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शास्त्रीय नृत्य का शॉर्टकट नहीं, ये लंबी साधना है...और हां, देश में इसे देखने, सुनने और सीखने वालों की संख्या बढ़ी है: मधुमिता राउत

2 वर्ष पहले
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भास्कर संवाददाता|श्रीगंगानगर

प्रसिद्ध ओडिसी नृत्यांगना मधुमिता राउत का कहना है कि शास्त्रीय नृत्य का कोई शॉर्टकट नहीं होता बल्कि ये लंबी साधना है। उड़ीसा घराने से पहचानी जाने वाली राउत ने कहा कि शास्त्रीय नृत्य और कला सुनने, देखने और सीखने वालों में कमी नहीं आई बल्कि इसके प्रति रुझान और बढ़ा है। राउत भारतीय कैंसर सोसायटी, दिल्ली, वर्ल्ड वाइल्ड लाइफ फंड, भारत व सीएपीएफ के साथ जुड़कर कार्य कर चुकी हैं। यही नहीं इन्हें उड़ीसा राज्य घुनघुर सम्मान, उत्कल कन्या अवार्ड, महिला शक्ति सम्मान, भारत निर्माण अवार्ड, उड़ीसा लिविंग लीजेंड अवार्ड से नवाजा जा चुका है। दरअसल, मधुमति राउत बुधवार को जिला मुख्यालय पर एक कार्यक्रम में शिरकत करने पहुंची थीं। उनके साथ उनकी सीनियर शिष्या जयंती चक्रवर्ती सहित पूरी टीम मौजूद थी। पेश है भास्कर से बातचीत-

Q. क्या प्रेरणा रही है कि अापने इस डांस फाॅर्म काे चुना?

मां पढ़ाई और पिता नृत्य क्षेत्र से जुड़े हुए थे। पिता के बड़े-बड़े शागिर्द हुए है, इसमें राधा रेड्डी, जयलक्षमी ईश्वर व रंजना गाैर अादि शामिल है। मेरे पिता ही मेरे प्रेरणा स्त्राेत है।

Q. अपने अाप काे हर बार नए तरीके से कैसे तैयार करती हैं?

जब अाप मेडिटेशन करते है ताे अापके जहन में नई-नई चीजें अाती रहती है। गुरु के अाशीर्वाद के बिना कुछ नहीं है। नई तैयारी कुछ नहीं हाेती है। काेई भी कार्यक्रम हाे उसमें लास्ट समय में भी दर्शकाें के अनुरूप कार्यक्रम तैयार कर लेते है।

Q. क्या अाेडीसी नृत्य के साथ प्रयाेग ठीक है?

अाेडीसी नृत्य के साथ कुछ प्रयाेग किए जा सकते है। मैंने खुद ने बालिनी डांस में प्रयाेग करके देख चुकी हूं। इसे दर्शकों ने सराहा भी था।

Q. अापकी 40 साल की यात्रा का काैनसा पल यादगार है?

एक बार बेल्जियम में कार्यक्रम था। कार्यक्रम में पहली लाइन में एक गाैरे रंग की बुजुर्ग महिला बैठी थी। मैं इस महिला काे अपने कई कार्यक्रमाें में देख चुकी थी। लेकिन इस बार मैं महिला के पास गई तब पता चला कि वह देख नहीं सकती। तब महिला से पूछा कि अापकाे मेरे कार्यक्रम में क्या अच्छा लगता है। तब उन्हाेंने कहा कि मैं अापके कार्यक्रम में अाती हूं ताे लगता है कि मैं मंदिर में बैठी हूं।

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