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5 चुनावों का सियासी गणित; 4 में वोटिंग बढ़ी तो

Shriganganagar News - 5 चुनावों का सियासी गणित; 4 में वोटिंग बढ़ी तो प्रदेश में सरकार बदली, इस बार घटे मतदान से दोनों दलों में संशय ...

Dainik Bhaskar

Dec 09, 2018, 05:15 AM IST
Suratgarh News - political mathematics of 5 elections voting increased in 4
5 चुनावों का सियासी गणित; 4 में वोटिंग बढ़ी तो प्रदेश में सरकार बदली, इस बार घटे मतदान से दोनों दलों में संशय

भास्कर संवाददाता| श्रीगंगानगर

पिछले 25 वर्ष के पांच चुनावों में श्रीगंगानगर जिले का मतदाता सत्ता विरोधी ही रहा है। जिले का पॉलिटिकल ट्रेंड रहा है कि पिछले पांच चुनावाें में जब भी मतदान प्रतिशत बढ़ा तो ये सत्ताधारियों के विरोध में मतदाताओं की नाराजगी के रूप में सामने आया। वर्ष 1993 से 2013 तक हुए पांच विधानसभा आम चुनावों में जिले के मतदाताओं ने सत्ता के प्रति नाराजगी जाहिर की। इसमें 2008 का चुनाव अपवाद साबित हुआ, जो मतदान प्रतिशत घटने के बाद भी सत्ताधारी भाजपा के प्रति मुफीद साबित नहीं हो सका। जिले की राजनीति का एक दिलचस्प पहलू ये भी है कि पिछले पांच में से एक चुनाव में ही मतदाता सत्ता के पक्ष में चली बयार में रहे। अन्यथा कोई भी पार्टी मतदाताओं के सत्ता विरोधी होने का पूरा फायदा नहीं उठा सकी। वर्ष 2013 में मतदान प्रतिशत बढ़ने का फायदा भाजपा को मिला लेकिन पूरी तरह से नहीं। जिले में छह सीटों में से किसी पर कांग्रेस खाता खोल नहीं सकी। फिर भी भाजपा चार सीटें ही जीत सकी। दो सीटों से नेशनल यूनियनिस्ट जमींदारा पार्टी अपना खाता खोलने में कामयाब रही। शुक्रवार को हुए मतदान में मतदाताओं की भागीदारी पिछले चुनाव की अपेक्षा 1.83 प्रतिशत कम रही। अब चर्चा है कि मतदान कम होने का फायदा किसे मिलेगा। इसे सत्ता के खिलाफ लोगों का गुस्सा कम होना माना जाए या फिर साइलेंट विरोध। भाजपा को दो सीटों-श्रीगंगानगर और श्रीकरणपुर तथा कांग्रेस को चार सीटों-सादुलशहर, श्रीगंगानगर, श्रीकरणपुर और अनूपगढ़ में अपने ही बागियों से चुनौती मिल रही है। इससे घटा मतदान प्रतिशत क्या परिणाम देगा, इस पर संशय है।

2018

1993 से 2013 तक विधानसभा चुनाव में वोटिंग घटने-बढ़ने का नफा-नुकसान

जिला हमेशा लहर के साथ ही चला, जिस पार्टी की सरकार बनी, उसी के विधायक ज्यादा जीते

वर्ष 1993

नतीजा: भाजपा दोबारा सत्ता में आई। लेकिन जिले में पांच में से चार सीटों पर कांग्रेस जीती। एक तरह से सत्ता विरोधी जनादेश।

वर्ष 1998

नतीजा: भाजपा सरकार के खिलाफ जनादेश। पांच में चार सीटों में से श्रीगंगानगर, केसरीसिंहपुर, श्रीकरणपुर और सूरतगढ़ में कांग्रेस जीती। सरकार भी कांग्रेस की बनी।

वर्ष 2003

नतीजा: सत्ताधारी कांग्रेस के खिलाफ हवा। जिले की पांच में से पांच सीटें भाजपा के खाते में। इस बार सरकार भाजपा की बनी।

वर्ष 2008

नतीजा: सत्ताधारी भाजपा विरोधी लहर। कांग्रेस सरकार बनी। भाजपा को सिर्फ एक सीट मिली। कांग्रेस तीन और कांग्रेस का बागी एक पर जीता। एक सीट माकपा जीती।

वर्ष 2013

नतीजा: सत्ताधारी कांग्रेस एक भी सीट नहीं जीत सकी। छह सीटों में से चार सीटों पर भाजपा और दो जमींदारा पार्टी जीती।

जिले में 61.54% मतदान, 1990 के 57.35% से 4.19% ज्यादा

69.67 % मतदान, पिछले चुनाव की अपेक्षा 8.13% ज्यादा

83.98%मतदान, जो इसके पिछले चुनाव की अपेक्षा 14.31% ज्यादा

76.74% मतदान, जो इसके पिछले चुनाव की अपेक्षा 7.24 % की कमी

84.71% मतदान, जो इससे पिछले चुनाव की अपेक्षा 7.97% ज्यादा

रोचक पहलू: आपातकाल के बाद भी लोगों ने कांग्रेस को स्वीकारा

प्रदेश में भौगोलिक और संस्कृति की दृष्टि से अलग पहचान रखने वाले श्रीगंगानगर जिले के मतदाताओं को लहर के विरोधी तासीर का भी माना जाता है। आपातकाल के बाद 1977 में हुए आम चुनाव में कांग्रेस के विरोध में लहर चली। प्रदेश में जनता पार्टी को प्रचंड बहुमत में 152 सीटों पर जीत मिली। तब श्रीगंगानगर जिले की पांच में से तीन सीटों पर श्रीकरणपुर, रायसिंहनगर और केसरीसिंहपुर में कांग्रेस जीती। सूरतगढ़ अौर श्रीगंगानगर सीट ही जनता पार्टी जीत सकी। 1993 के चुनाव में भाजपा की लहर में श्रीगंगानगर सीट से तत्कालीन मुख्यमंत्री व भाजपा प्रत्याशी भैरों सिंह शेखावत का तीसरे नंबर पर रहने को भी राजनीतिक विश्लेषक मतदाताओं का सत्ता व लहर विरोधी मिजाज होना मानते हैं।

...और हमारे शहर की हालत, 13 में से 7 बार विपक्षी पार्टी के विधायक को चुना

श्रीगंगानगर विधानसभा क्षेत्र का राजनीतिक ट्रेंड भी सरकार विरोधी रहा है। अब तक हुए 13 आम चुनावों में सात बार विधायक उन पार्टियों के निर्वाचित हुए, जिनकी प्रदेश में सरकार नहीं बनी। ऐसा 1962, 67 व 72, 85 में समाजवादी नेता प्रो. केदार के जीतने से हुआ। इसके बाद 1993 में कांग्रेस की टिकट पर विधायक राधेश्याम विधायक बने तो प्रदेश में भाजपा की सरकार थी। वर्ष 2008 में भाजपा की टिकट पर राधेश्याम गंगानगर एक बार फिर विधायक बने तो प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनी। 2013 में प्रदेश में भाजपा की सरकार बनी तो श्रीगंगानगर से विपक्षी जमींदारा पार्टी की कामिनी जिंदल विधायक निर्वाचित हुई। हालांकि वर्ष 2003 में भाजपा प्रदेश में सत्तासीन हुई तो श्रीगंगानगर से भाजपा प्रत्याशी सुरेंद्र सिंह राठौड़ जीते। तब राठौड़ और मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के बीच पटरी नहीं बैठी। दोनों के एक दूसरे से संबंध विपक्षी जैसे रहे। 1951 में कांग्रेस के मोतीराम सहारण, 57 में कांग्रेस के देवनाथ, 77 में समाजवादी नेता प्रो. केदार, 80 में कांग्रेस के राधेश्याम और 1998 में कांग्रेस से राधेश्याम गंगानगर सत्ता पक्ष के विधायक चुने गए।

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