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इंडस्ट्रियल को-ऑपरेटिव स्टेट के प्लाॅट राजसात करने पर हाईकोर्ट ने दिया स्टे, संबंधित पक्ष भूखंड बना नहीं बेच सकेगा

श्रीगंगानगर| राजस्थान इंडस्ट्रियल को-ऑपरेटिव स्टेट की आेर से पार्क, 100 फीट रोड और फेसिलिटी पर काटी गई दुकानें अब...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 17, 2018, 06:15 AM IST

श्रीगंगानगर| राजस्थान इंडस्ट्रियल को-ऑपरेटिव स्टेट की आेर से पार्क, 100 फीट रोड और फेसिलिटी पर काटी गई दुकानें अब राजसात नहीं होंगी, लेकिन नए सिरे से कोई आवंटन अथवा खाली भूखंड पर तामीर नहीं किया जा सकता। जोधपुर हाईकोर्ट ने श्रीगंगानगर को-ऑपरेटिव इंड्रस्ट्रियल एस्टेट लिमिटेड, श्रीगंगानगर के चेयरमैन विजय जिंदल की याचिका की सुनवाई के दौरान यह आदेश जारी किया है। इस संबंध में जिंदल ने सोमवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि इस फैसले से उन्हें राहत मिली है। यहां विरोधी पक्ष की वजह से भ्रांतियां फैली हुई थी कि पार्क, 100 फीट रोड और शौचालय सहित फेसिलिटी पर काटे गए भूखंड राजसात हो जाएंगे। लेकिन कोर्ट ने स्पष्ट कहा है कि मामले की सुनवाई कलेक्टर नहीं कर सकते। राजसात के नोटिस को कोर्ट ने अवैध माना है। जबकि दूसरे पक्ष के वकील कुलदीप गार्गी ने बताया कि राजसात स्टे के निर्णय का मतलब आवंटनों को वैध करार देना नहीं है। प्रेस कॉन्फ्रेंस में जिंदल, प्रबंध निदेशक शिवदयाल गुप्ता एवं संचालक मंडल के अन्य सदस्यों ने बताया कि अदालत ने योगेश जिंदल पुत्र बंशीधर जिन्दल तथा सत्यप्रकाश एवं विनोदकुमार द्वारा प्रस्तुत याचिका में दो समवर्ती आदेश पारित किए थे।

यह है मामला : राजस्थान इंडस्ट्रियल को-ऑपरेटिव स्टेट श्रीगंगानगर ने अग्रसेननगर क्षेत्र में नब्बे के दशक में इंडस्ट्रियल एरिए के लिए 46 बीघा भूमि का आवंटन करवाया था। इसमें 148 इंडस्ट्रियल भूखंड काटे गए थे। इसके अलावा इसमें पार्क, 100 फीट रोड, शौचालय आदि की व्यवस्था की गई थी। 148 भूखंडों में से कुछ में उद्योग शुरू हो गए। बाद में समिति के चुनावों में नई प्रबंध समिति आ गई है। आरोप है कि समिति ने लगभग 200 दुकानें काट दीं। ये दुकानें पार्क की भूमि और 100 फीट रोड पर काटकर रोड की चौड़ाई मात्र 40 फीट रख दी गई। पूर्व के प्रबंधक बंसीधर जिंदल आदि इस फैसले के खिलाफ अदालत में चले गए। इस पर अदालत ने कलेक्टर को आदेश देकर वस्तुस्थिति की जानकारी मांगी थी। इस पर कलेक्टर ने जांच करवाकर 27 अक्टूबर 2016 को संबंधित पक्ष को नोटिस भेजकर 148 प्लाटों को छोड़कर शेष को राजसात करने का सवाल किया था। इसके विरुद्ध विजय जिंदल ने याचिका लगाई थी। अब अदालत के स्थगनादेश के बाद दुकानदारों एवं इंडस्ट्रियल को-आपरेटिव स्टेट प्रबंधन को राहत मिली है।

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