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11वीं की छात्रा ने की खुदकुशी, पिता बोले-परीक्षा से डर रही थी, कहती थी, मैं फेल हो जाऊंगी

एक वर्ष पहले
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परीक्षा के दिनों में बच्चों से खुलकर बात करें और बच्चों को अकेला न छोड़ें

गांव 33 जीजी का मामला, 10 अप्रैल से शुरू होनी
थी वार्षिक परीक्षा


कस्बे के निकटवर्ती गांव 33 जीजी में परीक्षा के तनाव के चलते एक छात्रा ने शुक्रवार सुबह करीब 9:30 बजे घर में ही फंदा लगाकर जान दे दी। घटना के समय मृतका के माता-पिता सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र चूनावढ़ में चेकअप करवाने के िलए अाए हुए थे अाैर भाई गांव में गए हुए थे। पीछे से 15 वर्षीय छात्रा ज्योति ने माैत काे गले लगा लिया।

छात्रा काे अचेत अवस्था में चूनावढ़ के सरकारी अस्पताल में लाया गया, जहां डॉक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया। सूचना मिलने पर चूनावढ़ व पदमपुर पुलिस सरकारी अस्पताल पहुंची और घटना स्थल का मौका मुआयना किया।

मृतका के पिता धनराज मेघवाल ने पुलिस काे दी िरपाेर्ट में बताया िक उसकी बेटी ज्याेति चूनावढ़ के राजकीय गर्ल्स सीनियर सेकंडरी स्कूल में कक्षा 11वीं की छात्रा थी। वह पढ़ाई में काफी कमजोर थी जिस कारण वह तनाव में थी । कई िदनाें से वह परीक्षा में फेल हाेने की अाशंका जता रही थी। पेपरों से परेशान होकर उसने अात्महत्या कर ली।

पुलिस ने मर्ग दर्ज कर पाेस्टमार्टम के बाद शव परिजनाें काे साैंप िदया। पुलिस के अनुसार कक्षा 11 वीं की परीक्षा 10 अप्रेल काे प्रारंभ हाेने वाली थी, मगर परीक्षा में फेल के डर से वह तनाव में थी।

4 उदाहरणों से समझिए; सफलता के लिए % जरूरी नहीं, काबिलियत होनी चाहिए

n हमेशा ऐसा सोचें, मैं खास हूं।

n तनाव हो तो खुलकर हंसने का प्रयास करें।

n अभिभावक, भाई-बहन, दोस्त, शिक्षक व काउंसलर से बात करें।

n अकेले रहने से बचें, सबके बीच बैठने का प्रयास करें।

n पढ़ाई के बीच समय निकालकर पसंद की गतिविधियां भी करें।

n योग व ध्यान करें, परीक्षा को जीवन से बढ़कर न समझें।

मैंने कॅरिअर में 9000 से ज्यादा शॉट मिस किए हैं। करीब 300 मैचों में हम हारे हैं। 26 मौके ऐसे थे, जब मैंने उस भरोसे को तोड़ा...जब लोगों ने सोचा कि मैं विनिंग शॉट लगा सकता हूं। मैं जीवन में लगातार विफल होता चला गया और इसलिए आज मैं सफल हूं।’माइकल जॉर्डन, महानतम बॉस्केट बॉल प्लेयर्स में से एक (अमेरिकी मूल के खिलाड़ी)

अभिभावक

n बच्चों को समय दें और बातचीत करें।

n दूसरे बच्चों से तुलना न करें।

n हमेशा उन्हें प्रोत्साहित करें।

n परीक्षा में अधिक अंक लाने के लिए दबाव न बनाएं।

शिक्षक

n अभिभावक से बच्चों की उपस्थिति में बात न करें।

n कमजोर बच्चों की पढ़ाई में सहयोग करें।

n बच्चों को प्रताड़ित न करें, मानसिक कष्ट न पहुंचाएं व कठोर शब्दों का प्रयोग न करें।

हनुमानगढ़ एसपी राशि डोगरा ने बताया कि अंकों से बच्चों को निराश नहीं होना चाहिए। उन्हें किस क्षेत्र में जाना है। सिर्फ तैयारी करें, सफलता तो निश्चित है।

प्रवीण भाटिया का कहना है कि मेरे अनेक विद्यार्थियों के 10वीं, 12वीं व स्नातक में कम अंक आए, लेकिन उनकी मेहनत व लगन की बदौलत वे सब आज सरकारी सेवाओं में हैं।

कलेक्टर जैन ने बताया कि परीक्षा के दिनों में विद्यार्थी कोई तनाव न रखें। हर बात शेयर करें। प्रतिशत के पीछे न भागे, काबिल बने।

प्रतिशत की भीड़ से बाहर निकलो। कभी भी प्रतिशत के पीछे मत भागो। मेरे 12वीं में 70 % अंक आए थे। प्रतियोगिता परीक्षाएं फाइट करने के लिए प्रतिशत नहीं, एकाग्रता, लक्ष्य पर फोकस व लगन जरूरी होनी चाहिए।

% के पीछे मत भागो, लक्ष्य निर्धारित है तो सफलता जरूर मिलेगी

राशि डोगरा, एसपी, हनुमानगढ़

10वीं में मेरे 41 प्रतिशत अंक ही आए थे तो 12वीं में 45 फीसदी अंक के साथ एक विषय में सेप्लीमैंट्री आई। लेकिन मेहनत नहीं छोड़ी। अभी 300 आईएएस, 125 आरएएस व 2500 युवाओं को सरकारी नौकरी में चयन करवाया।

10वीं में 41% थे, 12 वीं 45% पूरक परीक्षा से पास, अब आईएएस की करवा रहे तैयारी

प्रवीण भाटिया, प्रधानाचार्य

आरएएस की परीक्षा पास की। आरएएस बना। फिर आईएएस। आज कलेक्टर हूं। दसवीं और बारहवीं कक्षा के अंक ज्यादा मायने नहीं रखते। उद्देश्य क्लीयर होना चाहिए। सफलता अपने आप आ जाएगी।

10वीं में 57%, 12वीं में 50% अंक, सफलता के लिए उद्देश्य जरूरी


डीसी जैन, कलेक्टर, पाली
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