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काेराेना वायरस के चलते अब ग्राहक चीन में निर्मित पिचकारियां व रंग खरीदने से कर रहे परहेज
काेराेना वायरस के चलते अब ग्राहक चीन में निर्मित पिचकारियां व रंग खरीदने से परहेज कर रहे हैं। यहां दिल्ली अादि से चाइनीज पिचकारी मंगवाकर कारोबार करने वाले कारोबारियों का कहना है कि बीते वर्ष अक्टूबर से ही चाइनीज पिचकारी व खिलौनाें की आवक नहीं हुई है। जो पुराना स्टॉक है, उसे ही बेचा जा रहा है। कारोबारियों की मानें तो पिचकारी के बाजार में चाइनीज आइटम का लगभग 35 लाख रुपए का कारोबार होता है। पुराना स्टॉक कम होने की स्थिति में कीमत भी बढ़ चुकी है। इस कोरोना वायरस का असर दुकानदारों के साथ-साथ ग्राहकों की सोच पर भी पड़ा है। इन दिनों बाजार में खरीदारी के लिए आए लोग भी चीनी उत्पादों से दूरी बना रहे हैं। यही कारण है कि इन दिनों ग्राहक दुकान पर आते ही सबसे पहले स्थानीय उत्पाद दिखाने की मांग करते हैं। साेमवार काे हाेलिका दहन अाैर मंगलवार काे सुबह लाेग एक दूसरे काे गुलाल लगाकर हाेली पर्व की बधाई देंगे।
पिचकारी सहित अन्य सामान 20 फीसदी महंगे हुए
कोरोना वायरस का असर होली के मार्केट पर भी पड़ा है। हर साल होली पर शहर में बड़ी मात्रा में चाइनीज सामान बिकता है, लेकिन इस साल कोरोना वायरस के कारण वहां से सामान नहीं आ पाया है, जिसके चलते स्टॉक कम हो गया है और पिचकारी सहित अन्य सामान 20 फीसदी महंगा हो गया है। काराेबारी बताते हैं कि पिचकारी, मास्क, हेयर विग सहित कई प्रॉप्स चाइना से अायात किए जाते हैं, लेकिन इस साल वहां से माल नहीं आया है। देसी कंपनियों से जो माल आया है उसकी कीमत ज्यादा है।
स्प्रे रंग भी बाजार से गायब : मंडी के कारोबारियों की मानें तो चाइनीज आइटम में खुशबू व झाग वाला स्प्रे रंग इस बार मंडी में नहीं आया है। पुराने स्टॉक को बेचा जा रहा है। पुराने स्प्रे रंग का इस्तेमाल करने से लोग परहेज कर रहे हैं। इस कारण भी ग्राहकों की बाजार से दूरी बनी है। कारोबारियों की मानें तो खुशबू व झाग वाले स्प्रे रंग का कारोबार लाखाें रुपए से अधिक का होता था। इस बार वो भी अब नहीं हो पाएगा। स्थानीय स्तर पर बने रंग को खरीदार प्राथमिकता दे रहे हैं। बाजार में स्प्रे रंग 50 से 250 रुपए प्रति पीस उपलब्ध है। होली के बाजार में डिजाइनर पिचकारी से लेकर मल्टी कलर के गुब्बारे तथा रंग और कलर स्प्रे चीन से बन कर आते थे।
पबजी गेम वाली बंदूकनुमा पिचकारी बनी पहली पसंद
पबजी गेम में जिस बंदूक को पकड़कर लोग दुश्मनों को मारते दिखते हैं, होली पर इस साल वैसे ही डिजाइन की बंदूकनुमा पिचकारी मार्केट में आई है। इसे नाम दिया गया है पबजी पिचकारी। इस पिचकारी को न सिर्फ बच्चे, बल्कि टीनएजर भी पसंद कर रहे हैं। इस पिचकारी के माध्यम से 15 से 20 फीट दूर खड़े व्यक्ति को भी रंगा जा सकता है। इसकी कीमत 1200 रुपए है। यही नहीं, होली पर म्यूजिकल पिचकारी भी मार्केट में आई है, जिसमें रंग बरसे... आज ना छोड़ेगे... जैसे होली के तीन हिट सॉन्ग प्ले होते हैं। मार्केट में थ्रीडी प्रिंटेड बैगनुमा पिचकारी भी मिल रही है।
इस बार सिर्फ हर्बल देसी रंग बेच रहे
संजय गाेयल ने बताया कि इस बार चाइनीज रंग और अन्य सामान नहीं आया है। उन्होंने खुद भी इस बार चाइनीज सामान के लिए ऑर्डर नहीं किया था। इस साल सिर्फ हर्बल देसी रंग और भारतीय कंपनियों के ही उत्पाद बेच रहे हैं। उनका कहना है कि चाइनीज रंग बाजार में नहीं होने का त्योहार पर ज्यादा असर नहीं है।