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हवा शांत होने से वातावरण में गर्द के गुब्बार, दृश्यता कम हुई, रोजाना 150 अस्थमा रोगी आ रहे अस्पताल

Shriganganagar News - भास्कर संवाददाता| श्रीगंगानगर आसमान में पिछले चार पांच दिनों से छाए धूल के गुब्बार अस्थमा व एलर्जी के राेगियों...

Bhaskar News Network

Jul 14, 2019, 11:15 AM IST
Sriganganagar News - rajasthan news with the air cooling down the atmosphere the viscosity of the atmosphere decreased visibility decreased 150 people visiting asthma patients daily
भास्कर संवाददाता| श्रीगंगानगर

आसमान में पिछले चार पांच दिनों से छाए धूल के गुब्बार अस्थमा व एलर्जी के राेगियों की तकलीफ बढ़ा रहे हैं। इसके साथ गर्मी और उमस ने भी लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। जिला अस्पताल में ही रोजाना 150 से ज्यादा अस्थमा के राेगी धूल की वजह से तकलीफ बढ़ने पर इलाज करवाने पहुंच रहे हैं। शनिवार को सुबह से शाम तक आसमान में धूल का आवरण बना रहा। मौसम विज्ञानियों के अनुसार आसमान में हवाएं शांत होने की वजह से ऐसा हो रहा है। तेज हवाएं चलने या फिर बरसात होने पर ही धूल का आवरण छंट सकता है। अब दिन रात के तापमान का अंतर भी कम हो रहा है। सोमवार को इसमें अंतर महज 7 डिग्री सेल्सियस का था। मौसम विभाग ने श्रीगंगानगर में अधिकतम तापमान 2.2 डिग्री सेल्सियस गिरावट के साथ 39.1 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 6.3 डिग्री सेल्सियस इजाफे के साथ 32.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया।

धूल की वजह से सूरज की चमक भी सामान्य दिनों की तरह ज्यादा नहीं होती। दृश्यता भी कम हो रही है। शनिवार को मौसम विभाग ने दृश्यता 92 दर्ज की। इसमें महज 500 मीटर से 700 मीटर तक ही देखा जा सकता है। सामान्यतः इन दिनो में आसमान साफ होने पर दृश्यता का स्तर 96 रहता है। इसमें एक किलोमीटर से ज्यादा दूरी तक देखा जा सकता है। शनिवार को तापमान कम होने के बावजूद हवाओं की गर्माहट की वजह से लोग ज्यादा परेशान हुए। धूल के बारीक कण फसलों के पत्तों पर चिपक रहे हैं। इससे फसलों को नुकसान होने की आशंका है।

धूल के गुब्बार की वजह: डस्ट रेजिंग विंड का बहाव,मतलब आसमान में हवाएं स्थित,जमीन से उठ रहे कण

मौसम विभाग के जयपुर कार्यालय के डायरेक्टर शिव गणेश के अनुसार इन दिनों में मानसून देरी से है। हवा का कम दबाव का क्षेत्र या फिर किसी साइक्लोन का बनना भी नहीं हो रहा है। सामान्यतः हवाएं जमीन की सतह से आसमान में 2.5 से 3 किलोमीटर तक समान गति से चलती है। लेकिन इन दिनों में जमीन पर डस्ट रेजिंग विंड चल रही हैं। आसमान में हवाएं शांत हैं। इससे नीचे से उठी धूल के बारीक कण आसमान में ही आवरण के रूप में है।

माैसम विभाग के स्थानीय कार्यालय के वैज्ञानिक मनाेहर लाल रणवा के मुताबिक तीन-चार दिन से अासमान में धूल छायी हुई है। ये आंधी नहीं है। ये डस्ट रेजिंग विंड हैं। प्राय: जून के महीने में ये हवाएं चलती हैं। इसमें धूल भरी हवाएं ज्यादा दूर नहीं जा पाती। लेकिन यह स्थानीय सिस्टम भी अभी तक नहीं बना पा रही। यह पश्चिमी विक्षाेभ का संकेत भी नहीं है। अाम ताैर पर दिन अाैर रात के तापमान में अंतर काफी ज्यादा घट जाए ताे बरसात के आसार हाेते हैं, लेकिन अभी बरसात की संभावना कम है।

धूल की छतरी बनी, कम हाे गया सूरज की किरणाें का असर

मौसम के जानकारों के अनुसार पश्चिम दिशा से अाई धूल उत्तरी पूर्वी दिशा में अागे नहीं बढ़ सकी क्याेंकि पहाड़ी क्षेत्र में ताे इन दिनाें बरसात हाे रही है। यह हवा हमारे वातावरण में पसर गई। इससे सूरज की किरणाें का असर कम हाे गया। लेकिन वातावरण की धूल गर्म हाेने लगी, इससे रातें भी गर्म होने लगी हैं।

श्रीगंगानगर जिले की हवाओं में छाया धूल का गुब्बार

डॉक्टर की सलाह...अस्थमा के रोगी मास्क लगाकर रखें, आंखों का बचाव करें

जिला अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. पवन सैनी के अनुसार इन दिनों में वातावरण में तैर रहे धूल के बारीक कण श्वास नली से फेफड़ों पर पहुंच जाते हैं। इससे अस्थमा रोगियों के फेफड़ाें में अवांछित तत्व जाने से फेफड़ाें की झिल्लियां सिकुड़ जाती हैं। इससे अस्थमा रोगियों की तकलीफ बढ़ जाती है। अस्थमा रोगियों को मुंह पर मास्क लगाकर बाहर निकलना चाहिए। तकलीफ होने पर डाॅक्टर से चेकअप करवाकर दवा लेनी चाहिए। धूल आंखों भी तकलीफ देती है। इससे बचाव के लिए आंखों को चश्मे से कवर करना चाहिए। धूल के कण बहुत अधिक महीन होने के कारण आखों में चले जाने से आंखों की रोशनी पर बुरा प्रभव पड़ता है। अधिक समय तक मौसम ऐसा ही रहा तो देखने की क्षमता स्थाई रूप से भी कम हो सकती है। इसलिए दिन में कम से कम 6 से 8 बार ठंडे साफ पानी से आंखें धोनी चाहिए। अगर दिक्कत अधिक हो तो नेत्र रोग विशेषज्ञ से परामर्श करें। सामान्य व्यक्ति भी बाहर के मौसम से घर पहुंचे तो चेहरा और हाथ पानी से धोकर साफ कपड़े से पोंछ लें।

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