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वीरभान का बास ऐसे बना आज का सीकर

7 वर्ष पहले
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सीकर. 327 सालों में विकास की रफ्तार का पहिया बिना रुके लगातार चल रहा है। शहर ने विकास की दौड़ के बीच अपना रंग और स्वरूप जरूर बदला लेकिन संस्कृति व परंपरा का साथ कभी नहीं छोड़ा। विक्रम संवत 1744 में राव दौलतसिंह ने सीकर शहर की स्थापना की थी। उस दौरान सुभाष चौक में छोटा गढ़ बनाया गया था। इतिहास के जानकार महावीर पुरोहित बताते हैं, वीरभान का बास गांव पर सीकर शहर को बसाया गया था। 1954 तक शहर पर 11 राजाओं ने राज किया। अंतिम राजा रावराजा कल्याणसिंह थे। इन्होंने 34 साल राज किया। 15 जून 1954 को राव राजा कल्याणसिंह ने शासन की बागडोर राज्य सरकार को सौंप दी। सीकर को वीरभान का बास के बाद श्रीकर के नाम से जाना जाता रहा। इसे शिखर भी कहा जाता था, क्योंकि गढ़ पर बसाया गया था। जैन मंदिर में रखे शिलालेख में सीकर का नाम शिवकर बताया गया है। क्योंकि दौलतसिंह के बाद राजा बने शिवसिंह ने चारदीवारी व नहर बनवाई थी। सीकर के स्थापना दिवस पर विशेष रिपोर्ट।



शहर के बीचों बीच स्थित घंटाघर 1967 में युवराज हरदयाल की स्मृति में राव रानी स्वरूप कंवर((जोधीजी)) ने बनाया था। 85 फीट के घंटाघर की नींव ही 30 फीट भरी हुई है। घड़ी में जितने बजते थे उतने ही घंटे लगते थे, जो कि पूरे शहर में सुनाई देते थे लेकिन आज दस साल के करीब हो गए। घंटाघर की घड़ी खराब पड़ी है।

६ बुनियादी बदलावों से समझिए ३२७ सालों में हमने कितना कुछ पाया

:आमदनी : शुरुआत के वक्त सीकर राज्य हुआ करता था। इसकी सालाना आमदनी 20 लाख रुपए थी। आज सीकर शहर में हर साल करीब 100 से 150 करोड़ रुपए विभिन्न कार्यों पर खर्च होते हैं। जिले की सालाना आमदनी करीब एक अरब है।

:साक्षरता : साक्षरता दर औसत 17 से बढ़कर 85 फीसदी पहुंच गई है। 1960 से 1980 के बीच कई स्कूल व कॉलेज संचालित हुए। अब शहर में पांच बड़े कोचिंग संस्थान, 10 बड़े स्कूल संचालित हैं। जहां अन्य जिलों से भी विद्यार्थी अपने अरमान पूरे करने आ रहे हैं।

:मेडिकल : मेडिकल में सुविधाएं बढ़ रही हैं। अब कैथलैब, एंजियोग्राफी, पेसमैकर, माइनर हार्ट ऑपरेशन, डायलिसिस, एमआरआई, सिटीस्केन सहित कई सुविधाएं मौजूद हैं। इसके अलावा नर्सिंग की कई कॉलेज खुल चुकी हैं। मेडिकल कॉलेज की मांग जारी है।

:मोबाइल : सीकर स्टेट में करीब तीस फोन हुआ करते थे। फिलहाल शहर में 80 हजार लोगों के पास मोबाइल हैं। उस वक्त दस रेडियो थे, आज 80 फीसदी घरों में टेलीविजन हैं। हर घर में लोगों के पास कम्यूटर उपलब्ध हैं।

:वाहन : सीकर में रावराजा कल्याण सिंह सहित कुछ नामी सेठ-साहूकारों के पास ही कार व मोटरसाइकिल हुआ करती थी। 1950 तक सीकर में 45 कार व मोटरसाइकिल थी। अब शहर में करीब छह हजार से अधिक टैक्सी तथा इतने ही अन्य वाहन दौड़ते हैं।

:स्कूल-कॉलेज : रावराजा माधोसिंह ने सीकर शहर में 1922 में आठवीं कक्षा तक का स्कूल शुरू कराया था। सीकर में दसवीं तक का स्कूल 1927, 12 वीं तक 1940 व कॉलेज 1958 में शुरू हुआ। अब तो शहर में गल्र्स के लिए भी तीन बड़े कॉलेज हैं।

सीकर रेलवे स्टेशन का भवन 1921 में जयपुर स्टेट के महाराजा सवाई माधो सिंह ने बनवाया था। जिसपर 12 जुलाई 1922 को पहली ट्रेन जयपुर से पहुंची थी। पहले ओपन रेलवे स्टेशन था। हालांकि भवन गुंबद में छेद छोड़े हुए थे। जिनकी सहायता से टेंट भी लगाया जाता था। उस दौरान जयपुर से सीकर का किराया मात्र 15 आने था।