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फीस जमा नहीं कराने पर स्कूल संचालकों ने बच्चों को परेशान किया तो रद्द होगी मान्यता

भास्कर संवाददाता| श्रीगंगानगर स्कूल की फीस जमा होने पर अब संस्था प्रधान या स्कूल संचालक बच्चे पर दबाव नहीं बना...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 17, 2018, 06:15 AM IST

भास्कर संवाददाता| श्रीगंगानगर

स्कूल की फीस जमा होने पर अब संस्था प्रधान या स्कूल संचालक बच्चे पर दबाव नहीं बना सकेंगे। फीस जमा करने के लिए संस्था प्रधानों को सीधे बच्चों के माता-पिता से संपर्क करना होगा और उनसे ही फीस जमा करने की बात कहनी होगी। अगर वह विद्यार्थियों से फीस के लिए बात करते हैं और उन्हें क्लास में सबके सामने परेशान करते हैं तो स्कूल के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। इतना ही नहीं स्कूल की मान्यता भी समाप्त की जा सकती है।

शिक्षा विभाग से मिली जानकारी के अनुसार अब कोई भी निजी शिक्षण संस्थान फीस जमा कराने के लिए किसी भी बच्चे पर दबाव नहीं डाल सकेगा। इसके लिए शिक्षा निदेशालय बीकानेर ने आदेश जारी किए हैं। प्रदेश के सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वह सख्ती से इन आदेशों को लागू करें। सहायक शासन सचिव स्कूल शिक्षा विभाग राजस्थान, बाल अधिकार संरक्षण आयोग नई दिल्ली द्वारा 12 फरवरी 2018 को जारी पत्र में कहा गया है कि निजी विद्यालयों में फीस जमा नहीं कर पाने वाले बच्चे को स्कूल प्रबंधन द्वारा अन्य बच्चों के सामने प्रताड़ित किया जाता है। अब ऐसा करने पर सीधे कार्रवाई की जाएगी। निजी स्कूल प्रबंधन की मनमानी और कमीशनबाजी पर रोक लगाने के लिए उन पर शिक्षा अधिकारियों की लगातार नजर बनी रहेगी। अधिकारियों ने बताया कि कुछ समय पहले निदेशालय ने आदेश जारी करके यह स्पष्ट किया था कि किसी भी स्कूल परिसर में शिक्षण सामग्री की बिक्री नहीं की जाएगी। अगर कोई भी स्कूल प्रबंधक स्कूल परिसर में बच्चों की कॉपी-किताबें, स्कूल ड्रेस, टाई, बेल्ट, मोजें आदि की बिक्री करता है और उन्हें बाध्य करता है तो उस पर कार्रवाई की जाएगी। स्कूल परिसर के अलावा बाजार में भी किसी व्यक्ति विशेष या दुकान से खरीददारी करने के लिए स्कूल बाध्य नहीं सकता है। कॉपी किताबों में सिर्फ एनसीईआरटी या राजस्थान राज्य पाठ्य पुस्तक मंडल द्वारा निर्धारित पाठ्यक्रम ही पढ़ाया जाएगा, जिससे यह पुस्तकें आसानी से बाजार से खरीदी जा सकें। एडीईओ माध्यमिक अशोक वधवा ने बताया कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए सरकार विभिन्न नियम बना रही है। निजी स्कूल अब बच्चों को परेशान नहीं कर सकते, क्योंकि इससे विद्यार्थियों को मानसिक तनाव होता है।

शिक्षा निदेशालय का आदेश, स्कूल प्रबंधन की मनमानी रोकने के लिए उठाया कदम

इसलिए उठाया कदम...बच्चों का मनोबल न टूटे, घटनाएं न हों

फीस जमा न होने पर कई बार बच्चों को क्लास रूम में ही सभी बच्चों के सामने कहा जाता है। बाल मन पर इसका दुष्प्रभाव पड़ता है और वह हीनभावना से ग्रसित हो जाता है। इसके चलते कई बार बच्चे आत्मघाती कदम भी उठा लेते हैं। इस संबंध में कई घटनाएं समाज में घटित हुई हैं। इसके चलते शिक्षा विभाग ने यह कड़ा कदम उठाया है। स्कूल प्रबंधन, अभिभावकों को लिखित पत्र द्वारा ही सूचना भेज सकेगा।

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