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9 माह पहले कमर्शियल कॉम्पलेक्स की दीवार गिरने से ढह गया था मकान, पीड़ित को कहीं से नहीं मिली राहत

भास्कर संवाददाता| श्रीगंगानगर 11 जून 2017 का दिन एच ब्लाॅक निवासी गुरदीपसिंह व सुरजीतसिंह का परिवार आज तक नहीं भूल...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 17, 2018, 06:10 AM IST

भास्कर संवाददाता| श्रीगंगानगर

11 जून 2017 का दिन एच ब्लाॅक निवासी गुरदीपसिंह व सुरजीतसिंह का परिवार आज तक नहीं भूल सका है। तेज आंधी की वजह से साथ चिपते निर्माणाधीन कॉमर्शियल कॉम्पलेक्स की चौथी मंजिल की दीवार उनके मकान पर आ गिरी। इससे उनका भारी नुकसान हुआ। हादसे में मकान का एक कमरा, रसोई व बाथरूम ध्वस्त हो गए। वहीं, एक अन्य कमरे का छज्जा क्षतिग्रस्त हो गया। इसके बाद शुरू हुआ पीड़ित परिवार की परेशानियों का सिलसिला अब तक खत्म नहीं हुआ है। मकान को पहुंची क्षति की भरपाई एवं कॉमर्शियल कॉम्प्लेक्स मालिकों के खिलाफ कार्रवाई के लिए पीड़ित परिवार ने कोतवाली, एसडीएम कार्यालय, नगरपरिषद से लेकर कलेक्टर तक गुहार लगाई। लेकिन आज तक पीड़ित परिवार को न्याय नहीं मिला है। इसके चलते परिवार नौ महीने से किराए के मकान में रहने को मजबूर है। काफी मशक्कत के बाद पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया, उस पर अब एफआर लगाने की तैयारी चल रही है। जिम्मेदार विभाग अब तक कॉमर्शियल कॉम्पलेक्स मालिक के खिलाफ कार्रवाई करना तो दूर उसका पता तक नहीं लगा सके हैं।

एक आैर नोटिस देकर करेंगे कार्रवाई

नगरपरिषद की आयुक्त सुनीता चौधरी ने बताया कि तीन नोटिस का प्रावधान है, दो नोटिस दिए जा चुके हैं। बड़ी समस्या यह आ रही है कि कॉम्प्लेक्स मालिक सामने नहीं आ रहा है। जिन्होंने नोटिस लिए उन्होंने आगे जवाब नहीं पेश किया। अब एक और नोटिस देकर परिषद कार्रवाई करेगी।

काम करने की बजाय जिम्मेदार विभाग बहानेबाजी कर पीड़ित परिवार को टरकाते रहे

पुलिस| मामला झूठा बता छुड़ाती रही पीछा

सुरजीतसिंह एवं गुरदीपसिंह ने आरोप लगाया कि पहले तो कोतवाली थाने ने मामला दर्ज करने में ना नुकर की। काफी दबाव के बाद मामला दर्ज किया तो लगभग नौ माह बाद जांच अधिकारी मोहरसिंह ने लिख दिया कि मामला अदम मखु (झूठा) है। पीड़ित गुरदीप को जब पुलिस की कारगुजारी पता चली तो उन्होंने इस प्रकरण के दस्तावेज पर हस्ताक्षर करने से मना कर दिए। एसपी के आदेश पर फिर मामला दर्ज किया गया है।

जिला प्रशासन| एसडीएम के आदेश पर पहुंचा पटवारी वह नप का काम कहकर लौट गया

पीड़ित परिवार ने अनेक बार एसडीएम से संपर्क किया। एसडीएम के आदेश पर तहसीलदार ने मौका देखने के लिए पटवारी को भेजा। पटवारी मौका निरीक्षण के बाद नगरपरिषद का काम होने की बात कहकर लौट गया। जबकि कॉम्प्लेक्स की दीवार गिरने से पीड़ित परिवार के मकान में काफी नुकसान हुआ। टीवी, फ्रिज, बर्तन टूट गए और कपड़े खराब हो गए। लेकिन प्रशासन ने इसे गंभीरता से नहीं लिया।

श्रीगंगानगर. निर्माणाधीन कमर्शियल कॉम्प्लेक्स के पास स्थित मकान जो 9 माह पूर्व कॉम्प्लेक्स की दीवार गिरने से ढह गया था।

श्रीगंगानगर. एच ब्लाॅक में निर्माणाधीन कॉमर्शियल कॉम्प्लेक्स।

नगरपरिषद | अवैध निर्माण की जानकारी मिलने पर भी नहीं की कार्रवाई

पीड़ित परिवार ने दुर्घटना के दो दिन बाद यानी 13 जून को नगरपरिषद में लिखित शिकायत दी। परिषद आयुक्त के आदेश पर एक कर्मचारी मौके पर गया, लेकिन स्वीकृत तीन के बजाय अवैध रूप से दो और मंजिल के निर्माण पर कार्रवाई किए बगैर ही लौट आया। इसके बाद 6 माह तक कार्रवाई का आश्वासन दिया जाता रहा। हकीकत तो यह है कि परिषद प्रशासन आज तक यह जानकारी हासिल नहीं कर पाया है कि इस कॉमर्शियल कॉम्प्लेक्स का असल मालिक कौन है।

स्वीकृति तीन की थी, बना ली 5 मंजिल

जानकारी के अनुसार 80 एच ब्लॉक में एक कॉमर्शियल कॉम्पलेक्स निर्माणाधीन है। इसमें बेसमेंट सहित पांच मंजिल बनाई जा रही है। हालांकि नगरपरिषद ने केवल तीन मंजिल की स्वीकृति दी, इसके बावजूद कॉमर्शियल कॉम्पलेक्स मालिकों ने इसे पांचवीं मंजिल तक बना दिया। पड़ोस के दुकानदार दशरथ कुमार ने बताया कि बेसमेंट बनाते समय किसी भी पड़ोसी से स्वीकृति नहीं ली गई। हादसे से उसकी दुकानों में भी दरारें आई थी। घटना की रात को गुरदीप सिंह घर के आंगन में था। दीवार गिरने पर उसके सिर में चोटें आईं। किसी भी विभाग में सुनवाई नहीं होने पर हर तरफ से थक-हारकर गुरदीपसिंह का छोटा भाई सुरजीत सिंह अब पुन: अपने मकान में रहने आ गया है। वहीं, गुरदीप सिंह अभी भी किराए के मकान में रह रहे हैं।

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