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शुगर मिल केे केमिकल का ब्यास नदी में रिसाव, हजारों मछलियां मरी, यही पानी आता है श्रीगंगानगर

भास्कर संवाददाता| श्रीगंगानगर अमृतसर क्षेत्र के श्री गुरु हरि गोबिंदपुर स्थित कीड़ी अफगान शुगर मिल से ब्यास...

Danik Bhaskar | May 18, 2018, 07:15 AM IST
भास्कर संवाददाता| श्रीगंगानगर

अमृतसर क्षेत्र के श्री गुरु हरि गोबिंदपुर स्थित कीड़ी अफगान शुगर मिल से ब्यास दरिया में सिरा केमिकल लीक हो जाने के कारण हजारों मछलियों की मौत हो गई। लोग जब सुबह 5 बजे के करीब दरिया के किनारे पहुंचे तो उन्हें इस घटना का पता चला। पहले तो लोगों ने मछलियों को उठाकर घर ले जाना शुरू कर दिया। जब इसकी जानकारी वन विभाग को मिली तो डीएफओ चरणजीत सिंह कर्मचारियों के साथ मौके पर पहुंचे और मरी मछलियों को बाहर निकालने का काम शुरू किया। वहीं पर्यावरण मंत्री ओमप्रकाश सोनी ने शुगर मिल को बंद करने के आदेश जारी कर दिए हैं और 3 दिन में रिपोर्ट देने को कहा है। जानकारी के अनुसार इस दरिया में डाल्फिन मछलियों सहित कई प्रजातियों की मछलियां पाई जाती हैं। कुछ महीने पहले ही विभाग द्वारा ब्यास दरिया में 47 घड़ियाल छोड़े गए थे। मौके पर पहुंचे डीसी कमलदीप सिंह संघा ने बताया कि श्री हरि गोबिंद साहिब के नजदीक कीड़ी अफगान शुगर मिल में एक धमाके के बाद तीन जगह से सीरा केमिकल लीक होकर दरिया के पानी में मिल गया। सीरा की मात्रा अधिक होने के कारण पानी में ऑक्सीजन की मात्रा कम हो गई। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कोई जहरीला केमिकल नहीं है। मात्र दम घुटने के कारण मछलियों की मौत हुई है। विभाग द्वारा मरी हुई मछलियों को बाहर निकालने की प्रक्रिया अभी जारी है। मारी गई मछलियों की सही मात्रा का अनुमान नहीं लगाया जा सका है। दोपहर तक दो लीकेज को तो बंद कर दिया गया, वहीं तीसरी जगह से लीकेज को बंद करने में कुछ अधिक समय लगा।

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ब्यास में डाले गए जहरीले केमिकल से मरे जलीय जीवों का निरीक्षण करने पहुंचे मंत्री व प्रदूषण नियंत्रण मंडल की टीम।

केमिकल का प्रभाव कम करने को एक हजार क्यूसेक पानी छोड़ा

ब्यास दरिया का संगम सतलुज दरिया के साथ हरिके में होता है। इसका पानी राजस्थान, सरहिंद व फिरोजपुर फीडर होते हुए गंग कैनाल में आता है। इसलिए इस दूषित पानी से श्रीगंगानगर के लोगों पर भी असर पड़ सकता है। हालांकि सीरा के प्रभाव को खत्म करने के लिए पंडोह डैम से 1000 क्यूसेक पानी दरिया में छोड़ दिया गया है। पानी का स्तर बढ़ने सेे ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ जाएगी और बची हुई मछलियों व अन्य जानवरों को कोई नुकसान नहीं होगा। उनके अलावा एमपी गुरजीत औजला और विधायक संतोख सिंह भलाईपुर ने भी ब्यास दरिया का दौरा किया।

लंबे समय से संरक्षण, कुछ दिन पहले ही बढ़ी थी डॉल्फिन की संख्या

ब्यास दरिया में इंडस रिवर प्रजाति की डाल्फिन की संख्या बढ़कर 12 से ज्यादा हो गई थी। ये खुलासा 3 से 6 मई तक किए सर्वे में हुआ है। 2008 में इनकी संख्या 2 या 3 थी। वर्ल्ड वाइड फंड फाॅर नेचर इंडिया (डब्ल्यूडब्ल्यूएफ-इंडिया) के सहयोग से वन एवं जीव सुरक्षा विभाग के विशेषज्ञों ने ये सर्वे 185 किलोमीटर स्ट्रेच में 52-हेडवर्क्स तलवाड़ा से हरिके नोज तक किया था। दरअसल डाल्फिन की यह प्रजाति पाकिस्तान में पाई जाती है। पहले इस प्रजाति की डाल्फिन पंजाब की सतलुज, ब्यास, रावी, चिनाब और झेलम नदियों में पाई जाती थी। 1974 में पंजाब के हरिके बैराज और हिमाचल में पौंग डैम बनने के बाद यह प्रजाति गायब हो गई थी। 2008 में डीएफओ ने 3 डॉल्फिन को ब्यास में देखा था। तब से इनका संरक्षण जारी था।