105 व 101 साल की उम्र में राेज 2 किमी चलते हैं पैदल, यही इनके स्वस्थ रहने का राज

Shriganganagar News - भास्कर संवाददाता| रामसिंहपुर बचपन, किशोर, युवा, अधेड़ व बुढापा प्रत्येक मनुष्य जीवन में शाश्वत सत्य है। अक्सर...

Bhaskar News Network

Nov 11, 2019, 06:42 AM IST
Anoopgarh News - rajasthan news at the age of 105 and 101 years rages walk 2 km this is the secret of their healthy living
भास्कर संवाददाता| रामसिंहपुर

बचपन, किशोर, युवा, अधेड़ व बुढापा प्रत्येक मनुष्य जीवन में शाश्वत सत्य है। अक्सर देखा जाता है कि आदमी शेष अवस्थाएं तो हंसी खुशी व मौज मस्ती में गुजारता है, लेकिन वृद्धावस्था में काेई न काेई राेग चपेट में ले लेता है। कई बार ताे चलना-फिरना तक बंद हाे जाता है। एेसी अवधारणाअाें काे ग्रामीण क्षेत्र में रह रहे अर्जुनसिंह (105) व श्रीविजयनगर निवासी मेहरचंद (85) जैसे लाेग गलत साबित कर रहे हैं। हम बात कर रहे हैं उन लाेगाें कि जाे उम्र के इस पड़ाव काे भी जिंदादिली से जी रहे हैं। कारण वे खुद काे समाज की मुख्य धारा से जाेड़े हुए हैं। उम्र के इस पड़ाव में भी सक्रियता पर बुजुर्गाें का कहना है कि हकीकत में वृद्धावस्था शारीरिक परिवर्तन ही है। विज्ञान ने यह साबित कर दिया है कि बुढ़ापा शरीर से अधिक विचारों से अाता है। हमारी जीवनशैली से अाता है। साठ साल की उम्र के बाद यह मान लिया जाता है कि हम काम से सेवानिवृत्त हाे चुके। अब हमारा काम पोते-पोतियों को खिलाना, सोना या फिर दवाइयां खाना है। जबकि ऐसा कतई नहीं है।

1. चक 58 जीबी निवासी सरदार अर्जुनसिंह की उम्र 105 वर्षहैं। गांव से कस्बे का 2 किलोमीटर सफर आज भी पैदल तय करते हैं। हालांकि थोड़ा ऊंचा सुनते हैं लेकिन स्वस्थ हैं। 15-20 दिन में एक बार खुद बैंक जाते हैं। बेटे, पोते व बहू किसके खाते में कितने रुपए हैं सब जानकारी रखते हैं। परिवार में काैन क्या कर रहा है, रिश्तेदारी में अाैर गांव अाैर देश में क्या चल रहा है। खुद काे हर मामले में सक्रिय रखने के प्रयास में जुटे हैं।

2. ये हैं 85 वर्षीय मेहरचंद नागपाल। नागपाल श्रीविजयनगर के निवासी हैं, लेकिन जैतसर, रामसिंहपुर व अनूपगढ़ के सभी गौशाला कल्याण भूमि वर हॉस्पिटल को अपना ही घर मानते हैं, कहीं कोई समाज सेवा की जरूरत हो वहां हाजिर मिलते हैं। श्रीविजयनगर के रेलवे स्टेशन पर इस उम्र में सुबह-शाम पानी पिलाते नजर आते हैं। नागपाल कहते हैं हमें इसी समाज से सब कुछ मिला है। अाज इस काबिल हैं कि समाज के लिए कुछ कर सकें, ताे फिर रिटायरमेंट कैसा।

3. गांव तख्तपुरा के 101 वर्षीय मामराज भांभू। आज भी गो सेवा का अपना बरसों पुराना रूटीन नहीं छोड़ पा रहे। सुबह शाम गोवंश को चारा-पानी अपनी देखरेख में ही करवाते हैं। यहां तक कि अपनी ढाणी से 2 किलोमीटर दूर तक गायों को खुद ही चराने ले जाते हैं। भांभू बताते हैं कि बड़े बुजुर्गाें का अनुसरण करते हुए गाेसेवा करने लगे। अाज भी सिलसिला जारी है। व्यवस्तता के चलते शरीर भी सक्रिय है अाैर तनाव ताे काेसाें दूर रहता है।

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