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कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न महिलाओं के अधिकारों का हनन : सुप्रीम कोर्ट

एक वर्ष पहले
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महिला कर्मचारी के ट्रांसफर आदेश को रद्द करने के मप्र हाईकोर्ट के फैसले को शीर्ष अदालत ने बरकरार रखा

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न महिलाओं के समानता, गरिमा के साथ जीने और किसी भी पेशे को अपनाने के उनके मौलिक अधिकारों का हनन है। शीर्ष अदालत ने यह टिप्पणी करते हुए बुधवार को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के उस आदेश को बरकरार रखा जिसमें एक महिला बैंक कर्मचारी के स्थानांतरण आदेश को रद्द कर दिया था। महिला ने अपने वरिष्ठ अधिकारी पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए थे। जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस अजय रस्तोगी की पीठ ने कहा किउसके सामने रखा गया मामला दिखाता है कि महिला अधिकारी ने बैंक की इंदौर शाखा में अपनी तैनाती के दौरान अफसरों को कई बार पत्र लिखकर शराब ठेकेदारों के खातों के प्रबंधन में गड़बड़ी की जानकारी दी थी और भ्रष्टाचार के खास आरोप लगाए थे। पीठ ने कहा, इसमें कोई संदेह नहीं है कि प्रतिवादी (महिला अधिकारी) को प्रताड़ित किया गया है। शाखा में अनियमितता की उनकी रिपोर्ट पर बदला लिया गया है। उनका स्थानांतरण कर दिया गया और ऐसी शाखा में भेजा गया जिसमें स्केल-1 के अफसर को जगह मिलनी चाहिए थी।’ बता दें कि दिसंबर 2017 में यौन उत्पीड़न का आरोप लगाने के बाद इंदौर में पंजाब और सिंध बैंक की महिला कर्मचारी का जबलपुर जिले की सरसावा ब्रांच में ट्रांसफर किया गया था। इसी ट्रांसफर महिला कर्मचारी ने कोर्ट में चुनौती दी थी।

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