एक जैसी डाइट हर किसी के लिए फायदेमंद नहीं

Shriganganagar News - जरूरी नहीं है कि किसी खास किस्म का आहार हर व्यक्ति के लिए फायदेमंद होगा। वर्षों की रिसर्च से पता लगा है, एक जैसी...

Bhaskar News Network

Jul 14, 2019, 09:20 AM IST
Khat News - rajasthan news a similar diet is not beneficial for everyone
जरूरी नहीं है कि किसी खास किस्म का आहार हर व्यक्ति के लिए फायदेमंद होगा। वर्षों की रिसर्च से पता लगा है, एक जैसी डाइट लेने वाले व्यक्तियों के लिए नतीजे अलग-अलग हो सकते हैं। एक नई रिसर्च ने दर्शाया है कि दो व्यक्तियों में एक जैसे भोजन को पचाने की प्रक्रिया (मेटाबॉलिज्म) पूरी तरह भिन्न रहती है। यहां तक कि एक समान डीएनए के जुड़वां लोगों में भी ऐसा होता है।

पिछले दशक से फूड और जीन्स के अंतरसंबंधों की स्टडी की साइंस-न्यूट्रिजीनोमिक्स के माध्यम से उपयुक्त डाइट की तलाश हो रही है। शोधकर्ता खाने के जेनेटिक संबंधों से जुड़ी परिस्थितियों जैसे लेक्टोस से नुकसान, पाचन से जुड़ी बीमारी सीलिएक और मेटाबोलिक दोषों से आगे जाकर काम कर रहे हैं। उन्होंने मोटापे और वजन बढ़ाने, घटाने वाले खास फूड के प्रभाव के जेनेटिक संबंधों की खोज की है।

कुछ अध्ययन न्यूट्रिजीनोमिक के निष्कर्षों पर सवाल उठाते हैं। जुड़वां बच्चों पर ताजा स्टडी से पता लगा है कि जीन्स से तय नहीं होता है कि किसी आहार के प्रति किसी व्यक्ति की क्या प्रतिक्रिया रहती है। इससे पहले 2018 में एक प्रमुख स्टडी में पाया गया कि जेनेटिक मार्कर नहीं बता सकते कि कौन सी डाइट किस व्यक्ति के लिए फिट है। दरअसल, जीन्स अकेले काम नहीं करते हैं। वे वातावरण से लेकर क्या आप स्मोकिंग करते हैं और आप क्या खाते हैं जैसे पहलुओं पर निर्भर करते हैं। वर्जीनिया टेक्नोलॉजी में न्यूट्रिशन के एसोसिएट प्रोफेसर डेबोराह गुड कहते हैं, दूसरे व्यक्ति की तुलना में आपके वातावरण और हालात पर निर्भर करता है कि फूड के प्रति आपकी क्या प्रतिक्रिया है। ये हालात फूड के प्रभाव में अंतर करते है। इसके अलावा पेट के बैक्टीरिया हमारे स्वास्थ्य के हर पहलू को प्रभावित करते हैं।

पेट के बैक्टीरिया पर सब कुछ निर्भर करता है

माइक्रोबॉयोम की रिसर्च बताती है, पेट के बैक्टीरिया को सही फूड देने से कुछ लाइलाज बीमारियों का खतरा कम हो सकता है। आपका वजन कम हो सकता है। यह भी पता लगता है कि जो डाइट आपके पड़ोसी के लिए फायदेमंद है। वह आपको सुस्त और ढीला महसूस कराता है। यदि आपके पेट में अलग किस्म के बैक्टीरिया हैं तो वे उसी फूड को भिन्न तरीके से प्रोसेस करेंगे। उसकी शारीरिक प्रतिक्रिया अलग होगी। मोटे लोगों के माइक्रोबॉयोम पतले लोगों से अलग होते हैं।

जेमी दुचार्मे

जरूरी नहीं है कि किसी खास किस्म का आहार हर व्यक्ति के लिए फायदेमंद होगा। वर्षों की रिसर्च से पता लगा है, एक जैसी डाइट लेने वाले व्यक्तियों के लिए नतीजे अलग-अलग हो सकते हैं। एक नई रिसर्च ने दर्शाया है कि दो व्यक्तियों में एक जैसे भोजन को पचाने की प्रक्रिया (मेटाबॉलिज्म) पूरी तरह भिन्न रहती है। यहां तक कि एक समान डीएनए के जुड़वां लोगों में भी ऐसा होता है।

पिछले दशक से फूड और जीन्स के अंतरसंबंधों की स्टडी की साइंस-न्यूट्रिजीनोमिक्स के माध्यम से उपयुक्त डाइट की तलाश हो रही है। शोधकर्ता खाने के जेनेटिक संबंधों से जुड़ी परिस्थितियों जैसे लेक्टोस से नुकसान, पाचन से जुड़ी बीमारी सीलिएक और मेटाबोलिक दोषों से आगे जाकर काम कर रहे हैं। उन्होंने मोटापे और वजन बढ़ाने, घटाने वाले खास फूड के प्रभाव के जेनेटिक संबंधों की खोज की है।

कुछ अध्ययन न्यूट्रिजीनोमिक के निष्कर्षों पर सवाल उठाते हैं। जुड़वां बच्चों पर ताजा स्टडी से पता लगा है कि जीन्स से तय नहीं होता है कि किसी आहार के प्रति किसी व्यक्ति की क्या प्रतिक्रिया रहती है। इससे पहले 2018 में एक प्रमुख स्टडी में पाया गया कि जेनेटिक मार्कर नहीं बता सकते कि कौन सी डाइट किस व्यक्ति के लिए फिट है। दरअसल, जीन्स अकेले काम नहीं करते हैं। वे वातावरण से लेकर क्या आप स्मोकिंग करते हैं और आप क्या खाते हैं जैसे पहलुओं पर निर्भर करते हैं। वर्जीनिया टेक्नोलॉजी में न्यूट्रिशन के एसोसिएट प्रोफेसर डेबोराह गुड कहते हैं, दूसरे व्यक्ति की तुलना में आपके वातावरण और हालात पर निर्भर करता है कि फूड के प्रति आपकी क्या प्रतिक्रिया है। ये हालात फूड के प्रभाव में अंतर करते है। इसके अलावा पेट के बैक्टीरिया हमारे स्वास्थ्य के हर पहलू को प्रभावित करते हैं।

जेमी दुचार्मे

जरूरी नहीं है कि किसी खास किस्म का आहार हर व्यक्ति के लिए फायदेमंद होगा। वर्षों की रिसर्च से पता लगा है, एक जैसी डाइट लेने वाले व्यक्तियों के लिए नतीजे अलग-अलग हो सकते हैं। एक नई रिसर्च ने दर्शाया है कि दो व्यक्तियों में एक जैसे भोजन को पचाने की प्रक्रिया (मेटाबॉलिज्म) पूरी तरह भिन्न रहती है। यहां तक कि एक समान डीएनए के जुड़वां लोगों में भी ऐसा होता है।

पिछले दशक से फूड और जीन्स के अंतरसंबंधों की स्टडी की साइंस-न्यूट्रिजीनोमिक्स के माध्यम से उपयुक्त डाइट की तलाश हो रही है। शोधकर्ता खाने के जेनेटिक संबंधों से जुड़ी परिस्थितियों जैसे लेक्टोस से नुकसान, पाचन से जुड़ी बीमारी सीलिएक और मेटाबोलिक दोषों से आगे जाकर काम कर रहे हैं। उन्होंने मोटापे और वजन बढ़ाने, घटाने वाले खास फूड के प्रभाव के जेनेटिक संबंधों की खोज की है।

कुछ अध्ययन न्यूट्रिजीनोमिक के निष्कर्षों पर सवाल उठाते हैं। जुड़वां बच्चों पर ताजा स्टडी से पता लगा है कि जीन्स से तय नहीं होता है कि किसी आहार के प्रति किसी व्यक्ति की क्या प्रतिक्रिया रहती है। इससे पहले 2018 में एक प्रमुख स्टडी में पाया गया कि जेनेटिक मार्कर नहीं बता सकते कि कौन सी डाइट किस व्यक्ति के लिए फिट है। दरअसल, जीन्स अकेले काम नहीं करते हैं। वे वातावरण से लेकर क्या आप स्मोकिंग करते हैं और आप क्या खाते हैं जैसे पहलुओं पर निर्भर करते हैं। वर्जीनिया टेक्नोलॉजी में न्यूट्रिशन के एसोसिएट प्रोफेसर डेबोराह गुड कहते हैं, दूसरे व्यक्ति की तुलना में आपके वातावरण और हालात पर निर्भर करता है कि फूड के प्रति आपकी क्या प्रतिक्रिया है। ये हालात फूड के प्रभाव में अंतर करते है। इसके अलावा पेट के बैक्टीरिया हमारे स्वास्थ्य के हर पहलू को प्रभावित करते हैं।

जेमी दुचार्मे

जरूरी नहीं है कि किसी खास किस्म का आहार हर व्यक्ति के लिए फायदेमंद होगा। वर्षों की रिसर्च से पता लगा है, एक जैसी डाइट लेने वाले व्यक्तियों के लिए नतीजे अलग-अलग हो सकते हैं। एक नई रिसर्च ने दर्शाया है कि दो व्यक्तियों में एक जैसे भोजन को पचाने की प्रक्रिया (मेटाबॉलिज्म) पूरी तरह भिन्न रहती है। यहां तक कि एक समान डीएनए के जुड़वां लोगों में भी ऐसा होता है।

पिछले दशक से फूड और जीन्स के अंतरसंबंधों की स्टडी की साइंस-न्यूट्रिजीनोमिक्स के माध्यम से उपयुक्त डाइट की तलाश हो रही है। शोधकर्ता खाने के जेनेटिक संबंधों से जुड़ी परिस्थितियों जैसे लेक्टोस से नुकसान, पाचन से जुड़ी बीमारी सीलिएक और मेटाबोलिक दोषों से आगे जाकर काम कर रहे हैं। उन्होंने मोटापे और वजन बढ़ाने, घटाने वाले खास फूड के प्रभाव के जेनेटिक संबंधों की खोज की है।

कुछ अध्ययन न्यूट्रिजीनोमिक के निष्कर्षों पर सवाल उठाते हैं। जुड़वां बच्चों पर ताजा स्टडी से पता लगा है कि जीन्स से तय नहीं होता है कि किसी आहार के प्रति किसी व्यक्ति की क्या प्रतिक्रिया रहती है। इससे पहले 2018 में एक प्रमुख स्टडी में पाया गया कि जेनेटिक मार्कर नहीं बता सकते कि कौन सी डाइट किस व्यक्ति के लिए फिट है। दरअसल, जीन्स अकेले काम नहीं करते हैं। वे वातावरण से लेकर क्या आप स्मोकिंग करते हैं और आप क्या खाते हैं जैसे पहलुओं पर निर्भर करते हैं। वर्जीनिया टेक्नोलॉजी में न्यूट्रिशन के एसोसिएट प्रोफेसर डेबोराह गुड कहते हैं, दूसरे व्यक्ति की तुलना में आपके वातावरण और हालात पर निर्भर करता है कि फूड के प्रति आपकी क्या प्रतिक्रिया है। ये हालात फूड के प्रभाव में अंतर करते है। इसके अलावा पेट के बैक्टीरिया हमारे स्वास्थ्य के हर पहलू को प्रभावित करते हैं।

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