- Hindi News
- National
- Khat News Rajasthan News Zafar Is Old Friend Of Scindia Having Been A Banker For 20 Years When He Entered Politics There Was Opposition In The Family Itself
सिंधिया के पुराने दोस्त हैं जफर, 20 साल बैंकर रहे, राजनीति में आए तो परिवार में ही विरोध हुआ
जन्म- 1971
शिक्षा- अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी, आईआईएम अहमदाबाद
जिम्मेदारी- एयर इंडिया के स्वतंत्र निदेशक
डॉ. सैयद जफर इस्लाम भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता हैं। आर्थिक और राजनीतिक मुद्दों पर पार्टी का पक्ष मीडिया के सामने रखते हैं। ख़बरों के केंद्र में होते हुए भी खुद ख़बर नहीं बनते। ज्योतिरादित्य सिंधिया प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने उनके घर गए, तब भी डॉ. जफ़र उनके साथ थे, बीजेपी में शामिल होने के लिए सिंधिया जब पार्टी कार्यालय तब भी जफर उनके साथ ही थे। ख़बरों के मुताबिक डॉ. सैयद जफर पिछले पांच महीनों में सिंधिया से इस मामले पर बात कर चुके हैं, हालांकि दोनों पुराने दोस्त हैं और एक-दूसरे को लंबे समय से जानते हैं।
डॉ. सैयद जफर इस्लाम 2013 से पहले लाइमलाइट में नहीं थे। अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से ग्रैजुएशन और फिर आईआईएम अहमदाबाद से एमबीए करने के बाद वह बैंकिंग सेक्टर में आ गए। दो दशक के अपने बैकिंग कॅरिअर में कई भूमिकाएं निभाईं। ड्यूश बैंक के इंडिया एमडी भी नियुक्त किए गए। डॉ. जफ़र की प|ी भी बैंकर हैं। एक आर्टिकल में जफर ने लिखा था कि 2013 से पहले सीधे तौर पर उनका राजनीति से कोई वास्ता नहीं था। हालांकि इसमें उनकी बहुत रुचि थी। यूनिवर्सिटी और फिर आईआईएम में पढ़ाई के दौरान उन्हें समझ आया कि देश की समस्याओं की जड़ में वित्तीय समस्याएं भी हैं।
2013 में नरेंद्र मोदी की जीत के बाद जफ़र ने राजनीति में उतरने का निर्णय ले लिया। जफर ने एक आर्टिकल में लिखा है कि वे पहले कई राजनीतिक पार्टी के लोगों से मिले। कांग्रेस के नेताओं से भी मुलाकात की, लेकिन कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं मिलीं। तभी मुलाकात नरेंद्र मोदी से हुई और मोदी ने उन्हें राजनीति में आने के लिए प्रेरित किया। बकौल जफर, मोदी ने कहा था, ‘अगर टिकट के लिए राजनीति में
आ रहे हैं, तो मत आइए।’ जफर कहते हैं कि भाजपा में आने के बाद सबसे कठिन परिवार वालों को मनाना था। पड़ोसी दुश्मन तक समझने लगे थे। दोस्तों को आश्चर्य हुआ कि अच्छी-खासी नौकरी छोड़कर राजनीति में आने का फैसला क्यों लिया। लेकिन वक्त के साथ उनकी यह धारणा बदलती चली गई।