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भास्कर खुलासा: एफसीआई गोदाम लाए तो 30 में से 22 हजार बोरी मूंग घटिया निकला

स्टोरेज के लिए एफसीआई गोदाम में लाया गया था मूंग, क्वालिटी खराब मिलने पर एफसीआई ने वापस लौटने के दिए निर्देश

Dainik Bhaskar

Dec 16, 2017, 07:36 AM IST
bhaskar special report on Coriander purchase

श्रीमाधोपुर. एफसीआई श्रीमाधोपुर में स्टोरेज के लिए तीन हजार क्विंटल मूंग लाया गया था। 30 हजार मूंग के बैग में से 22 हजार बैग जांच में फेल हो गए। यह मूंग नागौर जिले के क्रय-विक्रय सहकारी समिति से लाया गया था और खरीद केंद्रों पर समर्थन मूल्य पर खरीदा गया था। इस मूंग की कुल कीमत करीब 15 करोड़ रुपए बताई जा रही है। जांच में फेल होने के बाद हांसपुर रोड स्थित एफसीआई गोदाम के बाहर 100 से ज्यादा ट्रकों की लंबी लाइन लग गई। मूंग की जांच वेयर हाऊस में तैनात नैफेड के सर्वेयर ने की। सवाल यह है कि गरीबों तक पहुंचने वाला यह मूंग क्वालिटी में खरा क्यों नहीं उतर पाया? क्या सहकारी समितियों पर मूंग को बदल दिया गया?


सच जानने के लिए दैनिक भास्कर ने मौके से ग्राउंड रिपोर्ट तैयार की है। कुचामन, डेगाना, परबतसर, रियाबाड़ी, जालसू खुर्द तथा डीडवाना खरीद केंद्रों के प्रभारियों का दावा है कि समर्थन मूल्य खरीद केंद्रों पर नैफेड के सर्वेयर ने किसानों से खरीद किए गए इसी मूंग के सैंपल को पास किया है। सवाल यह है कि अगर वहां यह मूंग पास हुआ है तो नागौर से श्रीमाधोपुर के रास्ते के बीच ही क्वालिटी घटिया कैसे हो गई और जांच में फेल कैसे हो गया।

एफसीआई गोदाम पर इस मूंग का भंडारण करने से इनकार कर दिया गया। इस पर विवाद बढ़ता देख सीकर केंद्रीय सहकारी बैंक के प्रबंध निदेशक व उप रजिस्ट्रार मनोहरलाल शर्मा भी शुक्रवार शाम को एफसीआई गोदाम पहुंचे। शर्मा ने भास्कर को बताया कि सर्वेयरों द्वारा गुणवत्ता जांच में ज्यादातर मूंग की क्वालिटी खराब बताई है। कोऑपरेटिव सचिव जयपुर ने मूंग की ग्रेडिंग कराकर भंडारण करने के लिए कहा है।

सवाल : अगर सहकारी समितियों में मूंग सही था तो श्रीमाधाेपुर पहुंचते-पहुंचते खराब कैसे हो गया?

सवाल यह है कि अगर सहकारी समितियों पर खरीद के वक्त मूंग सही था तो श्रीमाधोपुर एफसीआई गोदाम पहुंचते-पहुंचते इसकी क्वालिटी खराब कैसे हो गई। क्योंकि-इसकी कुल लागत करीब 15 करोड़ रुपए है।

कुचामन खरीद केंद्र प्रभारी महेंद्र सिंह ने बताया कि वे 3 हजार क्विंटल मूंग भंडारण के लिए आए हैं। इनकी लागत करीब 3 करोड़ 60 लाख है।

वहीं डेगाना क्रय विक्रय सहकारी समिति मुख्य प्रबंधक मांगीलाल शर्मा ने बताया कि 5 हजार क्विंटल मूंग लेकर आए, इनकी लागत 5 करोड़ 60 लाख है।

परबतसर खरीद केंद्र प्रभारी महेंद्र सिंह ने बताया कि करीब 2 करोड़ 84 लाख रुपए की खरीद कर मूंग भंडारण के लिए लाए है।

रियाबाड़ी खरीद केंद्र प्रभारी मनसाराम ने बताया कि 2400 क्विंटल मूंग जिनकी लागत करीब 1 करोड़ 33 लाख 80 हजार है।

जालसू खुर्द के सहकारी समिति व्यवस्थापक राजेंद्र जाखड़ ने बताया कि 1 करोड़ 33 लाख का खरीद किया गया मूंग सर्वेयरों की मनमानी के चलते खुले आसमान में खड़ा है। ट्रकों में लदे मूंग की बोरियों में से महज दस की जांच करके पूरे ट्रक के मूंग को रिजेक्ट किया जा रहा है।

निर्देश के बावजूद वापस नहीं लौटे ट्रक
जांच में फेल होने के बाद ट्रकों को वापस लौटने के लिए कहा गया लेकिन ट्रक वापस नहीं लौटे। इधर स्टार एग्री सर्वेयरों का कहना था कि जांच में फेल गए क्रास लगे मूंग के कट्टे दूसरे ट्रकों में आए। वहीं, ट्रकों के बाहर खड़े रहने से अन्य वाहन चालकों को परेशानी हो रही है।

ये हैं समर्थन मूल्य पर खरीद के लिए निर्धारित मापदंड

मापदंड के अनुसार मूंग में विजातीय तत्व जैसे कंकड़, मिट्टी, कचरा 2 प्रतिशत, अन्य मिश्रण 3 प्रतिशत, क्षतिग्रस्त दाने 3 प्रतिशत, आंशिक क्षतिग्रस्त दाने 4 प्रतिशत, अधपके, अविकसित सिकुड़े दाने 3 प्रतिशत, छेदयुक्त दाने 4 प्रतिशत एवं नमी की मात्रा 12 प्रतिशत से अधिक नहीं होनी चाहिए। जबकि नागौर जिले से आए मूंग की औसत क्वालिटी बेहद खराब है। केंद्रीय भंडारण गृह के भंडारण मैनेजर बीएल मीणा ने बताया कि वेयर हाऊस के तकनीकी सहायकों ने रिपोर्ट दी है कि 10 दिसंबर से नागौर की सहकारी समितियों से वेयर हाऊस में मूंग की आवक हो रही है जिनकी क्वालिटी बेहद खराब है। इसके अतिरिक्त खराब माल को फेल करने के संबंध में पार्टियों द्वारा धमकी भी दी जा रही है।

घटिया क्वालिटी के ये 3 कारण हो सकते हैं

1. कमीशन लेकर खरीदा गया : खरीद केंद्रों पर कमीशन लेकर घटिया क्वालिटी का ही मूंग खरीदा गया होगा। इसके बाद वहां पर इसे रिपोर्ट में अच्छा बता दिया गया।

2. रास्ते में बदला गया होगा : यह भी संभावना है कि एफसीआई गोदाम लाने जाने के दौरान इसे बदल दिया गया होगा। अच्छा अनाज महंगे दाम पर कालाबाजारी करने वालों को बेच दिया होगा।

3. कालाबाजारी की संभावना : यह भी आशंका है कि खरीद केंद्रों से ही बड़े व्यापारियों को कुछ मूंग बेच दिया गया होगा। बाद में इसमें मिलावट कर दी गई। जो एफसीआई में जांच में फेल हो गया।

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