घड़साना सप्लाई होनी थी नशीली दवा की दाे साै शीशियां, दिल्ली की कंपनी का एमअार हुआ गिरफ्तार

Shriganganagar News - भास्कर संवाददाता|श्रीगंगानगर तत्कालीन अाईपीएस हीतिका वासल द्वारा चहल चाैक पर 19 मार्च काे पकड़ी गई दाे साै...

Bhaskar News Network

Aug 22, 2019, 10:50 PM IST
Raisinghnagar News - rajasthan news whackers had to be supplied with drug vials delhi company arrested
भास्कर संवाददाता|श्रीगंगानगर

तत्कालीन अाईपीएस हीतिका वासल द्वारा चहल चाैक पर 19 मार्च काे पकड़ी गई दाे साै प्रतिबंधित नशीली दवा की शीशियांे के दर्ज मुकदमें में पांचवीं गिरफ्तारी की गई है। अाराेपी काे काेतवाली पुलिस नई दिल्ली के स्लम एरिया से हिरासत में लेकर श्रीगंगानगर लाया गया है। अाराेपी काे बुधवार दाेपहर अदालत में पेशकर रिमांड पर लिया गया है। अाराेपी से इस मामले में अागे की पूछताछ की जाएगी।

काेतवाल हनुमानाराम बिश्नाेई ने बताया कि अाईपीएस हीतिका वासल की टीम ने 19 मार्च काे श्रीगंगानगर निवासी टिंकू उर्फ अर्पित अाैर रायसिंहनगर निवासी राहुल काे हिरासत में लेकर दाे साै नशीली प्रतिबंधित दवा की शीशियां बरामद की थीं। अाराेपियाें के खिलाफ दर्ज मामले की जांच काेतवाली पुलिस काे दी गई। पुलिस जांच में अाराेपियाें ने बताया कि वे उक्त दवाएं नशे के रूप में बेचने के लिए दिल्ली से लेकर अाए थे। दिल्ली में उनकाे भागीरथ पैलेस में माेनूसिंह नाम के व्यक्ति ने उक्त दवा की खेप बेची थी। पुलिस ने दिल्ली से माेनूसिंह काे गिरफ्तार कर पूछताछ की ताे उसने राजकुमार उर्फ साेनू स्वामी से यह दवा लेना बताया। साेनू काे गिरफ़्तार कर पूछताछ की तब उसने मनाेज रावत का नाम लिया। मनाेज रावत दिल्ली की लाेरेंस राेड स्थित झुग्गी-झाेपड़ियाें में रहता है। उसका नाम सामने अाने के बाद श्रीगंगानगर से रीडर निहाल बिश्नाेई अाैर राधेश्याम की टीम काे दिल्ली भेजा गया।

अाराेपी मनाेज किसी दवा निर्माता कंपनी में एमअार की नाैकरी करता था। पुलिस उसकी कंपनी में गई ताे अाराेपी उस दिन बेटी के बीमार हाेेने के कारण अाया नहीं था। जैसे ही उसे कंपनी से फाेन कर पूछताछ के लिए बुलाया ताे वह डर गया अाैर गायब हाे गया।

किसी असली फर्म के नाम का बिल काटकर तस्कराें काे थमा देता था स्टाॅक

एसएचअाे बिश्नाेई ने बताया कि अाराेपी जिस कंपनी में काम करता था वह कंपनी बड़े पैमाने पर स्टाॅक का निर्माण कर अपना मुनाफा लेकर नेशनल डिस्ट्रीब्यूटर काे दे देती है। नेशनल स्टॉकिस्ट इस दवा काे अागे बेचने के लिए एमआर नियुक्त करता है। अाराेपी उक्त दवा के स्टाॅक काे किसी वास्तविक फर्म के नाम से बिल काटकर नकद भुगतान पर उठा लेता था। इस स्टाॅक काे वह अागे तस्करी के लिए बेच देता था। इसमें उसे माेटा मुनाफा हाे जाता था।

पुरानी नाैकरी छाेड़ी, न वेतन लेेने गया न ही पीएफ का पैसा, दूसरी कंपनी में कर रहा था नाैकरी

रीडर निहाल बिश्नाेई ने बताया कि अाराेपी की काफी पड़ताल की तब सामने अाया कि उसने पुरानी कंपनी की नाैकरी ही छाेड़ दी है। वह पुलिस छापेमारी के बाद से वापस काम पर नहीं अाया। उसने न अप्रैल के बाद से वेतन लिया न ही अपने परिलाभ का पैसा लेने गया। उसने दिल्ली में ही दूसरी दवा निर्माता कंपनी में नाैकरी शुरू कर दी थी। उसके ठिकाने का पता लगाकर पकड़ने गए। अनेक कठिनाइयाें का सामना करते हुए अाराेपी काे काबू किया अाैर पकड़कर लाया गया है।

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