कंट्रोवर्शियल... कोकाकोला सिंगल यूज प्लास्टिक बोतलें बंद नहीं करेगा

Shriganganagar News - जहां एक ओर पूरी दुनिया के देश अपने यहां से प्लास्टिक कचरा साफ करने के लिए टाइम लाइन फिक्स कर रहे हैं, वहीं विश्व के...

Jan 24, 2020, 09:15 AM IST
Khat News - rajasthan news controversial coca cola will not close single use plastic bottles
जहां एक ओर पूरी दुनिया के देश अपने यहां से प्लास्टिक कचरा साफ करने के लिए टाइम लाइन फिक्स कर रहे हैं, वहीं विश्व के कोल्ड ड्रिंक के दिग्गज ब्रांड कोकाकोला ने कहा है कि वह अपना ड्रिंक सिंगल यूज प्लास्टिक की बोतलों में देना बंद नहीं करेगा। इस बयान के बाद पर्यावरणविदों में इस ब्रांड के बयान के प्रति नाराजगी बढ़ रही है।

न्यूयॉर्क स्थित इस ब्रांड की प्रमुख सुश्री बी. पेरेस ने प्रेस में को सफाई दी कि उपभोक्ता खुद चाहता है कि उसे प्लास्टिक बोतल में कोकाकोला मिले। क्योंकि यह कांच की अपेक्षा बहुत हल्की होती है और ग्राहक को इसे रखने, संभालने में आसानी रहती है। यदि हम एल्युमीनियम और ग्लास का उपयोग पैकेजिंग में करने लगे तो हमारी बिक्री प्रभावित होगी और ब्रांड को अरबों डॉलर का नुकसान होगा। हम कोशिश कर रहे हैं कि धीरे-धीरे प्लास्टिक कम करें।

इस पर पर्यावरणविदों का कहना है कि पेरेस एक तरह से खुद को बचा रही हैं और सारी गलती उपभोक्ता पर थोप रही हैं। इस बयान का अर्थ तो यही होता है कि क्या विश्व में कोकाकोला पीने वाले लोग नहीं चाहते कि पर्यावरण से प्लास्टिक साफ हो? ब्रांड ने यदि अन्य मटेरियल में पैकिंग की तो भी इसे खरीदने वाले कम नहीं होंगे।

चारों ओर से विरोध में घिरने के बाद बी. पेरेस ने दावोस में आयोजित वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में कंपनी की ओर से फिर सफाई दी। वे दावे करने लगीं कि 2030 तक उनकी कंपनी जितना प्लास्टिक यूज कर रही है, उसका 50 परसेंट रीसाइकिल कर लेगी। इसके प्रति उत्तर में पर्यावरण के लिए काम कर रहे फोरम ‘चैरिटी ब्रेक फ्री’ ने कहा है कि 2019 के ऑडिट में कोकाकोला को दुनिया में सबसे ज्यादा प्लास्टिक कचरा पैदा करने वाला ब्रांड पाया गया है। इस ब्रांड का कचरा दुनिया के हर देश में यहां-वहां पड़ा देखा जा सकता है।

वैसे यह ब्रांड प्रति वर्ष 30 लाख टन प्लास्टिक का इस्तेमाल बोतल बनाने में कर रहा है। यह कितना प्लास्टिक होगा, उसका अंदाजा यूं लगा सकते हैं कि इतने प्लास्टिक से प्रति मिनट 2 लाख बोतलों का निर्माण हो सकता है। ब्रांड का यह कहना कि वह बोतलें रीसाइकिल करता है। इस पर पर्यावरणविद कह रहे हैं कि न जाने कितनी करोड़ बोतलें जमीन में और समुद्र में दफन हो रही है। ऐसे में इस ब्रांड का यह बयान हास्यास्पद होकर पर्यावरण के लिए आने वाले वर्षों में सबसे बड़ा खतरा है। Âbbc.com

जहां एक ओर पूरी दुनिया के देश अपने यहां से प्लास्टिक कचरा साफ करने के लिए टाइम लाइन फिक्स कर रहे हैं, वहीं विश्व के कोल्ड ड्रिंक के दिग्गज ब्रांड कोकाकोला ने कहा है कि वह अपना ड्रिंक सिंगल यूज प्लास्टिक की बोतलों में देना बंद नहीं करेगा। इस बयान के बाद पर्यावरणविदों में इस ब्रांड के बयान के प्रति नाराजगी बढ़ रही है।

न्यूयॉर्क स्थित इस ब्रांड की प्रमुख सुश्री बी. पेरेस ने प्रेस में को सफाई दी कि उपभोक्ता खुद चाहता है कि उसे प्लास्टिक बोतल में कोकाकोला मिले। क्योंकि यह कांच की अपेक्षा बहुत हल्की होती है और ग्राहक को इसे रखने, संभालने में आसानी रहती है। यदि हम एल्युमीनियम और ग्लास का उपयोग पैकेजिंग में करने लगे तो हमारी बिक्री प्रभावित होगी और ब्रांड को अरबों डॉलर का नुकसान होगा। हम कोशिश कर रहे हैं कि धीरे-धीरे प्लास्टिक कम करें।

इस पर पर्यावरणविदों का कहना है कि पेरेस एक तरह से खुद को बचा रही हैं और सारी गलती उपभोक्ता पर थोप रही हैं। इस बयान का अर्थ तो यही होता है कि क्या विश्व में कोकाकोला पीने वाले लोग नहीं चाहते कि पर्यावरण से प्लास्टिक साफ हो? ब्रांड ने यदि अन्य मटेरियल में पैकिंग की तो भी इसे खरीदने वाले कम नहीं होंगे।

चारों ओर से विरोध में घिरने के बाद बी. पेरेस ने दावोस में आयोजित वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में कंपनी की ओर से फिर सफाई दी। वे दावे करने लगीं कि 2030 तक उनकी कंपनी जितना प्लास्टिक यूज कर रही है, उसका 50 परसेंट रीसाइकिल कर लेगी। इसके प्रति उत्तर में पर्यावरण के लिए काम कर रहे फोरम ‘चैरिटी ब्रेक फ्री’ ने कहा है कि 2019 के ऑडिट में कोकाकोला को दुनिया में सबसे ज्यादा प्लास्टिक कचरा पैदा करने वाला ब्रांड पाया गया है। इस ब्रांड का कचरा दुनिया के हर देश में यहां-वहां पड़ा देखा जा सकता है।

वैसे यह ब्रांड प्रति वर्ष 30 लाख टन प्लास्टिक का इस्तेमाल बोतल बनाने में कर रहा है। यह कितना प्लास्टिक होगा, उसका अंदाजा यूं लगा सकते हैं कि इतने प्लास्टिक से प्रति मिनट 2 लाख बोतलों का निर्माण हो सकता है। ब्रांड का यह कहना कि वह बोतलें रीसाइकिल करता है। इस पर पर्यावरणविद कह रहे हैं कि न जाने कितनी करोड़ बोतलें जमीन में और समुद्र में दफन हो रही है। ऐसे में इस ब्रांड का यह बयान हास्यास्पद होकर पर्यावरण के लिए आने वाले वर्षों में सबसे बड़ा खतरा है। Âbbc.com

जहां एक ओर पूरी दुनिया के देश अपने यहां से प्लास्टिक कचरा साफ करने के लिए टाइम लाइन फिक्स कर रहे हैं, वहीं विश्व के कोल्ड ड्रिंक के दिग्गज ब्रांड कोकाकोला ने कहा है कि वह अपना ड्रिंक सिंगल यूज प्लास्टिक की बोतलों में देना बंद नहीं करेगा। इस बयान के बाद पर्यावरणविदों में इस ब्रांड के बयान के प्रति नाराजगी बढ़ रही है।

न्यूयॉर्क स्थित इस ब्रांड की प्रमुख सुश्री बी. पेरेस ने प्रेस में को सफाई दी कि उपभोक्ता खुद चाहता है कि उसे प्लास्टिक बोतल में कोकाकोला मिले। क्योंकि यह कांच की अपेक्षा बहुत हल्की होती है और ग्राहक को इसे रखने, संभालने में आसानी रहती है। यदि हम एल्युमीनियम और ग्लास का उपयोग पैकेजिंग में करने लगे तो हमारी बिक्री प्रभावित होगी और ब्रांड को अरबों डॉलर का नुकसान होगा। हम कोशिश कर रहे हैं कि धीरे-धीरे प्लास्टिक कम करें।

इस पर पर्यावरणविदों का कहना है कि पेरेस एक तरह से खुद को बचा रही हैं और सारी गलती उपभोक्ता पर थोप रही हैं। इस बयान का अर्थ तो यही होता है कि क्या विश्व में कोकाकोला पीने वाले लोग नहीं चाहते कि पर्यावरण से प्लास्टिक साफ हो? ब्रांड ने यदि अन्य मटेरियल में पैकिंग की तो भी इसे खरीदने वाले कम नहीं होंगे।

चारों ओर से विरोध में घिरने के बाद बी. पेरेस ने दावोस में आयोजित वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में कंपनी की ओर से फिर सफाई दी। वे दावे करने लगीं कि 2030 तक उनकी कंपनी जितना प्लास्टिक यूज कर रही है, उसका 50 परसेंट रीसाइकिल कर लेगी। इसके प्रति उत्तर में पर्यावरण के लिए काम कर रहे फोरम ‘चैरिटी ब्रेक फ्री’ ने कहा है कि 2019 के ऑडिट में कोकाकोला को दुनिया में सबसे ज्यादा प्लास्टिक कचरा पैदा करने वाला ब्रांड पाया गया है। इस ब्रांड का कचरा दुनिया के हर देश में यहां-वहां पड़ा देखा जा सकता है।

वैसे यह ब्रांड प्रति वर्ष 30 लाख टन प्लास्टिक का इस्तेमाल बोतल बनाने में कर रहा है। यह कितना प्लास्टिक होगा, उसका अंदाजा यूं लगा सकते हैं कि इतने प्लास्टिक से प्रति मिनट 2 लाख बोतलों का निर्माण हो सकता है। ब्रांड का यह कहना कि वह बोतलें रीसाइकिल करता है। इस पर पर्यावरणविद कह रहे हैं कि न जाने कितनी करोड़ बोतलें जमीन में और समुद्र में दफन हो रही है। ऐसे में इस ब्रांड का यह बयान हास्यास्पद होकर पर्यावरण के लिए आने वाले वर्षों में सबसे बड़ा खतरा है। Âbbc.com

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