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फरिश्ते टाइप नायक के कारण ही क्रांति करने से चूक गया गरीब
पिछली बार हमने रोमांटिक नायक, गायक नायक और हीमैन नायक की बात की थी। आज कुछ और नायकों के बारे में चर्चा करते हैं :
फरिश्ता टाइप नायक : फिल्मों में एक रॉबिनहुड फरिश्ता टाइप नायक आया जो हमारे बालकों और बाल बुद्धि वाले दर्शकों को बहुत पसंद आया। कहीं किसी गरीब पर अत्याचार होते हुए दिखा नहीं कि यह फरिश्ता टाइप आंखों पर नकाब पहन के प्रकट हो जाता है, सिनेमा हॉल तालियों से गूंज उठता है। कभी रॉबिनहुड तो कभी सुपरमैन बनकर आज भी वह फरिश्ता टाइप नायक अस्तित्व में है। गरीबों का हमदर्द, कमजोरों का दोस्त यह नायक अमीरों को लूटकर सारा पैसा गरीबों में बांट देता है। अपने पास एक कौड़ी भी नहीं रखता। हालांकि रख भी ली तो उससे हिसाब मांगने वाला कौन है।
इसी नायक के कारण गरीब ने आज तक क्रांति नहीं की। उसने गरीब को एक उम्मीद थमा दी। एक इल्यूजन पकड़ा दिया कि ‘मैं हूं ना।\\\' उससे उसकी कोशिश छीन ली। जब भी गरीब तकलीफ में पड़ता है तो वह हाथ पर हाथ धरे किसी सुपरमैन का या किसी रॉबिनहुड का इंतजार करता है। वह निश्चिंत होता है कि अब तक तो रॉबिनहुड घर से निकल चुका होगा! बस, पहुंचने ही वाला है।
एंग्री यंग मैन नायक : एंग्री यंग मैन नायक के आगमन से पहले मजदूर अपने मिल मालिक से नाराज था, किसान जमींदार से नाराज था, विद्यार्थी मास्टर के प्रति और आम आदमी सरकार के प्रति गुस्से में भरा बैठा था। एंग्री यंग मैन नायक ने आते ही जैसे सबका बदला ले लिया। उधर अमिताभ बच्चन जैसा पॉवरफुल अभिनेता और ऊपर से एंग्री यंग मैन की इमेज वाला नायक आया। फिल्म वालों ने लोगों के एंगर को थोक में कैश किया।
दुनिया एंग्री यंग मैन से नाराज रहती है तो एंग्री यंग मैन भगवान समेत पूरी दुनिया से नाराज रहता है। भगवान से वह पॉवरफुल संवादों से निपटता है और दुनिया से पॉवरफुल घूंसों से। दर्शक एंग्री यंग मैन से एंग्री यंग मैन जैसे व्यवहार की आशा रखता है। अमिताभ बच्चन को किसी फिल्म में बॉस डांटेगा तो दर्शक से बर्दाश्त नहीं होगा। वह अमिताभ से अपेक्षा करेगा कि खींचकर एक घूंसा मारे बॉस को, घूंसा नहीं तो कम से कम बॉस का कॉलर पकड़कर दो-चार डायलॉग ही मार दे, लेकिन दर्शक यह अपेक्षा अमोल पालेकर से नहीं रख सकता।
ट्रैजिक नायक : सिनेमा के शुरुआती दौर में ट्रैजेडी फिल्मों का बोलबाला था। के. एल. सहगल, दिलीप कुमार को ट्रैजिक नायक का रोल करने में महारत हासिल थी। दिलीप कुमार को तो ट्रैजेडी किंग तक कहा जाने लगा। दुखी नायक में धीर, विनम्र, क्षमाशील जैसे गुण रहे हैं। अपने दुख को हमेशा दाढ़ी बढ़ाकर प्रकट किया, कभी मुंह से बोलकर अपने दुख को प्रकट नहीं किया। अपने प्रेम की दुनिया को उजाड़ने वाले को उसने हमेशा माफ किया, कभी बदला नहीं लिया। ऐसा प्रात: स्मरणीय होता है ट्रैजिक नायक। आजकल दर्शकों की उपेक्षा के कारण प्राय: लुप्त-सा है। यही हालात रहे तो एक दिन डायनासोर की तरह हमेशा के लिए लुप्त हो जाएगा ट्रैजिक नायक।
हैप्पीक्रेसी आश करण अटल
पात्रों का पोस्टमार्टम
सिनेमाई