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जहां नफरत व हिंसा के बीज बोते हैं नक्सली, वहां सीएसआईआर 5500 हेक्टेयर जमीन में उगाएगा खुशबूदार फूलों की खेती

नफरत और हिंसा से प्रभावित इलाके भी अब खुशहाली की खुशबू से महकेंगे। कश्मीर के आतंकवाद प्रभावित क्षेत्रों से लेकर...

Danik Bhaskar | Apr 17, 2018, 04:55 AM IST
नफरत और हिंसा से प्रभावित इलाके भी अब खुशहाली की खुशबू से महकेंगे। कश्मीर के आतंकवाद प्रभावित क्षेत्रों से लेकर छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में अब खुशबूदार पौधों की खेती शुरू होने जा रही है। वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) ने दुरूह जगहों पर गुलाब, गेंदे और चंपा जैसे खुशबू वाले पौधे लगाने के मिशन की शुरुआत की है। इसके लिए परिषद ने उन क्षेत्रों में जाकर वहां के किसानों को ट्रेनिंग भी दी है। इस योजना के लिए परिषद ने 5500 हेक्टेयर जमीन चिन्हित की है, जिस पर फूलों की खेती की जा सकेगी। खेतों में वेटीविरिया (खस), पलमोरोजा, लेमन ग्रास, गेंदे, गुलाब लगाए जाएंगे। इस पहल के तहत जम्मू और कश्मीर में गेंदे और लैवेंडर की खेती शुरू की जा चुकी है। यहां पर एक हेक्टेयर जमीन से किसान एक लाख रुपये तक कमा रहे हैं। सीएसआईआर के चीफ डायरेक्टर डॉ. सुदीप कुमार ने बताया कि इन खुशबूदार पौधों की खास बात यह है कि ये विपरीत मौसम में भी जीवित रह जाते हैं। कीड़े और जानवरों से फसल खराब होने का खतरा बहुत कम होता है। उन्होंने बताया कि इन क्षेत्रों में सबसे बड़ी चुनौती उन क्षेत्रों में जाकर मिट्‌टी का परीक्षण करना और किसानों को समझाना है। किसान उन स्थानों पर खेती करने से कतराते हैं। खासकर नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में, जहां किसानों को समझाने में एक साल लग गया। यहां पर अब तक 101 किसानों को ट्रेनिंग दी गई है। अब यहां लेमन ग्रास और पलमोरोजा लगाने की तैयारी की जा रही है। छत्तीसगढ़ के बस्तर, कोंडा, जगदलपुर क्षेत्रों में 10-15 एकड़ जमीन में लेमन ग्रास की खेती होनी है।

सुदीप बताते हैं कि सूखा, बाढ़ और नमक ग्रस्त क्षेत्रों में भी खेती को प्रोत्साहन करने के लिए खुशबूदार पौधे वितरित किए गए हैं। यहां पर नतीजे भी अच्छे आने लगे हैं। यहां होने वाली खेती से किसान सालाना एक हेक्टेयर में लाख रुपए कमा रहे हैं।

जम्मू-कश्मीर में गेंदे तो छत्तीसगढ़ में गुलाब और खस की खेती कराने पर दिया जा रहा जोर

जम्मू-कश्मीर: 95 एकड़ की जमीन में गेंदे और लैंवेंडर की खेती करने की योजना है।

गुजरात का कच्छ: 137 हेक्टेयर में पलमोरोजा की खेती की जाएगी।

छत्तीसगढ़ के बस्तर, कोंटा, जगदलपुर: गुलाब, लेमनग्रास, वेटीवर (खस)।

विदर्भ, मराठवाड़ा, बुंदेलखंड: लेमन ग्रास, पलमोरोजा के फूल लगाए जाएंगे।