीन अपने हिसाब से फैसला करता है, न कि नियम-कायदों के हिसाब से।

मीडिया बोला, तो क्यों बोला!

पश्चिम बंगाल में चल रहे पंचायत चुनाव में भयंकर स्तर का आतंक चल रहा है। पार्टियां नाराज हैं, पब्लिक नाराज है, अदालत भी इस पर नाराजगी जता चुकी है। और तो और ममता दीदी भी नाराज हैं। वो इसलिए कि नामाकूल मीडिया यह सब दिखा क्यों रहा है। लिहाजा तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने बड़े-बड़े मीडिया घरानों के सामने जमकर प्रदर्शन किया। दीदी ने खुद भी मीडिया को खुलेआम गरियाया। बीजेपी ने पश्चिम बंगाल में सवाल उठाया है कि ममता बनर्जी मोदी सरकार की तो प्रेस की स्वतंत्रता को लेकर आलोचना करती हैं, लेकिन अपने राज्य में वह क्या कर रही हैं?

वो ही वाली बात..

जब संसद सत्र खत्म हो जाता है, तो मीडिया का खास शगल होता है - क्या कैबिनेट में फेरबदल होने वाला है? दरअसल इस बार बात यह है कि अरुण जेटली अपनी गुर्दे की समस्या के कारण शारीरिक रूप से उतने सक्रिय नहीं हैं। डायलिसिस तो चल ही रहा है, यदि प्रत्यारोपण होता है तो फिर उन्हें दो-तीन महीने आराम की भी आवश्यकता होगी। अब एक समझ यह है कि वित्त मंत्री वही रहेंगे और पीएमओ वित्त सचिव के माध्यम से नियंत्रण कर सकता है। दूसरी वाली समझ ये है कि यह वित्त विभाग है, कोई विदेश मंत्रालय नहीं। क्या होगा, यह केवल प्रधानमंत्री ही जानते हैं।

कमान नृपेन्द्र मिश्रा को

गलती चाहे जिसकी हो- चाहे जिसकी इसलिए क्योंकि कई सिद्धांत और कई सिद्धांतकार एक्टिव हैं- लेकिन कानून और व्यवस्था की हालत, बीजेपी विधायक पर दुष्कर्म का आरोप वगैरह कारणों से यूपी की स्थिति को लेकिन प्रधानमंत्री अप्रसन्न हैं। मुख्यमंत्री योगी ने हाल ही में दिल्ली में प्रधानमंत्री से मुलाकात की थी। अब प्रधानमंत्री ने नृपेन्द्र मिश्रा को यूपी के प्रशासन की देखभाल के लिए अधिकृत किया है। नृपेन्द्र मिश्रा प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव हैं और यूपी कैडर के हैं। वह यूपी को बहुत अच्छी तरह जानते हैं और अब वह नोडल व्यक्ति हैं। बहुत से अधिकारियों को स्थानांतरित किया गया है और माना जा रहा है कि इसके पीछे नृपेन्द्र मिश्रा का मस्तिष्क काम कर रहा है।

मौत ने पुरस्कार दिला दिया गालिब...

दो कलाकारों को राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मरणोपरांत दिए जाने को लेकर दिल्ली में काफी चर्चा है। चर्चा यह है इन कलाकारों को भावनात्मक सांत्वना पुरस्कार दिया गया है। जब तक बीजेपी सांसद विनोद खन्ना जीवित थे, तब तक किसी ने उन्हें पुरस्कार नहीं दिया। यहां तक कि श्रीदेवी को भी सरकार भूल चुकी थी। अभी भी कुछ बीजेपी नेता अक्षय कुमार और अन्य लोगों के लिए पैरवी कर रहे थे। अब मरणोपरांत दिए गए पुरस्कारों से वे नाखुश हैं। उधर, मंत्रालय का कहना है कि हम हर किसी को तो खुश नहीं कर सकते।

अजेय कल्लम आएंगे राजनीति में !

1983 बैच के आईएएस अधिकारी अजेय कल्लम हाल ही में आंध्रप्रदेश के मुख्य सचिव पद से सेवानिवृत्त हुए हैं। अब वह शीघ्र ही वायएसआर कांग्रेस में शामिल होकर राजनीति में आने वाले हैं।

पीयूष श्रीवास्तव को एक्सटेंशन

पीयूष श्रीवास्तव तेलंगाना कैडर के 1997 बैच के अधिकारी हैं और फिलहाल वित्त मंत्रालय में संयुक्त सचिव हैं। इनकी केंद्र में प्रतिनियुक्ति के 7 वर्ष पूरे हो चुके हैं। इसके बावजूद उनकी असाधारण परफॉर्मेंस को देखते हुए केंद्र सरकार ने 1 वर्ष के लिए उनके कार्यकाल की वृद्धि कर दी है।

आर.एस. गुप्ता का बीजेपी प्रेम

दिल्ली के पूर्व पुलिस कमिश्नर और 1968 बैच के आईपीएस अधिकारी आर.एस. गुप्ता का इन दिनों बीजेपी कार्यालय में आना - जाना ज्यादा हो रहा है। चर्चा है कि वह जल्द ही बीजेपी में शामिल हो सकते हैं।