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आड़े आई आचार संहिता, अब चुनावों के बाद ही शुगर मिल में शुरू हो पाएगी गन्ने की पिराई

भास्कर संवाददाता| श्रीगंगानगर किसानों की मांग के बावजूद इस बार शुगर मिल में पिराई सत्र समय पर शुरू होने के आसार...

Dainik Bhaskar

Nov 11, 2018, 09:20 AM IST
Sriganganagar - the code of conduct for illegal now after the elections
भास्कर संवाददाता| श्रीगंगानगर

किसानों की मांग के बावजूद इस बार शुगर मिल में पिराई सत्र समय पर शुरू होने के आसार नहीं है। आचार संहिता के कारण शुगर मिल जरूरी सामान खरीद पाने में असमर्थ है, जबकि किसानों का दबाव है कि रिकॉर्ड उत्पादन को देखते हुए अगर 15 नवंबर तक पिराई शुरू नहीं की गई तो गन्ना पिराई समय पर नहीं हो पाएगी। किसानों ने आशंका जताई है कि शुगर मिल में पिराई लक्ष्य के अनुसार नहीं होती, इसलिए किसानों को परेशानी होगी। समय पर खेत खाली करने का संकट, उचित भाव सहित अनेक समस्याओं से किसान जूझ रहे हैं। नई मिल स्थापित होने के बाद से मिल प्रशासन और किसानों की समस्या घटने के बजाय बढ़ी है। किसानों ने आरोप लगाया कि कुछ खेतों में इस साल मिली बग का प्रकोप देखने में मिला है। इससे 3 से चार लाख क्विंटल गन्ना उपज में गिरावट आने के आसार हैं।

गन्ना उत्पादन को लेकर मिल प्रशासन और किसानों के अलग-अलग मत

गन्ना उत्पादन मामले में शुगर मिल प्रशासन और किसानों के अलग-अलग मत हैं। किसानों का मानना है कि इस बार 22 लाख से क्विंटल से अधिक गन्ना होगा, जबकि मिल प्रशासन 16 लाख क्विंटल से अधिक गन्ना नहीं मान रहा। मिल प्रशासन के अनुसार 16 लाख क्विंटल में से लगभग तीन लाख क्विंटल गन्ना गुड़ बनाने, ज्यूस के लिए बिक्री और बीज रखने में काम आएगा। शेष 13 लाख क्विंटल गन्ना बचेगा, जिसकी मिल तीन महीने में पिराई कर देगा। उधर किसानों का आरोप है मिल प्रशासन ने सर्वे सही तरीके से नहीं किया। खेतों में इस बार गन्ना अच्छी हालत में है। अगर मिली बग जैसी बीमारी से किसानों ने पार पा ली तो गन्ना 22 लाख क्विंटल से ऊपर होगा।

15000 क्विंटल प्रति दिन नहीं हो पा रही है पिराई

कमीनपुरा में वर्ष 2015-16 के सत्र से गन्ने की पिराई शुरू की गई थी। उस समय मंत्री सुरेंद्रपाल सिंह टीटी ने दावा किया था कि मिल की पिराई क्षमता 17000 से 20000 क्विंटल रोजाना है। टीटी ने कहा था कि नई शुगर मिल में गन्ना पिराई एवरेज 15000 क्विंटल रहेगी। लेकिन मिल में 15000 क्विंटल रोजाना औसत पिराई नहीं आ रही। पिछले साल पूरे पिराई सत्र में मात्र 10 दिन ऐसे थे जब 16000 क्विंटल गन्ना रोजाना पिराई हुआ, जबकि 15000 क्विंटल गन्ना पिराई मात्र 15-16 दिन ही रहा। 21 दिसंबर को पिराई शुरू हुई और 71 दिन तक चले सत्र में 7 लाख 73 हजार क्विंटल गन्ना पिराई हुआ।

अगर मिल प्रशासन सारा गन्ना खरीदता है तो पांच महीने चल पाएगी पिराई

पिछले तीन वर्षों के अनुभव को देखते हुए इस बार अगर शुगर मिल प्रशासन सारा गन्ना खरीदता है तो पिराई में 5 महीने लग जाएंगे। किसान आशंकित हैं कि पुराने ढर्रे पर मिल चली तो पिराई मई महीने तक चलेगी। ऐसे में अगले सत्र के लिए गन्ने की रोपाई नहीं हो पाएगी। किसानों को समय पर लेबर नहीं मिलेगी।

मिली बग का प्रकोप, प्रशासन ने नहीं ली सुध

इस बार गन्ने की फसल में एक माह पूर्व मिली बग का प्रकाेप देखा गया था। किसानों ने सरकार को अवगत कराया लेकिन कृषि विभाग और शुगर मिल प्रशासन के पास कोई विशेषज्ञ सुपरवाइजर अथवा पौध संरक्षण अधिकारी नहीं है। इसलिए किसानों ने अपने स्तर पर अगर समाधान नहीं किया तो 3-4 लाख क्विंटल उत्पादन में गिरावट आ जाएगी।

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