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इंजीनियरिंग के बाद नेवी में हुआ सिलेक्शन, फिर मजदूरी की और बोरियां उठाई

जमशेदपुर में टाटा स्टील में मैकेनिकल इंजीनियर के बेटे हर्ष ने पिता की सलाह पर इंजीनियरिंग की।

Dainik Bhaskar

Jan 29, 2018, 03:49 AM IST
Doing work for society after complete engineering

झुंझुनूं/सीकर. झारखंड के जमशेदपुर निवासी हर्ष प्रकाश ने आईआईएम से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की डिग्री लेने के बाद लाखों रुपए का पैकेज छोड़ समाज सेवा को कॅरियर के रूप में चुना है। उसने इसका अनुभव प्राप्त करने के लिए राजस्थान के झुंझुनूं जिले के पांच गांवों को चुना। इन गांवों में वह एक-एक माह तक रहेगा, ग्रामीण परिवेश और उनकी समस्याओं को जान कर उनके समाधान के लिए कार्य करेगा। हाल ही उसने पातूसरी गांव में बिताए अपने एक माह के प्रवास के बाद भास्कर से बातचीत में अपने अनुभव साझा किए।


- जमशेदपुर में टाटा स्टील में मैकेनिकल इंजीनियर के बेटे हर्ष ने पिता की सलाह पर इंजीनियरिंग की। इंडियन नेवी मेें उसका सलेक्शन भी हो गया, लेकिन उसने बंधी-बंधाई जिंदगी जीने के बजाय कुछ अलग करने का फैसला किया। पढ़ाई के दौरान वह पीरामल फाउंडेशन के संपर्क में आया। उसे कैवल्य फाउंडेशन के गांधी फैलोशिप की जानकारी मिली।

- इसके बाद उसने समाज के वंचित तबके के लिए काम करने का फैसला किया। मैकेनिकल में डिग्री करने के बाद उसने पिता को अपनी इच्छा बताई।

- पिता ने उसे ग्रामीण जीवन के अभावों और डिग्री के बाद मिलने वाले पैकेज के बारे में काफी समझाइश दी, लेकिन इच्छा के मुताबिक समाज के लिए काम करने की सोच जीत गई।

कंपनियां अपनी पॉलिसी
- ग्राम्य जीवन में आने वाली कठिनाइयों का अहसास करने के दौरान होने वाले अनुभवों के आधार पर हर्ष विस्तृत रिपोर्ट बनाएगा।

- यह रिपोर्ट कैवल्य फाउंडेशन को सौंपी जाएगी जो समाज के अभावग्रस्त तबके के लिए बड़ी कंपनियों को सेवा कार्यों (सीएसआर) की योजना बनाने में सहायक होगी।

- देशभर की बड़ी कंपनियां इस तरह के प्रोजेक्ट्स को स्पांसर कर रही हैं, ताकि वे सामुदायिक सेवा के तहत वंचित वर्ग के हित के लिए काम कर सकें। हर्ष जैसे फैलो की रिपोर्ट के आधार पर ही भविष्य में कंपनियां अपनी पॉलिसी बनाएंगी।

पातूसरी गांव में सालों से बंद लाइब्रेरी को खुलवाया

- हर्ष ने सबसे पहले पातूसरी को कर्म क्षेत्र चुना। उसने पातूसरी में एक महीना बिताया। इस दौरान ग्रामीण परिवेश के सामाजिक ताने बाने और रीति रिवाजों को समझा।

- उसने गांव के एक परिवार के साथ रहना तय किया। पहले तो उस परिवार ने किसी अजनबी को साथ रखने से मना कर दिया, लेकिन उसने अपनी कहानी बताई तो परिवार तैयार हो गया।

- हर्ष ने गांव में चल रहे एक निर्माण कार्य पर सीमेंट की बोरी और पत्थर उठाने तक का काम किया। दो दिन की मजदूरी के रूप में उसे 800 रुपए मिले।

- गांव में ही अनाज की दुकान पर पलदारी का काम किया। शिक्षकों से पढ़ाने के तरीके जाने। दो सप्ताह तक शोध किया।

- उसे पता चला कि गांव का एक पुस्तकालय कई साल से बंद है। उसने बच्चों के साथ मिल कर सफाई की और उसे गांव वालों के लिए खुलवाया।

भविष्य के लिए आज कर रहे हैं काम
- हर्ष ने बताया कि भविष्य में देश के सामने प्रकट होने वाली समस्याओं को समझने और उनके समाधान के लिए आज ही काम करने की जरूरत महसूस हो रही है।

- वह अगले चरण में जिले के भीमसर, सीगड़ा, कासिमपुरा और नयासर में भी एक-एक माह बिताएगा। पूरे प्रवास की रिपोर्टिंग तैयार कर फाउंडेशन को सौंपेगा।

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