रेतीले बीच पर जोर लगाकर गेंद फेंकते थे इसी आदत ने बनाया सबसे घातक गेंदबाज

Bhaskar News Network

Mar 17, 2019, 04:11 AM IST
Khat News - rajasthan news this habit made the ball the most deadly bowler made by throwing the ball on the sandy beach

सेपरामादू लसिथ मलिंगा का जन्म 28 अगस्त 1983 को गाल, श्रीलंका में हुआ था। वे एक मध्यमवर्गीय परिवार से थे। लगभग 11 साल की उम्र में उन्होंने क्रिकेट खेलना शुरू कर दिया था। उनके गांव रथगामा के पास में ही एक बीच था, जहां वो और उनके कुछ दोस्त क्रिकेट खेलने के लिए अक्सर जाया करते थे। वहां नारियल के बहुत सारे पेड़ थे, जिनकी वजह से हमेशा छांव रहती थी। छांव की ठंडक का मलिंगा और उनके दोस्त पूरा फायदा उठाते थे। वे लोग घंटों तक उस बीच पर क्रिकेट खेला करते थे। बीच पर फैली बालू रेती की वजह से उनको बॉल फेंकने में काफी जोर लगाना पड़ता था। खेलने के लिए टेनिस की सॉफ्ट बॉल हुआ करती थी, जिसके साथ खेलना मुश्किल होता था। यही वजह थी जो उनके बॉल फेंकने का एक अलग ही अंदाज बन गया। जोर लगाकर बॉल फेंकने की जरूरत ने उन्हें तेज और घातक बॉलर बना दिया। पढ़ाई पूरी करने करने के लिए मलिंगा का दाखिला विद्या तिलक विद्यालय में करवा दिया गया। पांचवी कक्षा में स्कॉलरशिप मिलने के बाद उन्हें विद्या लोक स्कूल में दाखिला मिल गया और यहीं उन्होंने अपने करियर की शुरुआत भी की। इसी स्कूल में चंपका रामनायके ने मलिंगा को क्रिकेट खेलते देखा और वे उनकी प्रतिभा से बहुत प्रभावित हुए। मलिंगा एक ऐसे हीरे की तरह थे, जिसे तराशा जाना बाकी था। यह काम चंपका ने गाल क्रिकेट क्लब में उनका दाखिला करवाकर किया। सबसे पहले तो मलिंगा को अपना बॉलिंग एक्शन सुधारने के लिए कहा गया। लेकिन इस वजह से उनकी एक्युरेसी और स्पीड दोनों ही घट गईं। चंपका को समझ आ गया कि मलिंगा अपने सहज अंदाज से ही सबसे अच्छी गेंदबाजी कर पाएंगे। इसीलिए उन्हें अपने पुराने अंदाज में खेलने के लिए कहा गया। धीरे-धीरे वे प्रसिद्ध हुए और 2004 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टेस्ट क्रिकेट में उन्हें खेलने का मौका दिया गया। अपने पहले ही मैच में उन्होंने 6 विकेट लेकर तहलका मचा दिया। उनका ऐसा प्रदर्शन देखकर ऑस्ट्रेलियन टीम भी प्रभावित हुई। इसी वर्ष उन्हें ओडीआई खेलने का मौका भी मिला। वहां भी उन्हें खूब सराहा गया। अब वे श्रीलंका के सबसे घातक गेंदबाज बन चुके थे। उनकी लगभग हर बॉल खतरनाक यॉर्कर होती थी। उन्हें "टो -क्रशर' भी कहा जाने लगा था। जल्द ही मलिंगा को श्रीलंका का कप्तान बना दिया गया। 2011 में मलिंगा ने टेस्ट क्रिकेट को अलविदा कह दिया था।

इनके जीवन से मिली ये सीख



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