श्रीगंगानगर पाकिस्तान से सटा होने से यहां पोलियाे वायरस के संक्रमण का खतरा

Shriganganagar News - भास्कर संवाददाता| श्रीगंगानगर पल्स पोलियो महाअभियान 19 जनवरी को शुरू होगा। छह साल पहले भारत भले ही पोलियो से...

Jan 16, 2020, 11:00 AM IST
भास्कर संवाददाता| श्रीगंगानगर

पल्स पोलियो महाअभियान 19 जनवरी को शुरू होगा। छह साल पहले भारत भले ही पोलियो से मुक्त हो चुका है। लेकिन श्रीगंगानगर जिला पाकिस्तान बॉर्डर से सटा होने की वजह से यहां पोलियो वायरस के खतरे की आशंका है। इससे बचाव के लिए 19 जनवरी को पल्स पोलियो महाअभियान शुरू हो रहा है। इसमें जिले के 0 से 5 वर्ष आयु वर्ग के 2.25 लाख बच्चों को पोलियो रोधी दवा पिलाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। शहर में 45 हजार बच्चों को पोलियो रोधी दवा की बूंदें पिलाई जाएगी।

जिला अस्पताल के शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. संजय राठी के अनुसार भारत में पोलियो के अंतिम केस 13 जनवरी 2011 को पश्चिमी बंगाल और गुजरात में मिले थे। इसके बाद तीन साल तक लगातार केस नहीं मिला तो विश्व स्वास्थ्य संगठन ने 13 जनवरी 2014 को भारत को पोलियो मुक्त देश घोषित किया। डब्ल्यूएचओ की तरफ से 27 मार्च 2014 को भारत को पोलियो मुक्त होने का प्रमाण-पत्र दिया गया। पिछले छह वर्षाें में भारत में पोलियो का कोई केस नहीं मिला है।

दवा से प्रतिरोधक क्षमता, इसी वजह से पिलाना जरूरी: डॉ. संजय राठी के अनुसार पोलिया रोधी दवा की बूंदें बच्चे के पेट में जाकर आंतों में पोलियो के वायरस के खिलाफ प्रतिरोधक क्षमता विकसित करती है। दवा पीने के बाद बच्चे में पोलियो रोधी क्षमता बनने से वायरस अटैक नहीं कर सकता। अगर कोई बच्चा दवा से वंचित रहता है तो उसमें प्रतिरोधक क्षमता नहीं बनती। इससे वंचित बच्चों के शरीर में पोलियो वायरस होने पर अटैक होने की आशंका ज्यादा रहती है। वंचित बच्चे को सुरक्षित नहीं माना जाता। वहीं पोलियाे होने के बाद इसका बचाव नहीं है। ये एक तरह से लाइलाज है। इसी वजह से बच्चे को दवा पिलाकर बचाव करने को ही बेहतर इलाज माना जाता है।

दुष्प्रभाव: मांसपेशियों पर अटैक से हो जाता है लकवा : विशेषज्ञों के अनुसार पोलियो या पोलियोमेलाइटिस एक गंभीर और खतरनाक बीमारी है। इसका वायरस 0 से 5 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों के शरीर में ज्यादा नुकसान करता है। वायरस शरीर में प्रवेश करने के बाद 10 से 20 दिनों में ही मांसपेशियों पर अटैक करता है। इससे शरीर में मांसपेशियां कमजोर होने से प्रभावित अंग काम करना छोड़ देता है। ये वायरस मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी को गंभीर रूप से हानि पहुंचाता है। इससे शरीर में स्थायी अपंगता भी आ जाती है।

तीन दिन चलेगा अभियान, 1228 बूथ: आरसीएचओ डॉ. हरबंस सिंह बराड़ के अनुसार जिले में 2.25 लाख बच्चों को पोलियो रोधी दवा पिलाई जाएगी। इसके लिए जिलेभर में 1228 बूथ बनाए जाएंगे। 19 जनवरी को विभिन्न स्थानों पर स्थापित बूथों पर पोलियोरोधी दवा पिलाई जाएगी। इसके बाद दो दिन 20 व 21 जनवरी को टीमें घर-घर जाकर बच्चों को पोलियाे रोधी दवा पिलाएगी।

खतरे की वजह: पाकिस्तान में पोलियो के केस, संक्रमण से फैलता है

शिशु रोग विशेषज्ञों के अनुसार पोलियो वायरस से फैलता है। वर्ष 2005 के बाद से पड़ोसी देश पाकिस्तान, अफगानिस्तान के अलावा सीरिया, मिस्र, तजाकिस्तान और इजरायल में पोलियो का वायरस सक्रिय है। दो पड़ोसी देशों में सक्रिय ये वायरस भारत में भी घुसपैठ कर सुरक्षा चक्र तोड़ सकता है, इसी वजह से देश पोलियो मुक्त होने के बावजूद बॉर्डर जिलों में ज्यादा सतर्क रह कर बच्चों को दवा पिलाना जरूरी है। पोलियो संक्रमित मल और पानी से फैलता है। इसका वायरस शरीर की आंतों में लंबे समय तक सक्रिय रहता है। छींक व खांसी के माध्यम से भी एक से दूसरे बच्चे तक पहुंच सकता है। इसी वजह से बॉर्डर जिलों में पोलियो वायरस से संक्रमण के प्रति विशेष एहतियात बरती जाती है।

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