बुआई से पहले 10-15 रु. किलो था प्याज, अब 5 से 6 रुपए मिल रहे / बुआई से पहले 10-15 रु. किलो था प्याज, अब 5 से 6 रुपए मिल रहे

Seekar News - बुआई के समय ऊंचे भावों को देखकर बड़े स्तर पर प्याज की खेती करने वाले शेखावाटी के किसानों की उम्मीदें मंडी में आते...

Bhaskar News Network

Dec 09, 2018, 05:05 AM IST
Sikar News - 10 15 rupees before sowing kg onion now get 5 to 6 rupees
बुआई के समय ऊंचे भावों को देखकर बड़े स्तर पर प्याज की खेती करने वाले शेखावाटी के किसानों की उम्मीदें मंडी में आते ही टूटने लगी हैं। मार्केट में महज एक माह पहले 20 से 25 रुपए प्रतिकिलो तक बिकने वाले प्याज के थोक भाव अब नई फसल आते ही चार से सात रुपए किलो तक हो गए हैं। सीकर मंडी में नए प्याज की प्रतिदिन आवक पांच हजार कट्टे है। कारोबारी जगदीश मैलासी व राजेंद्र सैन के अनुसार लागत व उपज मूल्य से तुलना की जाए तो किसानों को कोई फायदा नहीं हो रहा है। सीकर कृषि उपज मंडी प्याज व्यापार संघ के नेमीचंद दूजोद का कहना है कि भावों को देखते हुए किसानों में बेचैनी बढ़ रही है। सरकार से प्याज के भावों में सुधार कराने की मांग की जाएगी।

नई फसल पर किसानों को मुनाफे के बजाय दो से तीन रुपए प्रतिकिलो तक का खर्चा जेब से लगाना पड़ रहा है। यानी एक किलो प्याज का लागत मूल्य सात रुपए है और किसानों को मंडी में चार से सात रुपए से ज्यादा भाव नहीं मिल रहे हैं। किसानों को मिल रही औसत कीमत महज पांच रुपए से ज्यादा नहीं बैठ रही है।

पांच हजार हैक्टेयर बढ़ा बुआई रकबा : किसानों को लागत मूल्य मिलना भी मुश्किल

उद्यान विभाग के अनुसार सीकर जिले में प्याज का बुआई रकबा 5000 हजार बढ़ गया है। यानी हर साल बुआई रकबा 10 हजार के करीब रहता है। इस साल 15000 हैक्टेयर पहुंच गया है।


समझिए प्रति हैक्टेयर लागत का गणित

बीज : 10 किलो ग्राम यानी 4000 के भाव से 40 हजार

खेत की तैयारी : 6000 रुपए

कम्पोस्ट खाद : 10 हजार

कीटनाशक व उर्वरक: 10 हजार

नर्सरी तैयारी : 10 हजार

ट्रांसप्लांट खर्चा : 40 हजार

फसल कटाई : 30 हजार

सिंचाई : 20 हजार

मंडी खर्चा : 20 हजार

कुल लागत : 1.96 लाख

प्रतिकिलो औसत लागत : 7 रुपए

मंडी भाव : चार से सात प्रतिकिलो

प्रतिकिलो नुकसान : 2 रुपए

प्रति हैक्टेयर नुकसान : 56 हजार

प्रति हैक्टेयर उत्पादन का गणित

उत्पादन: 28 टन

मार्केट भाव : चार से सात रुपए

औसत मार्केट : भाव पांच रुपए प्रतिकिलो

घाटा : दो रुपए प्रतिकिलो

30 हजार से ज्यादा लोगों को रोजगार : तीनों गांवों में सीजन के दौरान सीकर सहित दूसरे जिलों के करीब 30 हजार श्रमिकों को प्याज व्यवसाय से रोजगार मिला हुआ। ये वो श्रमिक हैं जो खेतों पर निराई-गुड़ाई के लिए जाते हैं। इसी तरह सीकर कृषि उपज मंडी में पांच महीने की सीजन के दौरान 500 श्रमिक हर दिन सीकर मंडी में काम करते हैं। वहीं बाहरी राज्यों में प्याज भेजने के लिए सीकर के वाहन भी किराए पर लिए जाते हैं।

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