बिहार में श्रीगंगानगर के किन्नू का फलाहार लेकर व्रत खोलेंगे छठ मैया के भक्त / बिहार में श्रीगंगानगर के किन्नू का फलाहार लेकर व्रत खोलेंगे छठ मैया के भक्त

Shriganganagar News - भास्कर संवाददाता|श्रीगंगानगर जिले के 10500 हैक्टेयर में हरे-संतरी रंग से लकदक किन्नू के फल अब पकाव पर हैं। लेकिन...

Bhaskar News Network

Nov 11, 2018, 09:17 AM IST
Sriganganagar - the devotee of chhath maiya will open fast by taking the fruits of kinnu in sriganganagar in bihar
भास्कर संवाददाता|श्रीगंगानगर

जिले के 10500 हैक्टेयर में हरे-संतरी रंग से लकदक किन्नू के फल अब पकाव पर हैं। लेकिन कुछ चकों में ठेकेदारों ने किसानों से बाग ठेके पर लेकर तोड़ाई शुरू कर दी थी। दीपावली से करीब 10 दिन पहले नेतेवाला, हरखेवाला, मिर्जेवाला, दौलतपुरा, फतूही आदि शहर के निकटतम इलाकों में किन्नू तोड़ाई का काम परवान पर चढ़ गया है। हालांकि अभी तक किन्नू पूरी तरह नहीं पका। किन्नू के फल मध्य दिसंबर के बाद ही पूरी तरह पकते हैं। इस पर किसान और ठेकेदार फल तोड़कर वैक्सिंग और ग्रेडिंग प्लांट में लेजाकर छंटाई करवा लेते हैं। इसके बाद पैकिंग की जाती है और यह ट्रकों के जरिए देश के दूसरे हिस्सों में जाता है। इसके अलावा श्रीगंगानगर का किन्नू नेपाल, भूटान, बांग्लादेश और श्रीलंका में भी जाता है। गंगानगरी किन्नू की मिठास ही ऐसी है कि यह पकाव से पहले तोड़ाई होकर बिहार के अनेक शहरों में पहुंच जाता है। बिहार के प्रसिद्ध त्योहार डाला छठ मैया के तीन दिवसीय पर्व पर महिलाएं एवं पुरुष व्रत के दौरान बतौर फलाहार किन्नू का इस्तेमाल करते हैं।

कुछ चकों में ठेकेदारों ने किसानों से बाग ठेके पर लेकर शुरू कर दी थी तोड़ाई

चूंकि इन दिनों केवल सेब के अलावा नागपुरी संतरा बाजार में आता है, लेकिन ये दोनों फल बाजार में काफी महंगे बिकते हैं। इसलिए बिहार के निम्न मध्यमवर्गीय जनजीवन के लिए किन्नू अधिक लोकप्रिय हैं। किन्नू व्यापारी रामप्रताप ने बताया कि नागपुरी संतरे और सेब बहुत उच्च वर्ग के लोग इस्तेमाल करते हैं। यहां के ठेकेदारों ने बिहार के इस त्योहार को देखते हुए किन्नू समय पूर्व तोड़ाई शुरू कर दी है। पंजाब में किन्नू में पकाव राजस्थान से कम से कम 15 दिन देरी से आता है। इसलिए श्रीगंगानगर जिले के किन्नू को ज्यादा मांग रहती है।

पांच हजार क्विंटल किन्नू पहुंचा बिहार: ठेकेदारों के अनुसार इस साल अब तक पटना सहित बिहार आैर झारखंड के कई बड़े शहरों में 25 से 30 ट्रक किन्नू दीपावली तक पहुंच गया। ठेकेदारों ने कुछ अगेते किस्म के बागों से दीपावली से 10 दिन पहले तोड़ाई शुरू कर दी थी। हालांकि यह पूरी तरह नहीं पका, लेकिन मांग को देखते हुए तोड़ाई की गई है। बिहार में पांच हजार क्विंटल किन्नू पहुंच चुका है।

28 लाख क्विंटल प्रति वर्ष उत्पादन: जिले में 10500 हैक्टेयर से अधिक भूमि में किन्नू के बाग हैं। यहां प्रति बीघा 70 क्विंटल किन्नू का औसत उत्पादन होता है। इस प्रकार जिले में 28 से 30 लाख क्विंटल किन्नू का उत्पादन होता है। यह किन्नू देश के विभिन्न हिस्सों में जाता है। इस बार भी बंपर फसल की उम्मीद है।

पूल के कारण किसानों से सस्ता किन्नू हथिया रहे ठेकेदार: ठेकेदार अभी किसानों से अनुमानित वजन के आधार पर प्रति किलो 9 से 12 रुपए देते हैं। इस प्रकार अभी बाजार में कम से कम 20 रुपए प्रति किलो किन्नू मिल रहा है। किसान नेता सत्येंद्रपाल सिंह 3 ओ ने बताया कि इस बार पंजाब और राजस्थान के ठेकेदारों ने पूल बना लिया है। सिंह का आरोप है कि ठेकेदार किसानों का किन्नू औने-पौने दामों में खरीद रहे हैं। अगर पूल नहीं टूटा तो किसानों को नुकसान की अाशंका है।

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